New Delhi.. रेलवे बोर्ड ने नयी परियोजनाओं के व्यवहार्यता अध्ययन और अंतिम स्थान सर्वेक्षण को मंजूरी देने के लिए विभिन्न जोन को पहले दिये गए अधिकार वापस ले लिये हैं. रेलवे बोर्ड ने यह कदम बोर्ड के साथ समय पर संचार में देरी का हवाला देते हुए उठाया, जिसके कारण संसदीय प्रश्नों और अन्य महत्वपूर्ण संदर्भों के उत्तर देने में विलंब हुआ.
सभी जोन के महाप्रबंधकों (जीएम) को संबोधित एक हालिया पत्र में बोर्ड ने कहा, यह देखा गया है कि जोनल रेलवे, व्यवहार्यता अध्ययन और अंतिम स्थान सर्वेक्षण (एफएलएस) को मंजूरी देने के बाद, रेलवे बोर्ड को समय पर मंजूरी आदेश नहीं भेज रहे हैं, जिसके कारण संसदीय प्रश्नों और अन्य वीआईपी संदर्भों के उत्तर देने में देरी हो रही है.
इसमें कहा गया है, ‘इसके अलावा, यह भी देखा गया है कि जोनल रेलवे व्यवहार्यता अध्ययन और अंतिम स्थान सर्वेक्षण की मंजूरी के बाद अतिरिक्त धनराशि के लिए रेलवे बोर्ड से बार-बार संपर्क कर रहे हैं. इसमें कहा गया है कि इन मुद्दों को देखते हुए, ‘‘संदर्भित पत्रों के माध्यम से क्षेत्रीय रेलवे को दी गई व्यवहार्यता अध्ययन (पीईटी/आरईटी सर्वेक्षण) और अंतिम स्थान सर्वेक्षण को मंजूरी देने की शक्ति वापस ली जा सकती है और रेलवे बोर्ड को बहाल की जा सकती है.
नयी परियोजनाओं की मंजूरी और क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए, बोर्ड ने अक्टूबर 2022 में महाप्रबंधकों (जीएम) और मंडल रेलवे प्रबंधकों (डीआरएम) को इन सर्वेक्षणों और अध्ययनों को मंजूरी देने का अधिकार दिया था.
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