- बनाये गये प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त, पीड़ित महिला व उसके पति ने डीजी से की मुलाकात
- हाई प्रोफाइल मामले का रहस्य खोलने के लिए 17 नंबर बर्थ के अनाधिकृत यात्री की तलाश
रेलहंट ब्यूरो, भोपाल
ओवर नाईट एक्सप्रेस में रेलवे अधिकारी की पत्नी से छेड़छाड़ के आरोपी आरपीएफ डीआईजी विजय खातरकर का तबादला नार्दन रेलवे में कर दिया गया है. उन्हें (पीसीएससी) प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त बनाया गया है. इस संबंध में दिल्ली मुख्यालय से पत्र जारी कर दिया गया है. बताया जाता है कि आरपीएफ डीजी अरुण कुमार से मिलने महिला और उसके पति दिल्ली गये है. उनके अनुरोध पर ही जांच प्रभावित होने की आशंका को लेकर तत्काल प्रभाव से डीआईजी विजय खातरकर का तबादला कर दिया गया है.
15 जुलाई 2019 को ओवर नाईट एक्सप्रेस के एसी 2 कोच की 13 नंबर बर्थ पर पमरे डीआईजी विजय खातरकर भोपाल से जबलपुर आ रहे थे. उनके सामने वाली बर्थ 15-16 पर जबलपुर रेल मंडल में पदस्थ सीनियर अधिकारी की पत्नी और बेटी यात्रा कर रही थी. सफर में महिला ने डीआईजी पर छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए रेल थाने में रिपोर्ट दर्ज करायी है. हालांकि पूरे घटनाक्रम के बीच हाईप्रोफाइल मामले का रहस्य बरकरार है.
रेल महकमे में इस बात की चर्चा है कि 17 नंबर बर्थ पर यात्रा कर रहे यात्री से इस पूरे हाईप्रोफाइल घटनाक्रम का राज खुल सकता है. एक वेवसाइट के अनुसार इंदौर से जबलपुर आ रही ओवरनाइट एक्सप्रेस में 17 नंबर बर्थ वीआईपी कोटे से कन्फर्म हुई थी. बर्थ जिसके नाम से आवंटित थी वह उस पर नहीं बल्कि उसके स्थान पर कोई और ही सफर कर रहा था. 17 नंबर बर्थ अजित कुमार के नाम से बुक थी. इसका पीएनआर नंबर 81212649 था. यह टिकट 8 जुलाई को भोपाल स्टेशन से बनायी गयी थी. जबकि 18 नंबर पर एम सिंह यात्रा कर रहे थे. उनके पास ई टिकट था जिसका पीएनआर 8443681607 था. यह सीट भी वीआईपी कोटे से कन्फर्म हुई थी.
17 नंबर सीट के यात्री अजीत ने माना कि उसने यात्रा नहीं की है. बताया जाता है डीआईजी पर आरोप लगाने वाली रेलवे अधिकारी की पत्नी अजित की जगह सफर कर रहे व्यक्ति से लगातार बात कर रही थी. इनकी बातचीत को लेकर डीआईजी ने डिस्टर्ब नहीं करने कहा था. यह जांच का विषय बना हुआ है कि अगर अजित ने 17 नंबर बर्थ पर यात्रा नहीं की तो आन डयूटी टीटीई वीके दुबे ने वह सीट कैंसिल क्यो नहीं की? कारण चाहे जो भी रहे हो लेकिन इस हाईप्रोफाइल मामले को सहज रूप से कोई स्वीकार करने को तैयार नहीं है. रेलकर्मियों के दो वर्ग अलग-अलग आंकलन लगा रहे है. इसमें एक वर्ग डीआईजी को दोषी मानकर कार्रवाई की मांग कर रहा है तो दूसरे वर्ग का मानना है कि डीआईजी ऐसी हरकत नहीं कर सकते. ट्रेन में ऐसा कुछ हुआ है जो अब तक सामने नहीं आया है. देखना है इस मामले में रेल पुलिस की जांच कहां तक पहुंचती है.
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