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JAIPUR : एक अधूरी शाम और टहलने की वो आखिरी आदत, जब पटरी पर थम रेलवे ओएस की सांसें

  • उत्तर पश्चिम रेलवे में ऑफिस सुपरिटेंडेंट के पद पर तैनात 48 वर्षीय अशोक चौधरी, घर के सामने ही दर्दनाक मौन 

JAIPUR. रोज की तरह वो भी एक बेहद सामान्य और सुकून भरी शाम थी. उत्तर पश्चिम रेलवे में ऑफिस सुपरिटेंडेंट के पद पर तैनात 48 वर्षीय अशोक चौधरी ने अपनी पत्नी के साथ बैठकर खाना खाया. घर का माहौल हमेशा की तरह शांत और सुरक्षित था.

खाने के बाद सेहत का ध्यान रखने और खुली हवा में चंद कदम चलने की उनकी पुरानी आदत थी. इसी आदत के तहत वे जगतपुरा रेलवे फाटक के सामने बने अपने सरकारी रेलवे क्वार्टर से बाहर निकले. उन्हें अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि घर की चौखट लांघते हुए वे अपनी जिंदगी के आखिरी सफर पर निकल रहे हैं.

रात के करीब 8:45 बज रहे थे. अशोक जी अपने ख्यालों में खोए पटरी के आसपास टहल रहे थे, तभी जयपुर जंक्शन की तरफ से बेहद तेज रफ्तार में दौलतपुर एक्सप्रेस आ गई. ट्रेन की रफ्तार और शोर के बीच शायद उन्हें संभलने का एक पल भी नसीब नहीं हुआ. कुछ ही सेकंड में रेलवे का एक कर्मठ अधिकारी, एक परिवार का मुखिया और किसी की जिंदगी का सबसे मजबूत सहारा हमेशा के लिए खामोश हो गया.

पटरी पर गिरे अशोक चौधरी की पहचान भतीजा अमन ने की 

इस पूरी घटना में नियति का क्रूर खेल देखिए कि जब यह हादसा हुआ, तब गेट नंबर-15 के पास से अशोक चौधरी का भतीजा अमन गुजर रहा था. पटरी पर भीड़ देखकर वो अमूमन होने वाली कौतूहल की वजह से रुका. लेकिन जैसे ही उसने भीड़ को चीरकर आगे देखा, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई.

लहूलुहान हालत में वहां कोई अनजान शख्स नहीं, बल्कि उसके अपने फूफा जी पड़े थे. अमन के लिए वह मंजर किसी भयावह दुःस्वप्न जैसा था. उसने तुरंत कांपते हाथों से एम्बुलेंस और परिजनों को फोन किया.

मूल रूप से सीकर जिले के दूजोद गांव के रहने वाले अशोक चौधरी अपने काम के प्रति बेहद निष्ठावान थे. वर्तमान में अपनी पत्नी के साथ जयपुर में रह रहे उनके घर में अब केवल चीखें और सन्नाटा बचा है. शुक्रवार को जब एसएमएस अस्पताल की मॉर्च्युरी से पोस्टमॉर्टम के बाद उनका पार्थिव शरीर परिजनों को सौंपा गया, तो रोते-बिलखते परिवार को संभालना मुश्किल हो गया था.

जो इंसान कुछ घंटे पहले तक उनके साथ हंस-बोल रहा था, अब वो सिर्फ एक याद बनकर रह गया था. रेलवे पुलिस (GRP) फिलहाल मामले की जांच कर रही है, लेकिन इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को कभी न भरने वाला गहरा जख्म दे दिया है.

विनम्र श्रद्धांजलि !

Railhunt News Desk
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