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TATANAGAR : रेलवे स्टेशन सलाहकार समिति चाय-पानी-नाश्ता का मंच नहीं, गठन में खानापूर्ति निराशाजनक !

  • सामाजिक कार्यकर्ता, औद्योगिक संगठन, मीडिया, उपभोक्ता संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं 
  • एक साल गुजरने के बाद गठित की गयी समिति, चयन प्रक्रिया में नहीं दिखायी गयी गंभीरता    

TATANAGAR. चक्रधरपुर रेलमंडल के ए-1 ग्रेड स्टेशन टाटानगर में यात्रियों की सुविधा पर इस साल 350 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जायेगी. सरकार यह रकम यात्री सुविधाओं के लिए और यात्रियों के लिए खर्च करेगी. इसका शिलान्यास भी हो चुका है लेकिन बीते दिनों स्टेशन सलाहाकार समिति की बैठक में यह बात सामने आयी कि रेल प्रशासन ने टाटानगर स्टेशन सलाहकार समिति के सदस्यों की सूची आधी कर दी है. यह समिति स्थानीय स्तर पर यात्रियों की समस्याओं से रेल प्रशासन काे रू-ब-रू कराती है.  जो रेलवे बोर्ड की गाइइ लाइन पर संचालित होती है और ग्रेड ए-1 के स्टेशन पर सदस्यों की संख्या 9 से अधिक रखने का प्रावधान है.

फिलहाल स्टेशन सलाहकार समिति में कुल पांच सदस्यों की सूची जारी की गयी है. इसमें एक सदस्य सिविल सर्जन पदेन है. स्टेशन पर लगायी गयी सदस्यों की सूची में नाम लिखने में भी अशुद्धियों की भरमान है. पदनाम तो है ही नहीं. यह गंभीर विषय है कि स्टेशन निदेशक से लेकर सीसीआई और डिप्टी एसएस कॉमर्शियल तक ने इसे गंभीरता से नहीं लिया.

समिति के एक पूर्व सदस्य ने तो यहां तक टिप्पणी कर दी कि रेलवे अधिकारियों ने सलाहकार समिति को गंभीर चर्चा का मंच नहीं बल्कि चाय-पानी-नाश्ता की खानापूर्ति तक सीमित कर दिया है. समिति गठन में अधिकारियों की गंभीरता तो यहीं बता रही है. यह निराशाजनक है.   

समिति के अन्य चार सदस्यों में 40 फीसदी का प्रतिनिधित्व टेल्को क्षेत्र से ही दिया गया है. नयी समिति में सामाजिक कार्यकर्ता, औद्योगिक संगठन, मीडिया, उपभोक्ता संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है. यहां गौरतलब है कि टाटानगर स्टेशन के डिप्टी एसएस कॉमर्शियल सुनील कुमार टेल्को क्षेत्र से आते है और उनका पूर्व में टाटा मोटर्स से जुड़ाव रहा है. स्टेशन सलाहकार समिति के चेयरमैन रेलवे क्षेत्रीय प्रबंधक होते हैं. वाणिज्य निरीक्षण अथवा स्टेशन डायरेक्टर बैठकों का संचालन करते हैं. टाटानगर जैसे बड़े स्टेशन पर एक साल गठित समिति में सामाजिक कार्यकर्ता, औद्योगिक संगठन, मीडिया, उपभोक्ता संगठन को प्रतिनिधित्व नहीं दिये जाने को निराशाजनक बताया जा रहा है.

ऑल इंडिया चेंबर ऑफ कंज्युमर्स के रवि शंकर ने बताया कि रेल मंत्रालय की गाइडलाइन पर संचालित होने वाली समिति के गठन में गंभीरता नहीं दिखाने का मामला प्रतीत होता है. इसे जीएम-डीआरएम से लेकर रेलवे बोर्ड स्तर पर उठाया जायेगा.

उन्होंने सवाल किया कि ऐसे समय में जब यात्रियों की सुविधा के लिए करोड़ों की योजना टाटानगर में जमीन पर उतरने वाली है तब समिति की संख्या किस आदेश से समिति कर दी गयी? इसके गठन में क्या प्रक्रिया अपनायी गयी? एक ही क्षेत्र से अधिक लोगों को किन परिस्थितियों में प्रतिनिधित्व दिया गया? विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधित्व को इस बार क्यों शामिल नहीं किया गया?

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स्टेशन पर तीन-तीन डिप्टी एसएस कॉमर्शियल, तीन शिफ्ट में उपस्थिति नहीं ?   

टाटानगर में स्टेशन डायरेक्टर के अलावा डिप्टी एसएस कॉमर्शियल के रूप में तीन लोग हैं. स्टेशन डायरेक्टर सुनील कुमार है जबकि डिप्टी एसएस कॉमर्शियल में सुनील कुमार सिंह, पिंकी महतो और चंदन सिंह की पदस्थापना है. इसमें सुनील कुमार सिंह और पिंकी महतो लंबे समय से यहां पदस्थापित हैं. जबकि चंदन की पोस्टिंग हाल में ही हुई है. वरीय कामर्शियल इंस्पेक्टर (CCI/TATA) के रूप में शंकर झा और संतोष कुमार पदस्थापित है. दिलचस्प बात यह है कि सभी लोग सुबह 10 से 5 बजे तक ही स्टेशन पर उपलब्ध होते हैं. डिप्टी एसएस कॉमर्शियल की तैनाती मुख्यतया यात्री शिकायतों को दूर करने के लिए की गयी है जो शाम छह बजे के बाद से सुबह के 9 बजे तक स्टेशन पर उपलब्ध ही नहीं होते.

अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि जब टाटानगर में डिप्टी एसएस के तीन-तीन पद है तो इनकी सेवा राउंड द क्लॉक 24*7 क्यों नहीं ली जा रही है? तीनों का एक ही समय में स्टेशन पर मौजूदगी का क्या उपयोग ? जबकि दिन के समय तो स्टेशन डायरेक्टर और सीसीआई भी स्टेशन पर उपलब्ध होते हैं. तब टाटानगर में डिप्टी एसएस के तीन-तीन कर्मचारियों की तैनाती क्यों? इनके काम का ऑडिट DRM/CKP क्यूं नहीं कराते. सवाल उठता है कि जब शाम छह बजे से सुबह 9 तक कोई डिप्टी एसएस कॉमर्शियल स्टेशन पर मौजूद ही नहीं होगा तो यात्री शिकायतों व सुविधाओं से उनका क्या नाता? यह रेलवे के श्रम बल का दुरुपयोग नहीं तो और क्या है?

ठेकेदारों के चहेते बने CCI/TATA, एसीएम में पदाेन्नति के गिन रहे दिन  

टाटानगर में बतौर सीसीआई शंकर झा के अब गिने-चुने ही दिन बचे हैं. वह अब यहां अपना समय गुजार रहे. उनका प्रमोशन ACM में हो चुका है. बताया जाता है कि यात्री सुविधाओं से जुड़े किसी भी मामले में उन्होंने रूचि लेना लगभग छाेड़ दिया है. चर्चा है कि उनकी ठेकेदारों से गहरी छनती रही है. स्टेशन पर अनुबंधित लगभग सभी ठेकेदार इन दिनों मनमानी कर रहे है. स्टेशन की सफाई, पार्सल से लेकर गुडस तक की गतिविधि समेत यात्री सेवा से जुड़े कई मामलों में एक भी रिपोर्ट बीते छह माह या उससे पहले सीसीआई ने वरीय अधिकारियों से नहीं की. कहां तो यहां तक जा रहा है कि सीसीआई का यह मौन आने वाले समय में उन्हें बड़े संकट में डाल सकता है.

बताया जाता है कि बीते साल ही गुड्स यार्ड में खड़े कंटेनर से चावल गायब होने के मामले में टाटानगर गुड्स के दो कर्मचारियों को जेल जाना पड़ा था. CGS को अग्रिम जमानत लेनी पड़ी लेकिन 25 लाख से अधिक के गोलमाल के इस मामले से वाणिज्य विभाग के मेन कर्ता-धर्ता रहे CCI/TATA को आरपीएफ ने पूरी जांच प्रक्रिया से दूर रखा. आरपीएफ ने मामले में तब तक एक्शन शुरू नहीं किया जब तक की सीसीआई के ACM में प्रमोशन के लिए विजिलेंस क्लीयरेंस की प्रक्रिया पूरी नहीं हो गयी. यह महज संयाेग था या सुनियोजित साजिश का हिस्सा !

जारी …

रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा. 

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