- रेल कर्मचारी ट्रैकमेंटेनर एसोशिएसन ने डीआरएम कोटा के सामने उठाया मामला
जबलपुर. रेलवे ट्रैक पर ड्यूटी के दौरान ट्रैकमेंटेनरों की मौत चिंता का कारण बनी हुई है. इसके लिए रेलवे बोर्ड स्तर पर भी पेट्रोलिंग में सिंगल की-मैन की ड्यूटी नहीं देने का दिशा-निर्देश दिया जाता रहा है. इसके बाद वर्तमान में कोटा-चित्तौड़गढ़ और कोटा-रूठियाई सेक्शन में सिगल की-मेन को डयूटी पर लगातार लगाया जा रहा. यह रेल कर्मचारी की सुरक्षा के साथ साथ रेलवे संरक्षा की दृष्टि से भी चिंताजनक है. रेल कर्मचारी ट्रैकमेंटेनर एसोसिएशन ने दोनों सेक्शनों पर डबल कीमेन की डयूटी लगाये जाने की मांग कोटा मंडल रेल प्रबंधक से की है.
पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा डिवीजन के अंतर्गत आने वाले दोनों सेक्शन में यह व्यवस्था बहाल करने के साथ ही डीआरएम के समक्ष अन्य मांगों को भी एसोसिएशन ने रखा है. एसोसिएशन ने कोटा डीआरएम को लिखे पत्र में रेल कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण की मांग की है.
रनओवर से न केवल एक रेल कर्मचारी की जान जाती है बल्कि उसके साथ-साथ उसका परिवार भी दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाता है. इसलिए ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए रेल प्रशासन की ओर से उचित कदम उठाये जाने की उम्मीद की जाती है.
अनिल सैनी, महासचिव, रेल कर्मचारी ट्रैकमेंटेनर एसोसिएशन
रेल कर्मचारी ट्रैकमेंटेनर एसोसिएशन, पश्चिम मध्य रेलवे के महासचिव अनिल सैनी ने जारी बयान में बताया कि ड्यूटी के दौरान इंजीनियरिंग विभाग के ट्रैकमेंटेनर अक्सर दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं. बार-बार घटित घटनाओं के बावजूद रेल प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं है. रेलवे ट्रेक पर रनओवर की घटनाएं चिन्ता बढ़ा रही है. यह बात समझने वाली है कि रनओवर से न केवल एक रेल कर्मचारी की जान जाती है बल्कि उसके साथ-साथ उसका परिवार भी दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाता है. इसलिए ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए रेल प्रशासन की ओर से उचित कदम उठाये जाने की उम्मीद की जाती है.
वर्तमान में कोटा-चित्तौडगढ़ एवं कोटा-रूठियाई खंड में सिगल की मेन डयूटी रेल कर्मचारी की व्यक्तिगत सुरक्षा के साथ साथ रेलवे संरक्षा की दृष्टि से भी परेशानी का कारण है. दोनों सेक्शनों में डबल कीमेन डयूटी पर लगायी जानी चाहिए. अनिल कुमार सैनी के अनुसार इन्जीनियरिंग विभाग के ट्रैकमेंटेनर्स को वर्ष में दो बार सेफ्टी शूज दिये जाने का आदेश है किन्तु कोटा मंडल में वर्ष 2020 में अब तक सेफ्टी शूज की आपूर्ति नहीं हो सकी है. महासचिव अनिल सैनी ने इन्जीनियरिंग विभाग के गेटों पर 8 घंटे का डयूटी रोस्टर लागू करने, की-मेन के साथ वजनी क्लोजर को हटाने तथा ट्रैक मशीन विभाग में तकनीशियन ग्रेड-।।। के पद पर पदोन्नति हेतु प्रतीक्षारत ट्रैकमेंटेनर्स की पदस्थापना आदेश जारी करने की मांग की है.
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रनओवर से न केवल एक रेल कर्मचारी की जान जाती है बल्कि उसके साथ-साथ उसका परिवार भी दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाता है. इसलिए ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए रेल प्रशासन की ओर से उचित कदम उठाये जाने की उम्मीद की जाती है.
