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तेजस की बोगियां दे रही यात्रियों को झटका, दरवाजे हो जा रहे जाम, यात्री परेशान

तेजस की बोगियां दे रही यात्रियों को झटका, दरवाजे हो जा रहे जाम, यात्री परेशान
  • यात्रियों की कसौटी पर पानी फेर रहे आईआरसीसीटी के दावे, बढ़ रही शिकायतें

रेलहंट ब्यूरो, नई दिल्ली

देश की पहली कॉर्पोरेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस की बोगियां यात्रियों को झटका देने लगी है. कभी दरवाजा जाम तो कभी शौचालय का बहने वाला पानी. तकनीकी तैार पर खुबियां बताकर करोड़ों खर्च कर उतारी गयी तेजस की बोगियां गुणवत्ता की कसौटी पर कहीं खरा नहीं उतर रही है. चिंता इस बात की होने लगी है कि कहीं तेजस का हाल भी आईआरसीसीटी की दूसरी सेवाओं की तरह नहीं हो जाये. तेजस को लेकर बड़ी चिंता जतायी है. डीआरयूसीसी मेंबर एसएस उप्पल ने, उन्होंने मीडिया को दिये बयान में बताया है कि तेजस का रैक रेल कोच फैक्टरी में बनाया गया है. इस पर रेलवे ने 50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किये हैं, लेकिन ट्रेन में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किए जाने से सुविधाएं यात्रियों पर भारी पड़ने लगी है. हादसे की स्थिति में रेलवे स्तर पर किया गया यही भ्रष्टाचार यात्रियों को महंगा पड़ जाता है.

तमाम विरोधों के बीच निजीकरण की पटरी पर दौड़ रही तेजस ने फिर एक गुरुवार 7 नवंबर को तब झटका खाया जब लखनऊ जंक्शन पर सी-6 बोगी का ऑटोमेटिक डोर जाम हो गया. मशक्कत के बाद जब दरवाजा नहीं खुला तो यात्री परेशान हो गए. मेकेनिकल स्टाफ के आने पर इसे ठीक करवाया जा सका. इसके बाद ट्रेन रवाना हो सकी. बीते चार अक्तूबर को तेजस एक्सप्रेस का आरंभ लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली के बीच शुरू हुआ था. अगर तेजस का हाल आईआरसीटीसी की दूसरी सेवाओं की तरह हुआ तो अधिक कीमत चुकाकर इसकी यात्रा करने वालों का भगवान ही मालिक होगा.

तब आईआरसीटीसी अधिकारियों ने दावा किया था कि ट्रेन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है. ऑटोमेटिक डोर से लेकर सेंसरयुक्त पानी की टोटियां व डस्टबिन तक इसमें लगाए गए हैं. अब यही सुविधाएं यात्रियों के लिए मुसीबत बनती जा रही हैं. सेंसरयुक्त पानी की टोटियों पर छाया पड़ते ही पानी बहने की समस्या हाल ही में ठीक कराई गई है. वहीं बोगी के शीशों की फिटिंग को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं. ऐसे ही डोरमेट को लेकर भी शिकायतें थीं, जिन्हें दूर किया गया है. मजे की बात है कि कुर्सियां भी जर्जर निकलने लगी है. हाल ही में एग्जीक्यूटिव क्लास की पांच कुर्सियों को बदलवाया गया है. इतना ही नहीं ट्रायल के दौरान भी बोगियों से आवाजें आ रही थीं, जिन्हें दूर करने के ठोस प्रयास नहीं किए गए हैं. इसका खामियाजा गुरुवार 7 नवंबर को 82501 लखनऊ जंक्शन नई दिल्ली तेजस एक्सप्रेस की सी-6 बोगी का आटोमेटिक डोर जाम होने के रूप में सामने आया.

इससे यात्री बोगी में नहीं जा सके और काफी देर बात भी जब गेट नहीं खुला तो मेंटेनेंस स्टाफ को बुलाना पड़ा. इसके बाद यह ठीक हुआ. बता दें कि डोर सेंसरयुक्त है, जिसमें दिक्कतें पैदा हो रही हैं. इतना ही नहीं मेंटेनेंस के लिए जब तेजस ऐशबाग स्थित डिपो में जाती है तो रेलकर्मियों से लेकर अधिकारियों तक को खासी माथापच्ची करनी पड़ती है. लखनऊ कानपुर पैसेंजर एसोसिएशन के संजीव कपूर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि रेलवे ने तेजस जैसी महंगी कॉपोटरेट ट्रेन के लिए रेड कारपेट बिछाकर दिया है. इसका किराया विमानों से भी महंगा है. बावजूद इसके यात्रियों को सुविधाएं तक मयस्सर नहीं. कुर्सियों से लेकर विंडो और सेंसरयुक्त दरवाजे तक समस्याएं पैदा कर रहे हैं.

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