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पूर्व मध्य रेलवे में ‘सुल्तान मिर्ज़ा’ राज? ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल और सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट में सुस्ती पर उठे सवाल

फोटो AI जेनरेटेड

PATNA. पूर्व मध्य रेलवे का दानापुर मंडल इस समय एक नए विवाद के केंद्र में है. विद्युत विभाग (सामान्य) के कामकाज और वहां के अधिकारियों के फैसलों पर पक्षपात, भ्रष्टाचार और वित्तीय नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं.

चर्चा है कि एक तरफ जहां जरूरी रेल प्रोजेक्ट्स कछुआ गति से चल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ रसूखदार अधिकारी रेलवे के संसाधनों और मैनपावर का कथित तौर पर निजी फायदों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं.

railwellwishers.com और स्थानीय सूत्रों से मिल रही खबरों के अनुसार, विभाग के भीतर नियमों को ताक पर रखकर कथित तौर पर एक सिंडिकेट चलाया जा रहा है. जिससे न केवल रेलकर्मियों का शोषण हो रहा है बल्कि रेलवे के राजस्व को भी भारी चपत लग रही है.

रेलकर्मियों का घरेलू कार्यों में दुरुपयोग और शोषण

शिकायतों के मुताबिक, दानापुर मंडल में कथित तौर पर कर्मचारियों की भारी कमी का बहाना बनाकर ‘ठेका संस्कृति’ (आउटसोर्सिंग) को बढ़ावा दिया जा रहा है. दूसरी तरफ, हकीकत यह बताई जा रही है कि मंडल के लगभग 170 से 180 तकनीकी और सहायक रेल कर्मचारी (जैसे हेल्पर और टेक्नीशियन) ग्राउंड ड्यूटी पर तैनात होने के बजाय रसूखदार अधिकारियों के सरकारी आवासों पर घरेलू काम कर रहे हैं.

आरोप है कि कुछ अधिकारी रसूख के नशे में 7 से 9 रेलकर्मियों को अपने निजी आवास पर बंधुआ मजदूरों की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. जब रेल लाइनों या स्टेशनों पर तकनीकी खराबी (फेलियर) होती है, तो मैनपावर की कमी का बहाना बना दिया जाता है.

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इस कथित शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाले कर्मचारियों को दबाने के लिए अब नई रणनीतियां अपनाई जा रही हैं, जैसे आवास पर फोन ले जाने की मनाही, सीसीटीवी बंद रखना और कर्मचारियों को शिफ्टों में बुलाना, ताकि यह बात बाहर न आ सके.

ट्रांसफर-पोस्टिंग का खेल और चहेतों को तवज्जो

खबरों के अनुसार, विद्युत विभाग में जाति और मजहब के आधार पर पक्षपात के गंभीर आरोप लग रहे हैं. मामला उजागर होने के बाद, कथित तौर पर अपने करीबियों को बचाने और मनचाही जगहों पर बिठाने का खेल शुरू हो चुका है.

हाल ही में राजेंद्र नगर कोचिंग कॉम्प्लेक्स में तैनात एक सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE) को हटाकर चहेते को सेट करने का प्रयास किया जा रहा है. इसके अलावा, वित्तीय अनियमितताओं के आरोपी (दागी) कर्मचारियों को नियमों के विरुद्ध जाकर महत्वपूर्ण स्टोर का अनाधिकृत प्रभार सौंपने की बात भी सामने आ रही है.

सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट में सुस्ती और वित्तीय नुकसान

रेलवे को सीधे तौर पर वित्तीय लाभ पहुंचाने वाले प्रोजेक्ट्स में जानबूझकर ढिलाई बरतने का आरोप है. अगस्त 2023 में पीपीपी (PPP) मोड पर आधारित जिस सोलर पैनल प्रोजेक्ट को गति पकड़नी थी, वह नाममात्र के लिए चल रहा है. अनुबंध के तहत 3.2 मेगावाट (MW) क्षमता का सोलर पैनल स्टेशन बिल्डिंग की छतों पर लगाया जाना था, जिससे रेलवे का बिजली बिल काफी कम हो जाता.

परंतु, एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी महज 350 किलोवाट (KW) का काम ही एक कॉलोनी की छत पर किया गया है. आरोप है कि संबंधित संवेदक (कॉन्ट्रैक्टर) के प्रति विशेष संवेदना के कारण इस प्रोजेक्ट को जानबूझकर उलझाया जा रहा है.

फर्जी बिलिंग और कोटेशन का ‘कमीशन सिस्टम’

विद्युत विभाग के अंतर्गत होने वाले कोटेशन के कार्यों में कथित तौर पर एक नया भ्रष्टाचार का मॉडल सामने आया है. नियमों को ताक पर रखकर कोटेशन को पहले से निर्धारित दरों पर आगे बेचा जा रहा है.

सब-स्टैंडर्ड (घटिया) मटेरियल की सप्लाई और फर्जी बिलों के माध्यम से रेलवे के राजस्व को लूटा जा रहा है. अधिकारियों के इम्प्रेस्ट फंड (आकस्मिक कोष) के माध्यम से की जा रही खरीदारी भी भारी संदेह के घेरे में है.

मुख्यालय स्तर के अधिकारियों के अधिकारों का दुरुपयोग कर मंडल स्तर पर ‘काम कम, माल भरदम’ के सिद्धांत पर फर्जी कार्य दिखाए जा रहे हैं. इसके अलावा, अमृत भारत योजना के तहत लखीसराय में होने वाले लिफ्ट निर्माण कार्य को नियमों को दरकिनार कर केवल जल्दबाजी में उद्घाटन कराने के नाम पर दानापुर स्टेशन की लिफ्ट को वहां शिफ्ट कर दिया गया.

बड़े सवाल और मौन तंत्र

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से शिकायतें सामने आने के बाद भी मंडल या मुख्यालय स्तर के किसी भी वरीय अधिकारी ने इस पर सुध नहीं ली है. ऐसा लगता है कि पूरी व्यवस्था मौन स्वीकृति देकर इस कथित लूट में साझीदार बनी हुई है.

रेल मंत्रालय ने भले ही ’52 सप्ताह, 52 सुधार’ का नारा देकर विसंगतियों को दूर करने का दावा किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार की कोई शुरुआत न होना इस अभियान पर प्रश्नचिह्न लगाता है.

क्या रेलवे बोर्ड इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर कोई निष्पक्ष जांच कराएगा या फिर पूर्व मध्य रेलवे का विद्युत विभाग इसी तरह विनाश के मार्ग पर अग्रसर रहेगा ?

क्रमश : 

रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा. 

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