तारकेश कुमार ओझा , खड़गपुर
आखिरकार चलने लगी लोकल ट्रेनें. करीब आठ महीने की अनुपस्थिति के बाद बुधवार को तड़के हावड़ा से खड़गपुर पहुंची पहली लोकल ट्रेन को देख कर सहज ही मन में अहसास हुआ कि आम आदमी के लिए लोकल ट्रेनें कितनी जरूरी है बल्कि यातायात जगत में उपेक्षित मानी जाने वाली ये लोकल ट्रेनें उस वर्ग की जिंदगी का हिस्सा है , जिसे पेट भरने के लिए मेहनत – मशक्कत करनी पड़ती है. कोई भी दलील या कोई भी तर्क इस जरूरत के सामने बेकार है.
कोरोना काल शुरू होने के बाद मार्च के मध्य से हावड़ा – खड़गपुर संभाग समेत संलग्न रेल खंडों में लोकल ट्रेनों का परिचालन बंद था. अनलॉक शुरू होने के बाद कुछ एक्सप्रेस ट्रेनें स्पेशल बन कर चलने लगी , लेकिन लोकल ट्रेनों पर बंदी का ग्रहण लगा ही रहा. किंतु – परंतु के लंबे दौर के बाद आखिरकार लोकल ट्रेनों को यार्ड से निकलने के लिए ग्रीन सिग्नल मिल पाई. इसे लेकर लोगों व यात्रियों में भारी कौतूहल रहा. इस बहाने पहली बार लोगों को लोकल ट्रेनों की अहमियत का अहसास हुआ.
हालांकि बीती शाम तक यात्री सशंकित रहे कि कहीं स्वास्थ्य विधि या अन्य किसी वजह से लोकल ट्रेनों के परिचालन की संभावना पर फिर ब्रेक न लग जाए. यद्यपि लोगों की ऐसी हर आशंका निर्मूल साबित हुई. दूसरी ओर हावड़ा – खड़गपुर में लोकल ट्रेनों का आवागमन शुरू होने के बाद संलग्न रेल खंड जैसे खड़गपुर – टाटानगर और खड़गपुर – आद्रा समेत अन्य सेक्शन में भी लोकल ट्रेनें जल्द शुरू किए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है. क्योंकि इस पर निर्भर यात्रियों की दो टुक दलील है कि उनके सामने स्वस्थ रहने से ज्यादा बड़ी चुनौती जिंदा रहने की है. इसमें लोकल ट्रेनें हमारी बड़ी मददगार है.
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