Close Menu
    • होम
    • रेलहंट स्पेशल
    • रेल न्यूज
    • बोर्ड/जोन
      • सर्कुलर / आर्डर
      • रेलवे की निविदा
    • रेल यूनियन
    • रेल यात्री
    • आरपीएफ-जीआरपी
    • गपशप
      • साक्षात्कार
    • अभिमत
    • मीडिया
      • सोशल मीडिया
      • समाज-संस्कृति
    • संपर्क
    Facebook X (Twitter) Instagram Threads YouTube Telegram
    Thursday, October 22
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube Telegram
    Rail HuntRail Hunt
    Subscribe
    • होम
    • रेलहंट स्पेशल
    • रेल न्यूज
    • बोर्ड/जोन
      • सर्कुलर / आर्डर
      • रेलवे की निविदा
    • रेल यूनियन
    • रेल यात्री
    • आरपीएफ-जीआरपी
    • गपशप
      • साक्षात्कार
    • अभिमत
    • मीडिया
      • सोशल मीडिया
      • समाज-संस्कृति
    • संपर्क
    Rail HuntRail Hunt
    • होम
    • रेलहंट स्पेशल
    • रेल न्यूज
    • बोर्ड/जोन
    • रेल यूनियन
    • रेल यात्री
    • आरपीएफ-जीआरपी
    • अभिमत
    • गपशप
    • मीडिया
    • समाज-संस्कृति
    Home » देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में भारतीय रेल की भूमिका
    अभिमत

    देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में भारतीय रेल की भूमिका

    Railhunt News DeskBy Railhunt News DeskDecember 12, 2017
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter WhatsApp Telegram Copy Link

    राकेश शर्मा निशीथ. देश के निरंतर विकास में सुचारु व समन्वित परिवहन प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. वर्तमान प्रणाली में यातायात के अनेक साधन, जैसे – रेल, सड़क, तटवर्ती नौ संचालन, वायु परिवहन इत्यादि शामिल हैं . देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में भारतीय रेल की महत्वपूर्ण भूमिका है . रेल भारत में यातायात का मुख्य साधन होने के साथ ही देश के जीवन का जरूरी हिस्सा बन चुकी है . रेलगाड़ियों के आवागमन ने जहां हमारे देश की कला, इतिहास और साहित्य पर अद्भुत प्रभाव डाला है वहीं हमारे देश के विभिन्न प्रांत के लोगों के बीच विविधता में एकता की अहम कड़ी भी है. भारतीय रेल विभिन्न स्थानों को जोड़ती है और लोगों को देश के एक छोर से दूसरे छोर तक बड़े पैमाने पर तेज गति से और कम लागत पर आने-जाने में मदद करती है . इस प्रक्रिया में भारतीय रेल राष्ट्रीय अखंडता का प्रतीक है .

    भारतीय रेल जहां अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वाह करने के लिए सामाजिक जरूरतों को ध्यान में रखकर यात्री तथा मालगाड़ी काफी कम किराया लेती है, वहीं आपदा या विपत्तियों के समय में देश की नि:स्वार्थ भाव से सेवा भी करती है . विश्व की एकमात्र भारतीय रेलवे है जो कई रेल खंडों पर घाटा सहकर भी वहां यात्री और मालगाड़ी सेवा परिचालित करती है.

    देश में पहली बार 22 दिसम्बर, 1851 को रेलगाड़ी पटरी पर उतरी थी . पहली यात्री रेल ने 16 अप्रैल, 1853 को मुम्बई से ठाणे के बीच 34 किलोमीटर की दूरी तय की थी . वर्ष 1851 से अभी तक रेलवे का योजनाबध्द विकास हुआ है . भारतीय रेल द्वारा परिसंपत्ति की उत्पादकता बढाने एवं प्रौद्योगिकी का आधुनिकीकरण करने के लिए अनेक प्रयत्न किए जा रहे हैं . वर्तमान में भारतीय रेल विश्व की सबसे बड़ी रेल प्रणाली है . इसके पास 64,000 किलोमीटर लंबा रेल मार्ग है, जिंसमें बड़ी लाईन (52,808 किलोमीटर), मीटर गेज लाइन (8,473 किलोमीटर) और छोटी लाइन (2,734 किलोमीटर) शामिल हैं . भारतीय रेल की 13,000 से अधिक रेलगाड़ियां रोजाना चार बार धरती से चांद तक जितनी दूरी तय करती हैं . रेलों के जरिए प्रतिदिन डेढ क़रोड़ से ज्यादा यात्री अपनी मंजिल पर पहुंचते हैं .

    बजट प्रावधान

    संविधान के अनुच्छेद 112 के अंतर्गत भारत सरकार की अनुमानित आमदनी और खर्च का विवरण संसद में पेश किया जाता है . रेलवे का वित्त केन्द्र सरकार के आम बजट से अलग है . इसलिए रेलवे बजट अलग से पेश होता है . इसमें कुल राजस्व, आमदनी, राजस्व और निर्माण व्यय, खर्च की तुलना में प्राप्तियों के अधिशेष का विवरण और केन्द्र के पास रेलवे की निधियों का विवरण आदि शामिल होता है . बजट के एक भाग में गत, चालू और आगामी वर्ष के वित्तीय परिणामों का सारांश होता है . दूसरे भाग में निर्माण मांगों का सारांश होता है . अनुच्छेद 114(3) के अंतर्गत जब तक संसद विनियोग विधेयक पारित नहीं कर देती तब तक समेकित निधि से कोई भी निकासी नहीं हो सकती . स्वतंत्र भारत का प्रथम रेल बजट 20 नवम्बर, 1947 को यातायात मंत्री डॉ. जान मथाई द्वारा पेश किया गया था, जो एक जनवरी, 1948 को लागू हुआ था. 2017 के बाद रेल बजट को वित्त बजट के साथ समाहित कर दिया गया.

    कुछ रोचक तथ्य

    • भारतीय रेल प्रणाली विश्व में एक अनूठी और व्यापक प्रणाली है .
    • इससे संबंधित कुछ रोचक तथ्य इस प्रकार हैं —
    • देश में पहली बार 22 दिसम्बर, 1851 को रेल पटरी पर दौड़ी .
    • पहली यात्री रेल 16 अप्रैल, 1853 को मुम्बई से ठाणे के बीच चली .
    • वर्ष 1890 में भारतीय रेलवे अधिनियम पारित किया गया .
    • वर्ष 1936 में यात्री डिब्बों को वातानुकूलित बनाया गया .
    • भारतीय रेलवे का शुभंकर हरी बत्ती वाली लालटेन उठाए एक हाथी (भालू गार्ड) है .
    • भारतीय रेलवे का राष्ट्रीयकरण वर्ष 1950 में हुआ था .
    • वर्ष 1952 में छह जोनों के साथ जोनल सिस्टम शुरू होकर वर्तमान में 17 जोन हैं .
    • रेलवे में 16 लाख से अधिक नियमित कर्मचारी और 2 लाख से अधिक आकस्मिक कर्मचारी कार्यरत हैं .
    • भारतीय रेल दुनिया में सबसे लंबे और व्यस्त नेटवर्क में से एक मानी जाती है .
    • वर्ष में छह अरब से भी अधिक मुसाफिर रेल से यात्रा करते हैं .
    • कन्याकुमारी और जम्मू-तवी के बीच चलने वाली हिमसागर एक्सप्रेस सबसे लंबी दूरी की रेल है . इसका रूट 3745 किलोमीटर है .
    • 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रपऊतार से चलने वाली भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस देश की सबसे तेज रेल है .
    • 1072 मीटर लंबा खड़गपुर रेलवे स्टेशन दुनिया का सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म है .
    • फेयरी क्वीन दुनिया में सबसे पुराना इंजन है, जो अभी भी दौड़ता है .
    • लाइफलाइन एक्सप्रेस एक विशेष रेल है . इसे हॉस्पिटल ऑन व्हील नाम से भी जाना जाता है . इस रेल में ऑपरेशन रूम से लेकर इलाज की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं .
    • 1974 में हुई भारतीय रेलवे की हड़ताल अब तक की सबसे बड़ी हड़ताल मानी जाती है . यह हड़ताल 20 दिन चली थी . 1974 के पश्चात रेलवे में कोई हड़ताल नहीं हुई .
    • वर्ष 1977 में धरोहर, पर्यटन, शिक्षा, मनोरंजन के संरक्षण एवं प्रोत्साहन के लिए राष्ट्रीय रेल संग्रहालय खोला गया .
    • सोसाइटी ऑफ इंटरनेशनल ट्रेवलर्स ने भारत की भव्य गाडियां डेक्कन ओडिसी, पैलेस ऑन व्हील्स और 100 साल पुरानी टॉय ट्रेन को विश्व की 25 सर्वश्रेष्ठ ट्रेनों की सूची में शामिल किया है .
    • वर्ष 2002 में जन शताब्दी ट्रेन की शुरूआत हुई .
    • वर्ष 2004 में इंटरनेट के माध्यम से आरक्षण प्रारंभ हुआ .
    • वर्ष 2007 में देशभर में टेलीफोन नम्बर 139 द्वारा व्यापक सामान्य ट्रेन पूछताछ सेवा प्रारंभ की गई .

    प्रतिस्पर्धी और किफायती

    रेल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में काफी किफायती है . सड़क परिवहन की तुलना में इसमें 6 गुना कम ऊर्जा खर्च होती है और चार गुना अधिक किफायती है . पर्यावरण के प्रदूषण में भी रेलवे का योगदान कम होता है . रेलों के निर्माण की लागत भी अन्य यातायात से लगभग 6 गुना कम बैठती है . फिर भी आम आदमी को सबसे सुलभ, सुगम और कम किराये में अपने गंतव्य तक पहुंचने का सामान्य साधन भारतीय रेल ही बनी हुई है .

    भारतीय रेल को अब दूसरे क्षेत्रों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है . इसे एक तरफ राष्ट्रीय महामार्गों और दूसरी तरफ एयरलाइनों से कड़ी प्रतिस्पध्र्दा करनी पड़ रही है . दुनिया में विनिर्माण प्रक्रिया के वैश्वीकरण की वजह से रेल यातायात की परिभाषा ही बदल गई है . कंटेनर प्रणाली ने रेल और सड़क परिवहन के अंतर को समाप्त कर उपभोक्ता के घर तक सेवा उपलब्ध कराने जैसे समाधान उपलब्ध कराए हैं .
    वर्ष 2010-11 के दौरान 99.3 करोड़ टन माल की ढुलाई और यात्रियों की संख्या में 6.4 प्रतिशत की वृध्दि के आधार पर सकल यातायात प्राप्तियों का अनुमान 1,06,239 करोड़ रुपये लगाया गया है . रेलवे की आमदनी पहली बार एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हुई है . भारतीय रेल ने अप्रैल, 2010 से फरवरी, 2011 के दौरान 832.75 मिलियन टन राजस्व अर्जन करने वाले माल की ढुलाई की . पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान 803.50 मिलियन टन वास्तविक ढुलाई की तुलना में 29.26 मिलियन टन अधिक माल ढुलाई हुई, जिससे 3.64 प्रतिशत की वृध्दि दर्ज की गई . भारतीय रेल को अप्रैल 2010 से फरवरी 2011 के दौरान 84382.99 करोड़ रुपये की आय हुई, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान 77958.06 करोड़ रुपये की आय हुई थी . इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में 8.24 प्रतिशत की बढाेतरी हुई . 01 अप्रैल, 2009 से 28 फरवरी, 2010 के दौरान माल भाड़े में 52595.86 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी, जबकि इस वर्ष इसी अवधि में 56382.02 करोड़ रुपये की आमदनी हुई . इसी प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में आय में 7.20 प्रतिशत की बढाेतरी हुई . अप्रैल 2010 से फरवरी 2011 के दौरान कुल यात्रियों की संख्या पिछले साल की इसी अवधि के दौरान 6777.13 मिलियन की तुलना में 7206.30 मिलियन रही, जिसमें 8.33 प्रतिशत की वृध्दि दर्ज हुई . उपनगरी और गैर-उपनगरीय क्षेत्रों से अप्रैल 2010 से फरवरी 2011 के दौरान कुल यात्रियों की संख्या 3719.11 मिलियन और 3487.19 मिलियन रही, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में क्रमश: 3518.00 मिलियन और 3259.13 मिलियन थी . इसमें क्रमश: 5.72 प्रतिशत और 7.00 प्रतिशत की वृध्दि दर्ज की गई .

    139 डॉयल योजना

    भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए नई आधुनिक और सुधरी हुई सुविधा शुरू की है . भारतीय रेलवे ने एकीकृत ट्रेन पूछताछ प्रणाली (आईटीईएस) रेल संपर्क कॉल सेंटर सेवा शुरू की है . इसका नम्बर 139 है . इस नंबर पर पूरे देश से रेलों के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है . इस प्रणाली के अंतर्गत एमटीएनएल और बीएसएनएल के ग्राहक को बिना एसटीडी के 139 डॉयल करने पर यह सुविधा मिलती है . इसके तहत गाड़ियों के आगमन, प्रस्थान, विलंब, किराया, सीटों की उपलब्धता आदि जानकारियां प्राप्त की जा सकती है .

    पांच अंकीय प्रणाली

    भारतीय रेलवे प्रतिदिन 10,000 से अधिक रेलगाड़ियों का संचालन करती है, इस वजह से 4 अंकों की संख्या प्राणाली को समाप्त कर पांच अंकों की संख्या प्रणाली को 20 दिसम्बर, 2010 से लागू किया गया . नई प्रणाली में परिवर्तन को सुचारू बनाने के लिए रेलगाड़ियों में चार अंकों वाली संख्यों से पहले केवल 1 संख्या जोड़ देने मात्र से ही समस्या का समाधान हो जाता है. अवकाशत्योहारों की भीड़ आदि से निबटने के लिए रेलवे जो विशेष रेलगाड़ियां चलाती है, उनकी भी संख्या मेल एक्सप्रेस की प्रणाली पर ही लगाई जाती है . केवल उनसे पहले संख्या 0 लगा दी जाती है .

    विजन 2020

    भारतीय रेल ने आम लोगों के बीच रेलवे की वास्तविक स्थिति को सामने रखने के लिए श्वेतपत्र के साथ विजन 2020 दस्तावेज भी संसद के समक्ष प्रस्तुत किया . विजन 2020 दस्तावेज को रेलवे के भविष्य का बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज माना गया है . इस दस्तावेज में विस्तार की बहुत महत्वाकांक्षी योजना रखी गयी है . आगामी 10 वर्षों में भारतीय रेल नेटवर्क में 20,000 पुलों का पुनर्स्थापन, 17,000 बिना चौकीदार वाले समपारों पर चौकीदार तैनात करना, 25,000 किलोमीटर नई लाइनों का निर्माण करना तथा 12,000 किलोमीटर का दोहरीकरण करना शामिल हैं .

    इस अवधि के दौरान भारतीय रेलों के सामने 2,165 मिलियन टन प्रारंभिक माल यातायात तथा 15,180 मिलियन पैसंजर को ढोने की चुनौती होगी. यह दस्तावेज भारतीय रेल को निम्नलिखित चार महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्यों के प्रति प्रतिबध्द कराने का प्रयास है –
    समोवेशी विकास, भौगोलिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से .

    1. उत्पादनशीलता रोजगार का बड़े पैमाने पर सृजन .
    2. पर्यावरण संबंधी अनुकूलता .
    3. राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना .

     

    अपराध रोकथाम व्यवस्था

    रेलवे में अपराध का इतिहास काफी पुराना है . ब्रिटिश शासन के समय 1861 में पुलिस अधिनियम बना था . परन्तु अपराधों की रोकथाम की सही शुरूआत वाच एंड वार्ड बल मुहैया कराने से वर्ष 1881 में शुरू हो पाई . वर्ष 1954 में इसे रेलवे सुरक्षा बल नाम से पुनर्गठन का प्रस्ताव किया गया . वर्ष 1957 में एक अधिनियम पास किया गया . इसमें समय-समय पर संशोधन होते गए और वर्ष 2003 में इस बल को यात्रियों और सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई . कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य के अधिकार क्षेत्र में होने के कारण राजकीय रेल पुलिस का गठन भी राज्य सीमा के आधार पर किया गया . यह अपने राज्य की सीमा पार नहीं कर सकती . रेलवे ने चोरी, लूटपाट और आतंकी हमलों को रोकने के लिए स्टेशनों पर कैमरे और क्लोज सकिर्ट टेलीविजन लगाए हैं .

    टक्कररोधी उपकरण

    टक्कररोधी उपकरण ट्रेनों पर लगाया जाने वाला उपकरण है और यह एक सुरक्षा उपकरण के रूप में कार्य करता है . दुनिया में ट्रेनों की सुरक्षा के लिए बनाया गया यह पहला उपकरण है. इसे कोंकण रेलवे ने विकसित किया है . यह उपकरण 2013 तक भारतीय रेल के पूरे नेटवर्क पर लगा दिया जाएगा . इससे ट्रेनों में परस्पर टक्कर होने की संभावना काफी कम हो जाएंगी . नार्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे पर यह सफलतापर्वूक काम कर रहा है . यह उपकरण सिग्नलिंग प्रणाली और इंटरलॉकिंग प्रणाली से जोड़ा गया है और टक्कर होने की संभावना की स्थिति में तुरंत काम करने लगता है . भारतीय रेल के यातायात में उल्लेखनीय वृध्दि होने के बावजूद ट्रेन दुर्घटनाओं में काफी कमी आई है .

    दुर्घटना मुआवजा दावा

    मृतकों और घायल यात्रियों के संबंध में मुआवजा के लिए रेलवे दावा न्यायाधिकरण में मांगपत्र दाखिल करना होता है . यह आवेदनपत्र दुर्घटना स्थल पर राहत कार्यों के दौरान रेलवे प्रशासन की ओर से बांटे जाते हैं . स्थानीय समाचारपत्रों में इसका प्रारूप प्रकाशित होने के अतिरिक्त ये रेलवे की वेबसाइट www.indianrailway.com से भी प्राप्त किए जा सकते हैं. आवेदन की तीन प्रतिलिपियां दाखिल करानी होती हैं . इसे यात्री स्वयं या उसकी ओर से आश्रित या मृतक यात्री के आश्रित संबंधित रेल दावा न्यायाधिकरण में एक वर्ष के भीतर दावा कर सकते हैं. इसके बाद के दावों पर भी रेल दावा न्यायाधिकरण अकसर विचार कर लेता है . छ: वर्ष से कम उम्र के बच्चों, जिनका टिकट भाड़ा नहीं लिया जाता, उन्हें भी मुआवजा दिया जाता है . मुआवजे के लिए वह यात्री जो प्रामाणिक टिकटों पर रेल में सफर करते हैं उनके अलावा इस योजना के अंतर्गत प्लेटफार्म टिकट धारक भी बीमा के योग्य होते हैं.

    महिलाओं के प्रति समर्पित

    भारतीय रेल न केवल रेल नेटवर्क में दुनिया की दूसरी बड़ी रेलवे है बल्कि महिलाओं को रोजगार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है . भारतीय रेलवे में महिलाओं ने महत्वपूर्ण पद प्राप्त किए हैं . इनमें से कुछ इस प्रकार हैं – भारतीय रेल की सर्वप्रथम महिला रेल ड्राइवर श्रीमती सुरेखा यादव हैं . येर् व¬ा 1990 में ट्रेनीज सहायक इलेक्ट्रिक ड्राइवर पद पर मध्य रेलवे में नियुक्त हुईं थीं . ये प्रथम ईएमयू (मुम्बई उपनगरीय रेल सेवा) की ड्राइवर भी बन गयी हैं . श्रीमती सुरेखा यादव भारत एवं एशिया की प्रथम महिला ड्राइवर हैं .
    भारतीय रेल में सर्वप्रथम महिला डीजल रेल इंजन ड्राइवर सुश्री मुमताज काथावाला (अब श्रीमती मुमताज काजी) है . महिला रेलकर्मी सुश्री सूचिटा चटर्जी भारतीय रेल में सिविल सर्विस परीक्षा-2000 बैच की रेल सुरक्षा बल में नियुक्ति पाने वाली प्रथम महिला अधिकारी हैं . भारतीय रेलवे में सर्वप्रथम सहायक स्टेशन मास्टर के रूप में नियुक्ति सुश्री रिंकू सिन्हा राय की अगस्त, 1994 में पूर्व रेलवे कोलकाता में हुई थी . भारतीय रेल में सर्वप्रथम महिला उच्च अधिकारी, सर्वप्रथम महिला मंडल रेल प्रबंधक, सर्वप्रथम महिला अपर महाप्रबंधक, सर्वप्रथम महिला सदस्य रेलवे बोर्ड, सर्वप्रथम महिला वित्त आयुक्त (रेलवे) बनने का श्रेय श्रीमती विजयालक्ष्मी विश्वनाथन को प्राप्त है . इनके अतिरिक्त अन्य अनेक ऐसी महिलाएं हैं जो भारतीय रेल में विभिन्न चुनौतीपूर्ण उच्च पदों पर नियुक्त हो चुकी हैं .

    राष्ट्रमंडल खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन

    राष्ट्रमंडल खेल-2010 में भारतीय रेल के खिलाड़ियों का प्रदर्शन काफी सराहनीय रहा है . रेलवे के खिलाड़ियों ने साबित कर दिया है कि वे आगामी ओलंपिक में दुनिया को अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन दिखाएंगे . राष्ट्रमंडल खेल 2010 में भारत ने कुल 38 स्वर्ण, 27 रजत तथा 36 कांस्य पदक जीतकर पदक तालिका में आस्ट्रेलिया के बाद दूसरा स्थान अर्जित किया . इसमें रेलवे के खिलाड़ियों द्वारा जीते गए 13 स्वर्ण, 3 रजत तथा 7 कांस्य पदक सहित कुल 33 पदक शामिल हैं . इस खेलों में भारतीय रेल के करीब 90 खिलाड़ियों ने भागीदारी की थी . रेलवे के खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर जहां नवोदित खिलाड़ियों का हौसला बढाया है, वहीं देश का गौरव भी बढाया है .

    चुनौतियां एवं सुझाव

    भारतीय रेल देश के सामाजिक-आर्थिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुकी है . इसका प्रभाव न केवल देश की सामाजिक गतिविधियों पर पड़ा, बल्कि इससे हमारी कला, इतिहास और हमारा साहित्य भी काफी हद तक प्रभावित हुआ है . इसके अलावा इससे भारत की जनता एकता के सूत्र में भी बंधी . भारतीय रेल नेटवर्क देश की जीवन रेखा बन चुकी है . हमारी रेलवे प्रणाली को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा . इसके लिए कुछ सुझाव इस प्रकार है –

    1. विश्व स्तरीय स्टेशनों का निर्माण, चल स्टॉक उत्पादन इकाइयों की स्थापना, बहु-उपयोगी आदर्श संभार तंत्र पार्कों का निर्माण तथा रेल लाइनों के नजदीक माल गोदाम तथा थोक गुड्स कंटेनरों के यातायात इत्यादि के लिए नई लाइनों का निर्माण, आमान परिवर्तन, लाइन का दोहरीकरण तथा विद्युतीकरण को माल ढुलाई समक्षमता के साथ जोड़ना होगा .
    2. गाड़ियों में स्थान की कमी यात्रियों में लगातार असंतोष का कारण है . इसके लिए यात्रियों की ढुलाई की क्षमता को बढाना होगा तथा आने वाले वर्षों में गाड़ियों की लंबाई बढानी होगी. इसके साथ-साथ गाड़ी के समय पालन तथा गुणवत्ता में सुधार तथा डिब्बे के भीतर ही आनंददायक अनुभव की अनुभूतिपूर्ण सेवा की महत्ता की भी आवश्यकता है . टिकट और आरक्षण, माउस के एक क्लिक, एटीएम या हमारी टिकट खिड़की से यात्रियों की सुविधा आसानी से उपलब्ध करानी होगी .
    3. गाड़ियों में गुणवत्तापूर्ण भोजन की सप्लाई, स्टेशनों, सवारी डिब्बों, शौचालयों की सफाई, गाड़ियों में चूहों तथा काकरोचों का नाश, अंतरराष्ट्रीय साइनेजेज़ की व्यवस्था, नियमित और समय पर जन-उद्धोषण सुनिश्चित करना तथा सटीक पूछताछ सेवा कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जहां हमें सभी स्तरों पर ध्यान देना होगा . भारतीय रेल का वास्तविक और वित्तीय लक्ष्य प्राप्त कर लेना ही उद्देश्य नहीं है बल्कि रेलवे द्वारा मुहैया कराई गई सेवा की असली परीक्षा इस बात में है कि नागरिक और ग्राहक उसे किस रूप में देखते हैं . ग्राहकों की जरूरतों पर रेलवे का सकारात्मक रुख होना चाहिए.

    ***
    * लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं . इनसे पसूका का सहमत होना आवश्यक नहीं है .

    Share. Facebook Twitter Email Telegram WhatsApp Threads Copy Link
    Previous Articleनई तकनीक का इस्तेमाल कर राेके जायेंगे रेल हादसे
    Next Article धन्य है भारतीय रेल और इसकी दुर्दांत व्यवस्था !!
    Railhunt News Desk
    • Website
    • Facebook
    • X (Twitter)
    • Instagram

    देश के अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल्स और पत्रकारों का एक ऐसा मंच है, जिसका उद्देश्य रेलवे और परिवहन जगत की खबरों को पूरी विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत करना है।

    Related Posts

    अभिमत

    ‘हिंदू’ से सीखें विरासत और धरोहरों को संजोना और सहेजना, भारत से जुड़ी एक अनोखी दास्तां, जाने क्या है मसाला व्यापार में महिला नेतृत्व के सौ वर्षों का रोमांचक सफर

    August 2, 2026
    अभिमत

    राजनीति के ‘मौसम वैज्ञानिक रामविलास’, जिन्होंने बतौर रेलमंत्री बदल दी भारतीय रेलवे की तस्वीर

    July 5, 2026
    अभिमत

    ‘I Was Greatly Relieved’: नागरनौसा फायरिंग, नेहरू का पत्र और इतिहास की अनसुलझी बहस

    June 24, 2026
    Latest Posts

    रेलवे की सुरक्षा पर झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, रेलवे क्रॉसिंग का बैरियर तोड़ना अब गैर-जमानती अपराध

    October 22, 2026

    शव के साथ घंटों इंतजार! 8 घंटे लेट हावड़ा-नई दिल्ली स्पेशल, गूंजे ‘इंडियन रेलवे हाय-हाय’ के नारे

    October 21, 2026

    TATANAGAR से पुरी के बीच बादामपहाड़ होकर चलेगी नई एक्सप्रेस ट्रेन, रेलवे बोर्ड ने दी मंजूरी

    October 21, 2026

    ECR: धनबाद में जीएम डिंपी गर्ग ने कहा – तीसरी और चौथी लाइन बिछने के बाद ही दिल्ली-बेंगलुरु की सीधी ट्रेनें

    October 20, 2026

    ट्रेन यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट: अब काउंटर टिकट पर भी मिलेगा बीमा कवर, 27 अक्टूबर से नया नियम लागू

    October 19, 2026

    रेलवे ट्रैक पर हाथियों का ‘डेरा’, हावड़ा-मुंबई मुख्य मार्ग किया जाम, चार ट्रेनें घंटों खड़ी रही

    October 18, 2026

    दक्षिण पूर्व रेलवे का नया गणित: 7 घंटे का ब्लॉक = 28 घंटे की कछुआ चाल, बंडामुंडा में इंजीनियरों ने रचा इतिहास!

    October 18, 2026

    पुणे जंक्शन पर RPF की साजिश बेनकाब!, यात्री को झूठे केस में फंसाया, कोर्ट ने किया खारिज

    October 17, 2026

    BILASPUR: RPF DG के जाते ही SECR जोन में ध्वस्त हुई व्यवस्था, रणक्षेत्र बना प्लेटफार्म, वेंडरों के दो गुट भिड़े

    October 16, 2026

    चक्रधरपुर रेल मंडल : 22 हजार रेलकर्मियों के खातों में पहुंची बोनस की राशि, यूनियनों की नाकामी पर दिखी नाराजगी

    October 16, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube Telegram
    • About Us
    • Advertisement
    • Write for Us
    • Editorial Policy
    • Privacy
    • Cookies Policy
    • Contact Us
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Join Railhunt Group