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जनशताब्दी को घाटे का सौदा बताकर किया बंद, हावड़ा-मुंबई मेल और हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस अब सप्ताह में तीन दिन

  • टिकट बिक्री नहीं होने वाले स्टेशनों से खत्म होगा ट्रेनों का ठहराव, बंद की जायेंगी ट्रेनें

कोलकाता. लॉकडाउन में यात्रियों की परेशानी दूर करने के लिए 100 से अधिक स्पेशल ट्रेन चलाने का दावा करने वाले रेल मंत्रालय की नयी सोच अब सामने आयी है. रेलवे ने कम पैसेंजर मिलने और लगातार घाटे में चलने का तर्क देकर हावड़ा-बड़बिल जनशताब्दी स्पेशल ट्रेन का परिचालन बंद 12 सितंबर से बंद करने की घोषणा कर दी है. वहीं यात्रियों की डिमांड बताकर मुंबई-हावड़ा के बीच चलने वाली मेल और हावड़ा-अहमदाबाद के बीच चलने वाली सुपरफास्ट स्पेशल को सप्ताह में तीन दिन चलाने की घोषणा की गयी है. अब तक दोनों ट्रेनें सप्ताहिक चलायी जा रही थी.

11 सितंबर को रेलवे जोन से आये आदेश के अनुसार अब 02834 हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस 15 सितंबर से सप्ताह में तीन दिन मंगलवार, शुक्रवार और रविवार को हावड़ा से चलेगी. वहीं 02833 अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस सप्ताह में तीन दिन 18 सितंबर से सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को अहमदाबाद से रवाना होगी. ट्रेनों की रवानगी का समय पूर्ववत रहेगा. वहीं 02810 हावड़ा-सीएसएमटी मेल 21 सितंबर से सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार और शनिवार को हावड़ा से रवाना होगी. जबकि 02809 सीएसएमटी से 23 सितंबर से हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को चलेगी. रेलने ने दोनों ट्रेनों को यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए तीन दिन चलाने की घोषणा की है.

रेलवे के इन दो कदमों से साफ है कि जिन ट्रेनों से रेलवे को अभी आपेक्षित राजस्व मिल रहा है उसे स्पेशल बनाकर और चलाकर मुनाफा कमाया जायेगा जबकि घाटे का सौंदा बनने वाली ट्रेनों को बंद कर दिया जायेगा. रेलवे की यही सोच जीरो टाइम टेबुल बनाने में प्रदर्शित होने की बात कही जा रही है. उन स्टेशन से ट्रेनों को ठहराव खत्म करने का प्रस्ताव है जहां एक निर्धारित संख्या से कम यात्री सवार होते है.

ऐसे ही एक प्रस्ताव में उन ट्रेनों को भी बंद करने का प्रस्ताव शामिल है जो यात्रियों की संख्या के हिसाब से अलाभकारी साबित हो रही है. ऐसी अधिकांश ट्रेनों का परिचालन और ठहराव राजनीति लाभ के लिए सांसद व मंत्रियों की अनुशंसा पर पहले किया गया था. अब रेलवे इन ट्रेनों के लाभ-हानि का आकलन कर ठहराव को खत्म करने के अलावा ट्रेनों का परिचालन रोकने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. जो लॉकडाउन खत्म होने के साथ ही सामने आयेगा.

यह बताना लाजिमी होगा कि अभी स्पेशल के रूप में चलायी जाने वाली सभी ट्रेनों के रियायत की सुविधा नहीं देने के साथ टिकट बिक्री के लिए एक निर्धारित दूरी का मानक अपनाकर रेलवे भरपूर कमाई कर रही है. ऐसे में दो स्टेशन तक जाने के इच्छुक यात्री मजबूरी में अधिक दूरी और उच्च का टिकट आरक्षित करा चल रहे है. इससे उसकी जेब से अधिक राशि निकल रही है.

यह भी पढ़ें : 11 सितंबर से बंद हो जायेगी हावड़ा-बड़बिल जनशताब्दी स्पेशल

वही, कोल्हान की जान मानी जाने वाली हावड़ा-बड़बिल जनशताब्दी हमेशा से ही राजस्व के लिहाज से रेलवे के लिए फायदे का सौदा मानी जाती थी. हालांकि लॉकडाउन में बस-टेंपो व यातायात के अन्य साधन नहीं मिलने और बड़े शहरों में बाजार आदि के बंद रहने का असर जनशताब्दी पर भी पड़ा है. इसके अलावा व्यावसायिक गतिविधियां ठप होने और बार-बार बंगाल में लॉकडाउन के कारण इस ट्रेन की मांग कम हुई है. लॉकडाउन चार के बाद धीरे-धीरे गतिविधियां जोर पकड़ रही है ऐसे में अचानक जनशताब्दी के बंद होने का असर बड़ी संख्या में लोगों पर पड़ेगा.

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