नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (National Green Tribunal) की गाइडलाइन है कि रेलवे के वैगन को ऊपर से ढककर माल का परिवहन करता है ताकि आयरन ओर अथवा कोयला डस्ट उड़कर पर्यावरण को संकट में नहीं डाले. इस आदेश के विपरीत धड़ल्ले मालगाड़ियों में ओपन मूवमेंट में चलाया जा रहा है. सोनभद्र के दुद्धी नगर रेलवे स्टेशन से होकर गुजर रही मालगाड़ी के वैगन में आग लग गई.
स्टेशन पर खड़े लोगों ने आग देखाकर शोर मचाया और मालगाड़ी रोकी गयी. इसके बाद रेलवे कर्मचारियों ने आग बुझायी. यह मालगाड़ी कोयला लोड कर झारखंड से आ रही थी. इसी दौरान रास्ते में छठे बैगन मे अचानक आग लग गई. इसके बाद निजी टैंकर मंगाकर आग पर काबू पाया गया. पूरे मामले में यह देखा गया कि मालगाड़ी में कोयला से भरे वैगनों को तिरपाल से ढके बिना ही परिवहन किया जा रहा था.
ऐसे में आए दिन कोयला की चोरी, आगजनी आदि की घटनाएं हो रही है. इस मामले में एनजीटी ने भी रेलवे को स्पष्ट निर्देश दे रखा है कि मालगाड़ी को ढककर कोयले आदि का परिवहन किया जाये लेकिन रेलवे ने यह काम निजी एजेंसी को सौंप दिया है. विभिन्न राज्यों के थर्मल पावर व स्टील उद्योग के लिए बड़ी संख्या में मालगाड़ी के वैगनों में कोयला भेजा जाता है.
हालांकि अगर किसी रेलमार्ग से होकर एक दर्जन मालगाड़ी गुजरती है तो एक दो-दो मालगाड़ी के वैगनों को ही तिरपाल से ढका देखा गया है. बड़ी संख्या में मालगाड़ी वैगन खुले होते है और उनमें कोयला व दूसरे डस्ट वाले मिनिरल का परिवहन किया जा रहा है. यह चिंताजनक है.
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