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ECR : पूर्व मध्य रेलवे के विधुत विभाग का नया कारनामा, मैदान में बिना काम के करोड़ों का भुगतान!

  • हार्डिंग पार्क में योजना के नाम पर संवेदक को 07 करोड़ रुपयों के भुगतान पर उठ रहे सवाल 
  • यहां भी रेलवे बोर्ड का प्रावधान दरकिनार, जेम पोर्टल से स्टोर विभाग ने नहीं की केबुल की खरीद 
  • एलएचबी कोचों के रख-रखाव के टेंडर में भी एजेंसी के टर्मिनेशन में नियमों की हुई थी अनदेखी  

PATNA. भारतीय रेल का एक महत्वपूर्ण एवं अभूतपूर्व ज़ोन पूर्व मध्य रेलवे (ECR), हाजीपुर जिसकी चर्चा उपलब्धियों की जगह कारनामों को लेकर होती रही है. पूर्व मध्य रेलवे का विधुत विभाग अंधकार दूर करने के बजाय भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में कोई कोर कसर छोड़ने को तैयार नहीं है. कहां तो यहां तक जाने लगा है कि इस जाेन का इसका गठन ही लूटने के लिए हुआ है!

पटना का हार्डिंग पार्क जहां पहले बस स्टैंड हुआ करता था. बस स्टैंड शिफ्ट हो जाने के कारण वह स्थल वीरान हो गया. दानापुर मंडल में रेलवे की जमीन बिहार सरकार को दी गई और बदले में बिहार सरकार ने हार्डिंग पार्क की जमीन रेलवे को दे दी. रेलवे ने भी मेमू ट्रेन चलाने हेतु हार्डिंग पार्क का चयन किया और नवनिर्माण का जिम्मा निर्माण विभाग को सौंप दिया. यहां पांच प्लेटफार्म का निर्माण होना है.

निर्माण संगठन के एक सहायक अभियंता ने अनौपचारिक बातचीत में बताया कि न ही अभी डिजाइन बना है और न ही ड्राइंग लेकिन पूर्व मध्य रेलवे के विधुत विभाग ने संवेदक को बिना किसी काम के ही 07 करोड़ 25 लाख 60 हजार 146 रुपये का भुगतान कर अपनी पहचान को बरकरार रखने का हर संभव प्रयास किया है.

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बिना काम के भुगतान आश्चर्यजनक ही नहीं विस्मयकारी है क्योंकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. रेल हंट को जो जानकारी मिली है वो पूर्व मध्य रेलवे की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.

पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल के गति शक्ति परियोजना द्वारा Agreement No ECR/DNR/ELect/2024/0041 dated 25.09.2024 के माध्यम से Electrical (G) raleted works for provision of 05 nos terminal platform in Harding Park area at Patna JN के लिए Munger की एजेंसी Bhagat Engineering works से अनुबंध किया गया.

आज भी कोई भी रात के अंधेरे में भी देख सकता है कि हार्डिंग पार्क में किसी तरह का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है लेकिन विभाग ने एजेंसी को Bill No ECR/DNR/ELect/2024/0041/B1 के माध्यम से 02 करोड़ 37 लाख 85 हजार 436 रुपये का भुगतान कर दिया है. और तो और काम की शुरुआत तो नहीं हुई लेकिन वेरियेशन होने की बात सामने आयी है. जो तथ्य सामने आये है उसके अनुसार पुनः संवेदक Bhagat Engineering works, Munger को Bill No ECR/DNR/ELect/2024/0041/B2 के माध्यम से 4 करोड़ 87 लाख 74 हजार 710 रुपए का भुगतान कर दिया गया है.

एक आश्चर्यजनक बात यह भी सामने आया है कि दूसरे विपत्र के माध्यम से जो 04 करोड़ 87 लाख 74 हजार 710 रुपये का भुगतान 18,500 मीटर केबुल के लिए किया गया है, जबकि रेलवे बोर्ड का स्पष्ट प्रावधान है कि यदि एक हजार मीटर से ज्यादा केबुल की खरीदारी होगी तो जेम पोर्टल से स्टोर विभाग खरीदारी करेगा तब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है यह सब किसके संरक्षण में और किसके इशारे पर हुआ ? भुगतान का यह पूरा मामला ही जांच के दायरे में आ गया है.

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वैसे पुष्ट जानकारी यह भी मिली है कि यह कोई पहला मामला नहीं है जहां बिना काम के भुगतान किया गया है. डिवीजन से लेकर जोन में यह चर्चा आम है कि खास एजेंसी को बिना काम के भुगतान किया जाता रहा है. इसकी फेहरिस्त लंबी है और कुंडली खंगाली जाये तो कई ऐसे प्रोजेक्ट सामने आयेंगे जहां बिना काम के भुगतान किया गया है! कहां तो यहां तक जाता है कि पूर्व मध्य रेलवे में कुछ खास ठेका एजेंसियों का जाल रेलवे बोर्ड से जोन तक ऐसा फैला हुआ है कि मनमुताबिक काम नहीं करने वाले अधिकारियों की कुर्सी बदलते समय नहीं लगती.

ऐसे में पूर्व मध्य रेलवे में बिना काम के भुगतान गंभीर सवाल खड़े करता है, जब प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार मुक्त भारत की बात करते हैं और प्रधानमंत्री के महत्वाकांक्षी योजना गति शक्ति परियोजना में ही बड़ा गोलमाल हो रहा हो तब दूसरी योजनाओं का हाल सहज ही लगाया जा सकता है.

शायद यही कारण है कि पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर का सतर्कता विभाग नाचने गाने में मस्त और व्यस्त हैं! क्या देश के टेक्नोक्रेट एवं ब्यूरोक्रेट रेलमंत्री जो 52 सप्ताह 52 सुधार की बात करते हैं, यहां गहरे तक पैठ बना चुके भ्रष्टाचार पर भी कुछ बोलेंगे ?

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रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा. 

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