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    Home » ECR : रेलकर्मियों के इनकम टैक्स डिडक्शन में ‘गोलमाल’, किसकी अनुमति से थर्ड पार्टी को मिली इंट्री!
    बोर्ड/जोन

    ECR : रेलकर्मियों के इनकम टैक्स डिडक्शन में ‘गोलमाल’, किसकी अनुमति से थर्ड पार्टी को मिली इंट्री!

    Railhunt News DeskBy Railhunt News DeskFebruary 26, 2026
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    • निर्माण विभाग में कर्मचारियों के वेतन से हर माह कटौती, लेकिन महीनों तक IT में जमा नहीं हो रही राशि 
    • समस्तीपुर डिवीजन में रेलवे के निर्माण विभाग में आयकर राशि की जमाबंदी को लेकर उठाये जा रहे सवाल   

    PATNA. भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई की हर माह छापेमारी को लेकर चर्चा में रहने वाला पूर्व मध्य रेलवे का हाजीपुर जोन में अब नया विवाद सुर्खियां बटोर रहा है. नया मामला इनकम टैक्स में मद में होने वाली कटौती को लेकर सामने आया है. कहां जा रहा है कि जोन के एक डिवीजन में रेलकर्मियों से हर माह इनकट टैक्स के मद में राशि तो काटी जा रही है उसका भुगतान इनकम टैक्स विभाग को (त्रैमासिक) निर्धारित समय पर नहीं किया जा रहा. लिहाजा कटौती के बावजूद कर्मचारी का Tax डिडक्शन शून्य दर्शा रहा है.

    रेलवे के सभी विभाग रेलवे बोर्ड से जारी एक निर्धारित गाइड पर संचालित होते है. ऐसे में सभी विभागों के लिए रेलकर्मियों की आयकर कटौती अथवा वित्तीय मामलों से जुड़े मानक एक समान हैं, जिनकाे निर्धारित लेखा विभाग करता है. यह प्रक्रिया जोन से लेकर डिवीजन तक अपनायी जाती है. लेकिन पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर मंडल के ‘निर्माण विभाग’ में ऐसा नहीं है. यहां मामला टैक्स के मद में काटी गयी राशि के इनकम टैक्स विभाग को जमा करने की अनियमितता से जुड़ा है.   

    रेलकर्मियों की चिंताएं 

    • रेलवे का लेखा विभाग जो काम खुद करता था, उसके लिए बाहरी एजेंसी की क्या जरूरत पड़ी
    • रेलकर्मियों के निजी डेटा (PAN, बैंक डिटेल्स, सैलरी स्ट्रक्चर) तक थर्ड पार्टी को दी गयी पहुंच  
    • रेलकर्मियों की संवेदनशील जानकारी निजी हाथों में जाना सुरक्षा और प्राइवेसी के लिए बड़ा जोखिम 
    • बिना किसी ठोस टेंडर प्रक्रिया या बोर्ड के स्पष्ट आदेश के थर्ड पार्टी को प्राइवेसी तक पहुंच दी गयी 
    • काम के बदले एजेंसी को अतिरिक्त शुल्क का भुगतान किया जा रहा है, जो अनावश्यक खर्च है
    • कई बार इनकम टैक्स पोर्टल पर दिखने वाला डेटा और सैलरी स्लिप के डेटा में अंतर मिल रहा है
    • कई मामलों में कर्मचारियों को नोटिस मिल रहे हैं, जबकि उनका टैक्स रेलवे पहले ही काट चुका है

    ECR जोन में निर्माण संगठन के फील्ड यूनिट में स्थापित अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन, यात्रा भत्ता आदि का भुगतान उनके कार्यक्षेत्र से सबंधित मंडल के द्वारा किया जाता है. जोन के सभी डिवीजन के कार्यक्षेत्र में कार्यरत फील्ड यूनिट कर्मचारियों का वेतन भुगतान के साथ-साथ इनकम टैक्स की कटौती उनके वेतन से कर आयकर विभाग में समय जमा कर दिया जाता है, जिसका विवरण रेलकर्मी हर माह अथवा तीन माह पर ऑनलाइन देख सकते हैं. लेकिन समस्तीपुर मंडल में ऐसा नहीं है.

    समस्तीपुर मंडल से जुड़े निर्माण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन से आयकर मद में राशि की कटौती तो की जाती है, पर IT विभाग को यह राशि त्रैमासिक रूप में जमा नहीं की जा रही है. निर्माण के कई रेलकर्मियों ने अपना ब्यौरा साझा कर यह बताया कि हर माह काटी जाने वाली राशि उनके डिडक्शन में कई-कई माह तक दिखायी नहीं देती. यहां आयकर मद में काटी गयी राशि को जमा करने के लिए बाहर की थर्ड पार्टी को इंट्री दी गयी है जो कटौती की गई राशि को IT विभाग में जमा कराता है. यह काम वर्षों से चल रहा है जबकि यह काम लेखा विभाग का है.  

    काटी गयी राशि महीनों तक किसके खाते में रहती है ! 

    सवाल यह उठाया जा रहा है कि अगर हर माह राशि की कटौती की जाती है तो वह डिडक्शन और आयकर विभाग में ट्रांसफर ऑनलाइन में क्यों नहीं दर्शाती है? जब राशि काट ली गयी तो यह किसके खाते में महीनों तक रहती है? रेलकर्मी तो यहां तक आशंका जताने लगे है कि बिहार के ‘सृजन घोटाले’ की तर्ज पर आयकर कटाैती की राशि का उपयोग निजी व्यक्ति या संस्थान द्वारा तो नहीं किया जा रहा? जो साल में एक बार जमा किया जाता है ? कहीं यह वित्तीय धोखाधड़ी का मामला तो नहीं?

    कहा जा रहा है कि समस्तीपुर मंडल में ही जहां ओपेन लाइन कर्मचारियों का Tax deduction नियत समय पर IT department में हस्तांतरित कर दिया जाता है, वहीं निर्माण विभाग के कर्मचारियों के वेतन से टैक्स कटौती की राशि आयकर विभाग में जमा नहीं की जाती है. अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि आखिर यह सब कब से चल रहा. इसकी अनुमति किसने दी और थर्ड पार्टी का चयन किस प्रक्रिया और मानक के तहत किया गया? अथवा यह कार्य अनाधिकृत रूप से चल रहा है? 

    मामला सीधे-सीधे आयकर विभाग और भारत सरकार के राजस्व से जुड़ा है लिहाजा यह जांच का विषय है कि रेलकर्मियों के वेतन से काटी गयी राशि इनकम टैक्स विभाग के पास समय पर क्यों नहीं जा रही है? यह किसकी जिम्मेदारी है? अगर इस मामले में कोई अनियमितता हो रही है तो इसके लिए जिम्मेवार कौन लोग हैं?

    वेतन से काटी गयी राशि Income Tax में जमा कराने के नाम पर वसूली! 

    इस मामले में एक तथ्य और सामने आया है कि वेतन मद से आयकर मद में काटी गयी राशि को प्रति कर्मचारी/अधिकारी लगभग एक हजार से दो हजार रुपये लेने के बाद ही Income Tax के खाते में जमा कराया जाता है. यह काम वित्तीय वर्ष समाप्त होने और Form 16 जारी होने के बाद ही किया जाता है. अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सकता है कि इस कार्य में 3rd पार्टी की इंट्री ऑफिशियली है अथवा अनाधिकृत रूप से यह काम किसी एजेंसी को दिया गया है.  तब सवाल यह उठाता है कि क्या रेलकर्मियों से सुविधा के नाम पर अवैध वसूली रेलवे लेखा विभाग की सहमति अथवा मिलीभगत से की जा रही है?

    समस्तीपुर मंडल के अधिकारियों का तर्क है कि निर्माण विभाग के संबंधित Dy CE Construction ही Drwaing and Disbursing Authority हैं और इसलिए Deducted Tax amount को IT department में जमा करने की जवाबदेही उन्हीं की है. जबकि नियम के अनुसार फील्ड यूनिट में कटौती की राशि IT department में जमा करने के लिए मंडल कार्यालय, जोनल मुख्यालय अथवा निर्माण विभाग का मुख्यालय ही अधिकृत होता है. निर्माण विभाग मुख्यालय के कर्मचारी और अधिकारियों का वेतन और संवेदक के बिल का भुगतान निर्माण विभाग ही करता रहा है.

    ऐसे में फील्ड यूनिट के कर्मचारियों के वेतन का भुगतान और IT जमा निर्माण विभाग मुख्यालय के द्वारा क्यों नहीं किया जा रहा, यह जांच का विषय है. इस मामले पर डीआरएम और जीएम को संज्ञान लेकर जरूरी जांच करना चाहिए ताकि सुविधा के नाम पर रेलकर्मियों के आर्थिक शोषण को रोका जा सके.

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