- सेवानिवृत्त स्टेशन मास्टर वीरेंद्र कुमार पालीवाल की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने लिया संज्ञान
New Delhi. एक सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने रेलवे बोर्ड को विशेष रूप से मध्य जोन में स्टेशन मास्टरों के व्यवस्थागत शोषण और अनुचित श्रम प्रथाओं के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया है. आयोग ने 27 अक्टूबर को रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और मुख्य श्रम आयुक्त को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है.

V.K. Paliwal
आयोग को दी गई शिकायत में सेवानिवृत्त स्टेशन मास्टर वीरेंद्र कुमार पालीवाल ने आरोप लगाया कि स्टेशन मास्टरों को बिना अतिरिक्त भुगतान किए अधिक समय तक काम करने को मजबूर किया जाता है, उन्हें पर्याप्त विश्राम दिए बिना लंबे समय तक ड्यूटी करनी पड़ती है, और उन्हें लगातार रात की ड्यूटी करने के लिए बाध्य किया जाता है.
मानवाधिकार आयोग ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया पीड़ितों के मानवाधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होते हैं. आयोग ने कहा कि ये चलन संवैधानिक अधिकारों और श्रम कानूनों का उल्लंघन हैं, जिससे कर्मचारियों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है और रेलवे परिचालन में सुरक्षा जोखिम बढ़ता है.
आदेश में यह भी कहा गया कि शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से इन अनुचित प्रथाओं की जांच करने, उन्हें रोकने, उचित भुगतान सुनिश्चित करने और स्टेशन मास्टरों के अधिकार व सम्मान को बनाए रखने का आग्रह किया है. एनएचआरसी ने अपने आदेश के साथ पालीवाल की शिकायत की एक प्रति भी संलग्न की, जिसमें ऐसे अनुचित चलन का उल्लेख किया गया है जो यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं.
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की नोटिस के बाद सेंट्रल रेलवे के प्रिंसिपल चीएफ पर्सनल आफिसर बीएस रामटेक ने डीआरएम नागपुर को मामले में आवश्यक कार्रवाई करने के आदेश दिये हैं. उन्होंने तीन सप्ताह में पूरी रिपोर्ट मांगी है ताकि चार सप्ताह से पहले आयोग को इस मामले में सही रिपोर्ट भेजी जा सके.
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