Connect with us

Hi, what are you looking for?

Rail Hunt

आरपीएफ-जीआरपी

आगरा कैंट कांड : दोषियों को सजा दो, या मेरी जान ले लो, पत्नी की चेतावनी – बहन पटरी पर उतरी

  • महिला कर्मचारियों की भागीदारी और पीड़ित परिवार की बेबसी ने आंदोलन को दिया धार, आत्मसम्मान की लड़ाई बना आंदोलन 

AGRA. आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट (Dy SS) नरेंद्र चाहर के साथ हुई कथित बर्बरता और मारपीट के मामले ने अब एक बेहद मार्मिक और आक्रोशित आंदोलन का रूप ले लिया है.

इस घटना के विरोध में जहां उत्तर प्रदेश के 30 शहरों में रेल कर्मचारी सड़कों पर उतर आए हैं, वहीं पीड़ित अधिकारी के घर में सन्नाटा, आंसू और गहरी हताशा पसरी हुई है. इंसाफ की मांग को लेकर बिलखता परिवार अब अपनी जान दांव पर लगाने को मजबूर हो गया है.

सुबह करीब 10:30 बजे आगरा में हजारों रेल कर्मचारी सड़कों पर उतर आए. डीआरएम कार्यालय के बाहर रेलवे कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया और आरपीएफ के खिलाफ नारेबाजी की. महिला कर्मचारियों ने भी “आरपीएफ मुर्दाबाद” और “हाय-हाय” के नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया.

पति का यह अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकती – रो पड़ीं पत्नी

इस पूरे विवाद में सबसे दर्दनाक मोड़ तब आया जब पीड़ित नरेंद्र चाहर की पत्नी, हरेंद्री चाहर, मीडिया के कैमरों के सामने आकर फूट-फूटकर रो पड़ीं. आंसुओं को अपनी साड़ी से पोंछते हुए उन्होंने बेहद भावुक और झकझोर देने वाली चेतावनी दी:

मेरे पति को प्लेटफॉर्म पर इतनी बेरहमी से घसीटकर पीटा गया कि उस घटना का वीडियो तक मुझसे देखा नहीं जा रहा. मैं अपने पति का यह अपमान कभी बर्दाश्त नहीं कर सकती. अगर दोषी आरपीएफ (RPF) जवानों को तत्काल बर्खास्त और गिरफ्तार नहीं किया गया, तो मैं अपनी जान दे दूंगी.

पत्नी की इस सिसकती हुई आवाज ने प्रदर्शनकारी रेल कर्मचारियों के गुस्से में घी का काम किया है, जिससे आंदोलन की आग और भड़क उठी है.

नरेंद्र चाहर को जिस तरह सार्वजनिक रूप से घसीटा गया, उसका वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला प्रशासनिक से ज्यादा “स्वाभिमान का मुद्दा” बन गया है. रेलकर्मी इसे अपनी गरिमा पर सीधा हमला मान रहे हैं. यही वजह है कि ड्यूटी छोड़कर महिला और पुरुष कर्मचारी सड़कों पर उतर आए हैं.

भाई के सम्मान के लिए रेलवे ट्रैक पर उतरी बहन

भावनाओं का गुबार सिर्फ आंसुओं तक सीमित नहीं रहा. भाई के साथ हुए अन्याय से आक्रोशित होकर नरेंद्र चाहर की बहन अचानक रेलवे ट्रैक पर कूद गईं और ट्रेन रोकने की कोशिश करने लगीं. इस कदम से स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई. रेलवे अधिकारियों और वहां मौजूद कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद समझा-बुझाकर उन्हें पटरी से हटाया. यह दिखाता है कि इस घटना ने पूरे परिवार को किस हद तक मानसिक रूप से तोड़ कर रख दिया है.

“अगर मैं रिश्वत लेता, तो अब तक जेल में होता” – नरेंद्र चाहर

पीड़ा और बेबसी के बीच डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट नरेंद्र चाहर ने भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने रोष व्यक्त करते हुए कहा:

दोहरा रवैया: “अगर मैं रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाता, तो यह विभाग मुझे तुरंत जेल भेज देता. लेकिन कानून की रक्षा करने वालों ने सरेआम अवैध वसूली की और मेरे साथ मारपीट की, क्या उनके लिए कोई कानून नहीं है?”

आर-पार की लड़ाई: उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि या तो दोषियों की गिरफ्तारी होगी, या फिर रेल का चक्का थमेगा. उनका पूरा परिवार अब न्याय के लिए पटरी पर बैठने को तैयार है.

आरपीएफ के खिलाफ यह आक्रोश क्या रेलवे के विभिन्न विभागों (ऑपरेटिंग/कमर्शियल) और सुरक्षा बल (RPF) के बीच लंबे समय से दबे आपसी तनाव और अविश्वास का विस्फोट तो नहीं! यही कारण है कि वर्दीधारियों को असीमित शक्तियां देने के बजाय उनकी जवाबदेही तय करने की मांग उठने लगी है. 

राज्यव्यापी आक्रोश, समर्थन में रेलकर्मी

घटना ने सिर्फ आगरा ही नहीं, बल्कि पूरे देश-प्रदेश में रेलकर्मियों को झकझोर दिया है. आगरा, मथुरा, झांसी समेत लगभग 30 शहरों में “आरपीएफ मुर्दाबाद” के नारों के साथ हजारों कर्मचारी डीआरएम (DRM) दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं. महिला कर्मचारियों की भारी भागीदारी और पीड़ित परिवार की बेबसी ने इस आंदोलन को केवल एक प्रशासनिक विवाद न रखकर आत्मसम्मान की लड़ाई बना दिया है.

केवल निलंबन नहीं, जेल भेजने की मांग

रेलवे प्रशासन ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरपीएफ जवानों (एएएसआई मेघराज मीणा, बालकिशन, कॉन्स्टेबल बदन सिंह और जितेंद्र) को निलंबित कर दिया है, लेकिन गुस्साए कर्मचारी इस “विभागीय लीपापोती” मान रहे हैं. कर्मचारियों और पीड़ित परिवार की मांग है कि:

  • दोषियों को तत्काल सेवा से बर्खास्त किया जाए

  • आपराधिक मुकदमा दर्ज कर तुरंत जेल भेजा जाए

गाली-गलौज के बाद भड़के थे RPF के जवान

आगरा कैंट स्टेशन पर हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे का एक दूसरा पहलू भी सामने आ रहा है. आरपीएफ सूत्रों और चश्मदीदों के मुताबिक, बहस की शुरुआत कथित तौर पर गाली-गलौज और अभद्रता से हुई थी, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों का गुस्सा भड़क उठा. हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने पल भर में जवानों को विलेन की तरह पेश कर दिया. अब हाई-लेवल कमेटी मामले की जांच कर रही है, जिससे दोनों पक्षों को निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद है.

संबंधित खबरें 

Spread the love

अभी अभी

You May Also Like

आरपीएफ-जीआरपी

BHOPAL. जबलपुर सीबीआई की टीम ने गुरुवार देर रात सागर में कार्रवाई करते हुए DyCE-II/Con/WCR को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ...

आरपीएफ-जीआरपी

अवैध वेंडिंग संचालन को लेकर स्थानीय सिंडिकेट के निशाने पर आ गये थे कमलेश समादार ASC/ROU ने रेलवे बोर्ड को भेजी ‘X’ की शिकायत...

आरपीएफ-जीआरपी

संवेदनशील इलाके में नियम तोड़ अकेले तैनात था जवान राजेश मिश्रा, मौत के बाद सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल Ranchi. रांची के नामकुम...

न्यूज हंट

S&T कर्मचारियों की एकजुटता रंग लाई! IRSTMU के ‘डिमांड डे’ के बाद रेलवे बोर्ड ने जारी की टेक्नीशियन भर्ती की अधिूसचना  NDLS. भारतीय रेलवे के...