- रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं की खुली पोल, खुद रेल जीएम छतरी लेकर प्लेटफॉर्म पर दौड़े
- SER/GM ने राउरकेला समेत कई स्टेशनों का किया निरीक्षण, रेलकर्मियो से की बात
ROURKELA. SER/GM जीएम अनिल कुमार मिश्रा की मौजूदगी में अचानक शुरू हुई तेज बारिश ने राउरकेला रेलवे स्टेशन पर व्यवस्थाओं की पोल खोल कर रख दी. प्लेटफार्म की छतों से झरनों की तरह पानी गिरने लगा. ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया और गंदा पानी यात्रियों के पैरों के पास से होकर बहने लगा. यात्री सामान उठाकर बच्चों को लेकर इधर-उधर भागने लगे.
इससे शर्मनाक स्थिति तब आयी जब खुद रेलवे जीएम अनिल कुमार मिश्रा को प्लेटफाॅर्म पर छतरी लेकर दौड़ना पड़ा. क्योंकि सिर के ऊपर लगा रेलवे का शेड भी उन्हें भीगने से नहीं बचा सका. जब रेलवे जीएम के सामने यह दृश्य है तो आम यात्रियों की हर दिन होने वाली दुर्गति की कल्पना मात्र से सिहरन हो जाती है.
यह सब उस समय हो रहा है जब राउरकेला स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकसित किया जा रहा. यात्री सुविधा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुके है जबकि करोड़ों की राशि खर्च करने का प्रयोजन जारी है. स्टेशन प्रथम श्रेणी का है और स्मार्ट सिटी की श्रेणी में आता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती है. यात्रियों की सुविधा के नाम पर सिर्फ रंग-रोगन और कागजी रिपोर्ट तैयार की जाती हैं, जबकि मूलभूत सुविधाएं प्लेटफाॅर्म और स्टेशन पर पूरी तरह ध्वस्त नजर आती हैं.
जानकारों का कहना है कि रेलवे में भ्रष्टाचार की जो दीमक योजनाओं को लगी है, उसकी एक झलक गुरुवार 24 जुलाई 2025 को जीएम को नजर आयी. हालांकि जीएम ने इस मामले में क्या पहल की और क्या जिम्मेदारी तय की यह तो देखने वाली बात होगी? लेकिन आम यात्रियों के मुंह से यहीं शब्द निकले की … लो अब तो रेलवे जीएम के सिर पर भी टपकने लगा ”बारिश का पानी” !
ट्रेन मैनेजर की मौत ने चिकित्सा व्यवस्था की खोली पोल
दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्रा अपने विशेष निरीक्षण कार्यक्रम के तहत 6:30 बजे सुबह विशेष सैलून से झारसुगुड़ा पहुंचे थे. उनके साथ चक्रधरपुर डीआरएम तरुण हुरिया, सचिव मनीष कुमार पाठक सहित जोन और मंडल स्तर के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे. सुबह 9 बजे उन्होंने झारसुगुड़ा यार्ड से निरीक्षण की शुरुआत की. यार्ड आधुनिकीकरण कार्यों की समीक्षा की.
झारसुगुड़ा स्टेशन पर ही तब भावनात्मक क्षण तब आया, जब ऑल इंडिया गार्ड काउंसिल के प्रतिनिधियों ने जीएम से ऑन ड्यूटी ट्रेन मैनेजर तरुण केरकेट्टा की मृत्यु के लिए अनावश्यक कागजी कार्यवाही और समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलने को जिम्मेवार बताया. हालांकि जीएम ने घटना की जांच कराने और भविष्य में पुनरावृत्ति नहीं होने के लिए व्यवस्था सुधारने का आश्वासन तो दिया, लेकिन पूरा मामला रेलवे के भीतर व्याप्त प्रशासनिक शिथिलता और संवेदनशीलता की कमी को उजागर कर गया.
राउरकेला में रेलकर्मियों की पत्नियों ने घेरा, कहा – नरक में रह रहे, सुनकर हो गये ‘जीएम मौन’
झारसुगुड़ा के बाद जीएम ने धुर्वाडीह, राजगंगपुर और पानपोश स्टेशनों का निरीक्षण किया. शाम करीब 7 बजे राउरकेला स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या दो पर पहुंचे. यहां रोशनी की खराब व्यवस्था पर स्टेशन प्रबंधक को फटकार लगाई. अचानक राउरकेला रेलवे कॉलोनी की महिलाओं ने जीएम को घेर लिया.
महिलाओं ने जीएम को बताया कि कॉलोनी में एक सप्ताह से जलापूर्ति ठप है. सड़कों पर पैदल चलना भी मुश्किल है. स्ट्रीट लाइटें रात में नहीं जलतीं और क्वार्टरों के पीछे असामाजिक तत्वों का अड्डा है. डर और असुरक्षा के माहौल में हैं. बच्चे बीमार हो रहे, मूलभूत सुविधाएं तक समाप्त हो चुकी हैं. “हम रेलवे की कॉलोनी में नहीं, बल्कि नरक में रह रहे हैं,” – महिलाओं की यह बात सुनकर जीएम भी कुछ पल के लिए मौन हो गए. हालांकि बाद में उन्होंने सुधार को लेकर जरूरी निर्देश देने का आश्वासन दिया.
लोको पायलटों की भी समस्याओं से रु-ब-रु हुए जीएम
इसके बाद ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने जीएम से मुलाकात कर चक्रधरपुर मंडल के लोको पायलटों की समस्याएं सामने रखीं. लंबी ड्यूटी, अपर्याप्त विश्राम समय, तनावपूर्ण कार्य वातावरण और तकनीकी अव्यवस्थाएं उनके प्रमुख मुद्दे रहे. उन्होंने बताया कि उच्च अधिकारियों का ध्यान ट्रेनों के समय पर परिचालन पर तो है, लेकिन लोको पायलटों की मानसिक और शारीरिक स्थिति की अनदेखी की जा रही है, जो एक दिन किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है.













































































