MUMBAI. भारतीय रेलवे की रीढ़ माने जाने वाले लोको पायलट (Mail) अब पटरी पर दौड़ने के बजाय सेवा से विदा लेने को मजबूर हैं. मुंबई डिवीजन (Central Railway) के 72 लोको पायलटों ने एक साथ VRS (Voluntary Retirement) के लिए आवेदन दिया है. लोको पायलटों के इस आवेदन से रेल प्रशासन प्रशासन है.
आवेदन पत्र में Voluntary Retirement के लिए कई कारण बताए गए हैं. इसमें पायलटों ने पेशेवर दक्षता को बार-बार मिलने वाली चुनौती को बड़ा कारण बताया है. लोको पायलटों का कहना है कि सिस्टम से उपजी थकान अब उन्हें नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर रही है.
उनके सामने अमानवीय कार्य स्थितियां पैदा हो रही है. लगातार ड्यूटी और आराम की कमी ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया है. रही सही कसर रनिंग रूम और ड्यूटी के दौरान मिलने वाला खाना है जो निम्न स्तर का होता है. शिकायत पर काेई कार्रवाई नहीं होती.

पायलटों का कहना है कि बार-बार समस्याओं को लेकर उच्च अधिकारियों तक बात पहुंचायी गयी लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिला. कभी चुनौती तो कभी चेतावनी यह स्थिति काफी चिंताजनक है.
ऐसे में अब सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न होने लगा है. सवाल यह उठाया गया है कि जब ट्रेन चलाने वाला मानसिक तनाव और थकान में होगा, तो क्या रेल यात्रा सुरक्षित रह पाएगी?
लोको पायलटों ने आवेदन में “Professionally Unsustainable” (पेशेवर रूप से जारी रखने योग्य नहीं) की बात कही है. सालों की समर्पित सेवा के बाद, अगर देश के सारथियों को इस तरह ‘सिस्टम’ से हारकर रिटायरमेंट मांगना पड़े, तो यह हम सबके लिए चिंता का विषय है. अब सवाल यह उठता है कि क्या रेल प्रशासन पायलटों की चिंता को दूर करने अथवा यात्रियों की सुरक्षा को आगे भी जोखिम में डाला जाता रहेगा ?



















































































