NEW DELHI. भारतीय रेलवे ने पार्सल व्यवसाय को बढ़ावा देने तथा यात्रियों और व्यापारियों की सुविधा के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है. रेल मंत्रालय, रेलवे बोर्ड द्वारा दिनांक 27 फरवरी 2026 को ‘फ्रेट मार्केटिंग सर्कुलर संख्या 06/2026’ जारी करते हुए पार्सल की ‘ट्रांस-शिपमेंट’ — अर्थात् एक ट्रेन से उतारकर दूसरी ट्रेन में पुनः लादने — की सुविधा को अनुमति दे दी है. यह निर्णय रेलवे के पार्सल नेटवर्क के विस्तार और राजस्व वृद्धि की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है.
क्या था पुराना नियम?
आईआरसीए कोचिंग टैरिफ नं. 25 (भाग-III) के पैरा-11 के अंतर्गत पूर्व में यह प्रावधान था कि किसी भी पार्सल को बीच के किसी मध्यवर्ती स्टेशन पर एक ट्रेन से उतारकर दूसरी ट्रेन में चढ़ाना प्रतिबंधित था. यह अनुमति केवल उन स्टेशनों पर थी जहाँ रेलमार्ग का गेज बदलता हो. इस प्रतिबंध का मुख्य कारण ट्रेनों की समय-पालना (Punctuality) की चिंता था, क्योंकि कई स्टेशनों पर सामान उतारने-चढ़ाने से ट्रेन की समय-सारिणी बाधित होती थी. परंतु इस प्रतिबंध के कारण पार्सल व्यापार का दायरा सीमित हो गया था और रेलवे की पार्सल आय पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था.
नई व्यवस्था — क्या है प्रावधान?
रेल मंत्रालय ने उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अब विशेष स्टेशनों पर ट्रांस-शिपमेंट की अनुमति प्रदान की है. यह सुविधा निम्नलिखित शर्तों के अधीन उपलब्ध होगी:
1. बुकिंग स्टेशन से गंतव्य स्टेशन तक प्रतिदिन चलने वाली कोई सीधी ट्रेन उपलब्ध न हो जिसमें पार्सल की लोडिंग/अनलोडिंग हेतु न्यूनतम 5 मिनट का ठहराव हो.
2. ट्रांस-शिपमेंट केवल उस स्टेशन पर होगी जो पहली ट्रेन (जिसमें पार्सल आया है) का अंतिम पड़ाव (Terminating Point) हो तथा दूसरी ट्रेन (जिससे पार्सल आगे भेजा जाएगा) वहीं से अपनी यात्रा प्रारंभ (Originating Point) करती हो.
3. पार्सल का किराया पूरे वास्तविक मार्ग की दूरी के आधार पर लिया जाएगा, जिससे ग्राहक को टेलीस्कोपिक लाभ (दूरी के अनुसार घटती दर) प्राप्त होगा.
4. किराया उन ट्रेनों में लागू उच्च श्रेणी की दर (R/P/S) के आधार पर लगेगा जिनसे पार्सल यात्रा करेगा.
5. यदि सामान SLR (गार्ड वैन) में लगेज के रूप में बुक किया गया है, तो उसका किराया Scale-L के अनुसार लिया जाएगा.
अतिरिक्त ट्रांस-शिपमेंट शुल्क
सामान्य पार्सल भाड़े के अतिरिक्त ट्रांस-शिपमेंट होने पर निम्न अतिरिक्त शुल्क भी देय होगा:
* ₹5/- प्रति पैकेज (पैकेट)
* न्यूनतम ₹20/- प्रति क्विंटल या उसके भाग पर
* यह शुल्क SLR में बुक लगेज (सामान) पर भी समान रूप से लागू होगा.
एकल पार्सल बिल की सुविधा
नई व्यवस्था के अंतर्गत ग्राहकों को संपूर्ण यात्रा के लिए केवल एक ही पार्सल वे-बिल (PW-Bill) जारी किया जाएगा. इस बिल में कुल भाड़े का विस्तृत विवरण तथा ट्रांस-शिपमेंट स्टेशन का स्पष्ट उल्लेख होगा. CRIS (रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र, नई दिल्ली) को निर्देश दिया गया है कि वे सॉफ्टवेयर में आवश्यक परिवर्तन करें और बुकिंग के समय ही ग्राहकों को पूरी यात्रा में शामिल सभी ट्रेनों की जानकारी उपलब्ध कराई जाए.
जवाबदेही और निगरानी
ट्रांस-शिपमेंट की संपूर्ण जिम्मेदारी उस जोनल रेलवे की होगी जिसके अंतर्गत संबंधित स्टेशन आता है. ट्रांस-शिपमेंट शुल्क का हिस्सा उसी जोनल रेलवे को प्राप्त होगा. निगरानी प्रक्रिया इस प्रकार होगी:
1. संबंधित जोनल रेलवे स्टेशन के लोडिंग-अनलोडिंग सारांश के आधार पर ट्रांस-शिपमेंट की आंतरिक जांच सुनिश्चित करेगा.
2. ट्रांस-शिपमेंट स्टेशन पर लंबित पार्सल की जांच ‘डिलीवरी बुक’ या ‘ट्रांस-शिपमेंट रजिस्टर’ के माध्यम से की जाएगी, जैसा कि अकाउंट्स कोड वॉल्यूम-II में निर्धारित है.
3. फॉरवर्डिंग नोट एवं PW-Bill की जांच मूल (Originating) रेलवे के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार ही संपन्न होगी.
यात्रियों और व्यापारियों को क्या होगा लाभ?
* जहाँ अब तक सीधी ट्रेन के अभाव में पार्सल भेजना संभव नहीं था, उन मार्गों पर भी अब पार्सल आसानी से भेजा जा सकेगा.
* पार्सल की तेज और अधिक सुगम डिलीवरी सुनिश्चित होगी.
* टेलीस्कोपिक किराया दर से ग्राहकों को आर्थिक लाभ मिलेगा.
* पूरी यात्रा के लिए एकल बिल मिलने से पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी.
* रेलवे के पार्सल नेटवर्क का विस्तार होगा और राजस्व में भी वृद्धि होगी.
यह आदेश रेलवे बोर्ड के वित्त निदेशालय की सहमति से जारी किया गया है. आईआरसीए कोचिंग टैरिफ नं. 25 (भाग-III) का पैरा-11 तदनुसार संशोधित कर दिया गया है तथा IRCM के अन्य सभी प्रावधान पूर्ववत् लागू रहेंगे.


















































































