GORAKGPUR. रेलवे भर्ती बोर्ड गोरखपुर के पूर्व चेयरमैन व वेस्टर्न रेलवे के पूर्व चीफ इलेक्ट्रिक इंजीनियर (सीईई) के आवास पर सीबीआई की छापेमारी में कई दस्तावेज जब्त किये गये हैं. पादरीबाजार स्थित आवास पर गुरुवार को लखनऊ से आयी सीबीआई की टीम ने छापेमारी की थी. यह छापा चेयरमैन के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा की जांच का हिस्सा है. सीबीआई टीम ने कार्मिक और इंजीनियरिंग विभाग के दो लोगों के यहां भी जांच की है. लेकिन दोनों नहीं मिले.
लखनऊ से आयी सात सदस्यीय सीबीआइ टीम ने कुल चार लोगों के आवास पर छापेमारी की है. इसमें तीन रेलकर्मी और एक बाहरी है. यह छापेमारी रेलवे बोर्ड विजिलेंस की नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा को लेकर की गयी अनुशंसा के बाद की गयी है. रेलवे भर्ती बोर्ड गोरखपुर कार्यालय के पूर्व चेयरमैन पीके राय, इंजीनियरिंग विभाग में तकनीशियन विनय कुमार श्रीवास्तव, कार्मिक विभाग में कार्मिक सहायक वरुण राज और एक सुजीत कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद सीबीआई की टीम गोरखपुर आयी थी.
रेलवे बोर्ड फर्जीवाड़ा में संलिप्तता की पुष्टि के बाद पूर्व चेयरमैन को पहले ही सेवा मुक्त कर चुका है. नवंबर 2022 में गोरखपुर से हटाने के साथ रेलवे बोर्ड ने उन्हें निलंबित कर दिया था. आरोप है कि चेयरमैन स्वयं और कर्मचारियों के सहयोग से वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थियों को भी पैनल में शामिल कर देते थे. इस तरह लाखों की वसूली होती थी. तकनीशियन व लोको पायलट की भर्ती में फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद ही रेलवे विजिलेंस ने छापेमारी कर गंभीर अनियमितता पकड़ी थी. यह जांच पहले रेलवे बोर्ड विजिलेंस के पास थी. उसकी अनुशंसा पर यह मामला सीबीआई को दिया गया है.
बताया जाता है कि चेयरमैन पीके राय के हटाने के बाद पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य कार्मिक अधिकारी नुरुद्दीन अंसारी को बोर्ड अध्यक्ष बना दिया गया. व्यवस्था बदलने के बाद भी यहां फर्जीवाड़ा चलता रहा. रेलवे भर्ती बोर्ड कार्यालय गोरखपुर में तैनात दो रेलकर्मियों ने 26 अप्रैल, 2024 को जारी पैनल में फर्जी ढंग से अपने बेटों का नाम शामिल कर दिया था. सात अभ्यर्थियों के पैनल में बिना फार्म भरे, परीक्षा दिए, बिना मेडिकल टेस्ट और बिना अभिलेखों की जांच कराए ही अपने बेटों को शामिल कर नौ कर दिया.














































































