Close Menu
    • होम
    • रेलहंट स्पेशल
    • रेल न्यूज
    • बोर्ड/जोन
      • सर्कुलर / आर्डर
      • रेलवे की निविदा
    • रेल यूनियन
    • रेल यात्री
    • आरपीएफ-जीआरपी
    • गपशप
      • साक्षात्कार
    • अभिमत
    • मीडिया
      • सोशल मीडिया
      • समाज-संस्कृति
    • संपर्क
    Facebook X (Twitter) Instagram Threads YouTube Telegram
    Thursday, October 22
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube Telegram
    Rail HuntRail Hunt
    Subscribe
    • होम
    • रेलहंट स्पेशल
    • रेल न्यूज
    • बोर्ड/जोन
      • सर्कुलर / आर्डर
      • रेलवे की निविदा
    • रेल यूनियन
    • रेल यात्री
    • आरपीएफ-जीआरपी
    • गपशप
      • साक्षात्कार
    • अभिमत
    • मीडिया
      • सोशल मीडिया
      • समाज-संस्कृति
    • संपर्क
    Rail HuntRail Hunt
    • होम
    • रेलहंट स्पेशल
    • रेल न्यूज
    • बोर्ड/जोन
    • रेल यूनियन
    • रेल यात्री
    • आरपीएफ-जीआरपी
    • अभिमत
    • गपशप
    • मीडिया
    • समाज-संस्कृति
    Home » SER : 18 साल बाद रेलवे बोर्ड ने किया तबादला, फिर से वहीं करा ली पोस्टिंग
    बोर्ड/जोन

    SER : 18 साल बाद रेलवे बोर्ड ने किया तबादला, फिर से वहीं करा ली पोस्टिंग

    Railhunt News DeskBy Railhunt News DeskApril 25, 2018
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter WhatsApp Telegram Copy Link
    • रेलवे परिचालन विभाग के एक अफसर ने सबको पिलाया पानी
    • लोडिंग फार्म समेत आला अधिकारी भी हो गये बेदम

    कोलकाता. दक्षिण पूर्व रेलवे के एक परिचालन अधिकारी का तबादला एक बड़े उद्योग घराने की उच्च स्तरीय शिकायत के बाद रेलवे बोर्ड द्वारा केंद्रीय खाद्य आपूर्ति मंत्रालय में कर दिए जाने के बावजूद रेलमंत्री के हस्तक्षेप से रिलीव होने के मात्र 10 दिन बाद ही उक्त अधिकारी को उसी जगह, उसी विभाग और उसी रेलवे जोन में फिर से पदस्थापित कर दिया गया. ज्ञातव्य है कि उक्त अधिकारी का यह तबादला जब द.पू.रे. से बाहर 18 साल बाद 8 फरवरी को किया गया था, और जब 5 मार्च को उसे अंततः वहां से रिलीव किया गया था, तब इससे बुरी तरह त्रस्त द.पू.रे. के सभी रेल अधिकारी और लोडिंग करने वाली फर्मों ने बहुत राहत महसूस की थी.

    मगर जैसे ही 15 मार्च को यह अधिकारी उसी जगह, उसी विभाग और उसी रेलवे के अपने चेंबर में पुनः विराजमान हो गया, वैसे ही सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ ही दक्षिण पूर्व रेलवे में लोडिंग करने वाली तमाम फर्मों ने रेलवे में सुधार की सारी उम्मीदें छोड़ दीं. इससे पहले हमारे विश्वसनीय सूत्रों ने रेलवे बोर्ड को उक्त अधिकारी के भ्रष्टाचार के न सिर्फ तमाम सबूत दिए थे, बल्कि जहां-जहां और जिस-जिस दलाल के जरिए यह अधिकारी लोडिंग फर्मों से अवैध उगाही कर रहा था, उनके नाम और संपर्क नंबर भी रेलवे बोर्ड को उपलब्ध कराकर जांच करके खुद संतुष्ट हो लेने को भी कहा था. इसके अलावा सूत्रों ने इस बात से भी आगाह किया था, कि इस अधिकारी को रिलीव करने में जितनी ज्यादा देरी की जाएगी, रेलवे बोर्ड को इसका तबादला रद्द करने के लिए उतना ही ज्यादा दबाव झेलना पड़ेगा. जो कि अंततः सही साबित हुआ.

    हालांकि हमारे विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि इस अधिकारी को अब तक परिचालन से अलग रखकर उससे संबंधित कोई कामकाज नहीं दिया गया है, मगर उसके उसी जगह बैठे रहने से भी लोडिंग फर्मों में पर्याप्त दहशत बनी हुई है. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले हप्ते इस अधिकारी ने खड़कपुर मंडल से लोडिंग करने वाली एक फर्म से कथित तौर पर एक मोटी रकम की मांग की थी, जिसको पूरा नहीं किए जाने पर इस अधिकारी ने मंडल के एक सहायक मंडल परिचालन प्रबंधक को अपनी हड़क में लेकर उसके जरिए उक्त लोडिंग फर्म का रेक रात के 3 बजे लोडिंग साइडिंग में प्लेस करा दिया. बताते हैं कि रात के उस वक्त उक्त फर्म के पास रेक लोड करने की कोई पूर्व तैयारी नहीं थी, जिससे अंततः परेशान होकर उसने आत्म-समर्पण कर दिया.

    इसके साथ ही सूत्रों का कहना है कि इस अधिकारी ने विभाग के दूसरे अधिकारियों के खिलाफ फर्जी शिकायतें करने और करवाने की अपनी पुरानी हरकतें पुनः शुरू कर दी हैं. इस परिप्रेक्ष्य में दक्षिण पूर्व रेलवे के हमारे विजिलेंस सूत्रों ने बताया कि हाल ही में इसके द्वारा दो-तीन पूर्व एवं वर्तमान विभागीय अधिकारियों के खिलाफ फर्जी शिकायतें विजिलेंस को मिली हैं. हालांकि विजिलेंस सूत्रों का यह भी कहना है कि उक्त शिकायतों में किसी शिकायतकर्ता का नाम स्पष्ट नहीं है, तथापि विजिलेंस ने उनकी जांच शुरू कर दी है, जिससे सभी विभागीय अधिकारी भय से कोई काम करने या जरूरी निर्णय लेने से बचने लगे हैं. नाम न उजागर करने कि शर्त पर कोलकाता स्थित कुछ अधिकारियों का कहना है कि ऐसे माहौल में दक्षिण पूर्व रेलवे की लोडिंग और समस्त कार्य-निष्पादन पर काफी बुरा प्रभाव पड़ सकता है.

    अधिकारियों का कहना है कि काबिल और कार्यक्षम अधिकारियों के खिलाफ झूठी शिकायतें करना और करवाना तथा उन्हें अपनी अवैध कमाई के रास्ते से हटाना इस अधिकारी की बहुत पुरानी आदत रही है. उन्होंने बताया कि यह अधिकारी अपने किसी नजदीकी रिश्तेदार के सीबीआई में होने का हथकंडा अपनाकर अपने सभी वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिकारियों को अब तक अपनी गिरफ्त में रखता आया है और इसी दहशत के बल पर इसने अब तक पी. सी. हरनाथ, अहिरवार, रहमान, अखिलेश पांडेय, हरविंदर सिंह और प्रशांत सिंघानिया जैसे कई दक्ष अधिकारियों को अपने रास्ते से हटाने में कामयाब रहा है. बताते हैं कि यह सभी अधिकारी या तो रेलवे बोर्ड अथवा किसी अन्य रेलवे में तबादला लेकर चले गए, या फिर किसी पीएसयू में प्रतिनियुक्ति पर लगे हुए हैं.

    इस संदर्भ में सूत्रों का कहना है कि टाटानगर में कार्यदक्ष एरिया ऑफिसर रहे अखिलेश पांडेय को इस भ्रष्ट अधिकारी ने बतौर सीनियर डीओएम/चक्रधरपुर कुल 13 कांफिडेंसियल लेटर थमाए थे, जबकि प्रशांत सिंघानिया जैसे काबिल अधिकारी को खड़कपुर मंडल के सीनियर डीओएम के पद से हटाने के लिए यह अधिकारी नए-नए ज्वाइन हुए जीएम को भी दिग्भ्रमित करने में कामयाब रहा, जबकि तत्कालीन प्रिंसिपल सीओएम तो इसकी अवैध कमाई में हिस्सेदार होने के नाते इसके सामने हमेशा नतमस्तक ही रहे और यह जो-जैसा कहता था, वैसा ही वह करते थे. बताते हैं कि भारतीय रेल का यह शायद पहला मामला है, जब सिंघानिया की जगह वर्तमान सीनियर डीओएम विनीत कुमार गुप्ता की पोस्टिंग सिर्फ एक कंट्रोल मैसेज के जरिए की गई थी. जब मामला कैट में गया, तब प्रशासन ने कोर्ट के डर से डिप्टी सीपीओ/गजटेड के साथ जोड़तोड़ करके प्लेसमेंट कमेटी की मिनिट्स बदलकर पिछली तारीख में उनका पोस्टिंग आर्डर निकाला था.

    यही नहीं, उक्त अधिकारी ने सिंघानिया जैसे युवा और ईमानदार अधिकारी का भावी कैरियर उसकी 3-4 महीने की एसीआर में ‘नॉट फिट फॉर ऑपरेशन’ लिखकर खराब करने की भी कोशिश की थी. जबकि बतौर डीओएम उसके ही अथक परिश्रम के कारण उस वर्ष खड़कपुर मंडल को ऑपरेटिंग की सर्वश्रेष्ठ कार्यदक्षता शील्ड मिली थी. बताते हैं कि इसी कार्यदक्षता की बदौलत ही सिंघानिया को बाद में वहीँ सीनियर डीओएम बनाया गया था. सूत्रों का कहना है कि सिंघानिया को पूरी साजिश के साथ और योजनाबद्ध तरीके से हटाया गया था, जिसमें तत्कालीन सीओएम सहित कुछ अन्य ट्रैफिक अधिकारी भी शामिल थे, क्योंकि सिंघानिया के रहते खड़कपुर मंडल की लोडिंग फर्मों से उनका ‘कलेक्शन’ लगभग बंद हो गया था.

    जानकारों का कहना है कि उक्त अधिकारी अपने ऐसे सभी जूनियर अधिकारियों का कैरियर तबाह करता रहा है, जो उसका दलाल बनने अथवा उसकी कोटरी में शामिल होने से मना करते रहे हैं. इसी बात के कुछ भुक्तभोगी उपरोक्त अधिकारी हैं, जिन्हें विश्वास में लेकर रेल प्रशासन उपरोक्त तमाम तथ्यों की पुष्टि कर सकता है. उक्त अधिकारी की पुनः उसी जगह पोस्टिंग होने से भयानक अवसाद का शिकार हुए इन अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि जिस दिन उसने उसी जगह फिर से ज्वाइन किया था, उसी दिन यह तय हो गया था कि रेलवे का कुछ नहीं हो सकता. उनका कहना है कि रेलवे बोर्ड में बैठे उच्च अधिकारियों को इतनी भी समझ नहीं है कि जिस अधिकारी को तमाम आरोपों के तहत 18 साल बाद ट्रांसफर किया गया है, उसे पुनः उसी जगह पदस्थ कर दिए जाने से वह पहले की अपेक्षा ज्यादा मजबूत हो जाएगा.

    इन जानकारों का यह भी कहना है कि महीने भर तक रिलीव नहीं होने देकर तत्कालीन रीढ़हीन सीओएम ने तो उसकी भरपूर मदद की ही थी, बल्कि उसकी अवैध कमाई में हिस्सेदार बनकर रेलवे बोर्ड में बैठे कुछ उच्च अधिकारी भी उसकी मदद करते रहे हैं. अधिकारी बताते हैं कि यह भ्रष्ट अधिकारी सीओएम से स्पष्ट कहा करता था कि “सर, ‘कलेक्शन’ नहीं आ रहा है, संबंधित सीनियर डीओएम को तत्काल हटाएं और सीओएम उसकी ‘आज्ञा’ की ‘अवज्ञा’ नहीं कर पाते थे.” उनका यह भी कहना है कि यही वजह रही है कि उक्त ‘भीतरघाती’ अधिकारी अपने समकक्ष और उच्च विभागीय अधिकारियों के निर्णयों को भी रेलवे बोर्ड के माध्यम से अक्सर बदलवाकर उन्हें नीचा दिखाता रहा है. इन जानकारों का यह भी कहना है कि यदि रेल प्रशासन अथवा रेलवे बोर्ड इस संबंध में कोई जांच करता है, तो इन सभी तथ्यों की पुष्टि करने के लिए सभी भुक्तभोगी अधिकारी तैयार हैं.

    विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार केंद्रीय कैबिनेट में शामिल बिहार के एक बड़बोले नेता की सिफारिश पर रेलमंत्री पीयूष गोयल ने उक्त अधिकारी का तबादला रद्द करके उसे उसी रेलवे में उसी जगह, उसी विभाग में पदस्थ करवाया, जबकि रेलवे बोर्ड इसके लिए तैयार नहीं था. सूत्रों का कहना है कि मंत्री को उक्त अधिकारी की समस्त पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी दी गई थी और यह भी कहा गया था कि यदि उसे कोलकाता में ही रखना है, तो पूर्व रेलवे या मेट्रो रेलवे के लिए उसका पोस्टिंग आर्डर जारी किया जा सकता है. तथापि मंत्री की जिद के सामने रेलवे बोर्ड को उक्त अधिकारी के सामने अपनी नाक नीची करके उसे वहीँ पदस्थ करना पड़ा.

    ऐसे में अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के बारे में मंत्री जी जैसा कहते हैं, वास्तव में वैसा करते नहीं हैं. उनका कहना है कि कई केंद्रीय मंत्रियों का रेलवे बोर्ड के दैनंदिन कामकाज में हस्तक्षेप के चलते कोई भी बोर्ड मेंबर विवेकपूर्ण निर्णय लेने की स्थिति में नहीं रह गया है. अपनी इस बात के उदहारण स्वरूप उनका कहना था कि चाहे रेलवे बोर्ड में कैटरिंग छीनने और अधिकारियों की वरिष्ठता एवं कैडर तय करने का मामला हो, कोर में टेंडर्स की कंडीशन बदल दिए जाने का मामला हो, उ. रे. के कुछ भ्रष्ट ट्रैफिक एवं कमर्शियल अधिकारियों का मामला हो, चाहे उ. रे. सहित पूर्वोत्तर रेलवे के कुछ महाभ्रष्ट इंजीनियरिंग अधिकारियों का मामला हो, कुछ जोनल रेलों में चल रही जीएम की मनमानी और ‘सर्विस प्रोवाइडर्स’ के लिए उनका खुला समर्थन हो, सीनियर डीसीएम/भोपाल की मनमानी के सामने प. म. रे. प्रशासन की अकर्मण्यता और घुटने टेक देने का मामला हो, द. रे. में ‘माफिया यूनियन’ के समक्ष समस्त रेल प्रशासन का आत्म-समर्पण हो, उ.म.रे. में डॉक्टरों के सामने प्रशासन का नतमस्तक हो जाना हो, इत्यादि सभी मामलों में न सिर्फ भ्रष्टाचार गहराई तक समाया हुआ है, बल्कि इनमें किसी न किसी केंद्रीय मंत्री अथवा सांसद का भी हस्तक्षेप है.

    ऐसे में रेलमंत्री हों या रेलवे बोर्ड के संबंधित अधिकारीगण, सभी को इस तमाम भ्रष्टाचार और जोड़तोड़ की पूरी जानकारी है और उनकी जानकारी में ही यह सब हो रहा है, तथापि इस खुले भ्रष्टाचार पर उनका कोई नियंत्रण नहीं रह गया है. एक ही जगह 15 साल से ज्यादा समय तक जमे अधिकारियों को दरबदर करने की जो नीति (ट्रांसफर पालिसी-2015) बनाई गई है, भ्रष्ट अधिकारियों की मजबूत लॉबी के सामने उस पर रेलमंत्री और रेलवे बोर्ड दोनों ही अमल नहीं कर रहे हैं. अधिकारियों का बहुत स्पष्ट कहना है कि वे रेलवे के सुधार की सारी उम्मीदें छोड़ चुके हैं, जिनसे इस बारे में बहुत सारी उम्मीदें की गई थीं, वह भी या तो दबाव में हैं अथवा मंत्री जी उन्हें काम नहीं करने दे रहे हैं. रेलवे में चौतरफा सिर्फ दिखावा किया जा रहा है, जमीनी स्तर पर कोई खास प्रगति नहीं हो रही है, जबकि प्रशासन का पूरा भट्ठा बैठ गया है.

    कर्मचारियों की मांगों और उनके कल्याण पर सिर्फ लीपापोती हो रही है, सभी मान्यताप्राप्त संगठनों का सरकार और रेलमंत्री से मोह भंग हो चुका है, रेलवे में चारों तरफ चापलूसों, कामचोरों, दलालों का बोलबाला हो रहा है, जिससे सभी रेल अधिकारी और कर्मचारी निराश हो चुके हैं. ऐसे में रेलवे के सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती है. इस पर तो रेलकर्मियों द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा वह वार्तालाप ही यहां उद्धृत करना शायद ज्यादा समसामयिक होगा कि “सरकार को जिस सरकारी विभाग को बेचना होता है, उसे और उसके कर्मचारियों को सरकार द्वारा पहले खूब बदनाम किया जाता है, फिर यह कहकर उसको बेच दो दिया जाता है कि कर्मचारी निकम्मे हो गए थे, काम नहीं कर रहे थे, विभाग या कंपनी घाटे में चली गई है, इसके उबरने की अब कोई उम्मीद नहीं बची है, इसलिए इसका निजीकरण किया जा रहा है, या इसकी 50-75% हिस्सेदारी बेची जा रही है.” शायद भविष्य में रेलवे का यही हस्र होने वाला है.

    साभार रेलवे समाचार

    se rly
    Share. Facebook Twitter Email Telegram WhatsApp Threads Copy Link
    Previous Articleआरपीएफ हेड कांस्टेबल संतोष त्रिपाठी को डीजी ने किया बर्खास्त
    Next Article 15 लाख रिश्वत लेते राइट्स के जीजीएम को सीबीआई ने दबोचा
    Railhunt News Desk
    • Website
    • Facebook
    • X (Twitter)
    • Instagram

    देश के अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल्स और पत्रकारों का एक ऐसा मंच है, जिसका उद्देश्य रेलवे और परिवहन जगत की खबरों को पूरी विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत करना है।

    Related Posts

    बोर्ड/जोन

    ECR: धनबाद में जीएम डिंपी गर्ग ने कहा – तीसरी और चौथी लाइन बिछने के बाद ही दिल्ली-बेंगलुरु की सीधी ट्रेनें

    October 20, 2026
    बोर्ड/जोन

    RAILWAY BONUS 2026 : रेलकर्मियों को मिलेगा 78 दिन का बोनस, अकाउंट में आने वाले हैं इतने रुपये…

    October 14, 2026
    बोर्ड/जोन

    SER: एशियन गेम्स की गोल्ड जीतने वाली दक्षिण पूर्व रेलवे की मेडलिस्ट सलिमा टेटे, निक्की प्रधान और दीपिका सोरेंग सम्मानित

    October 10, 2026
    Latest Posts

    रेलवे की सुरक्षा पर झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, रेलवे क्रॉसिंग का बैरियर तोड़ना अब गैर-जमानती अपराध

    October 22, 2026

    शव के साथ घंटों इंतजार! 8 घंटे लेट हावड़ा-नई दिल्ली स्पेशल, गूंजे ‘इंडियन रेलवे हाय-हाय’ के नारे

    October 21, 2026

    TATANAGAR से पुरी के बीच बादामपहाड़ होकर चलेगी नई एक्सप्रेस ट्रेन, रेलवे बोर्ड ने दी मंजूरी

    October 21, 2026

    ECR: धनबाद में जीएम डिंपी गर्ग ने कहा – तीसरी और चौथी लाइन बिछने के बाद ही दिल्ली-बेंगलुरु की सीधी ट्रेनें

    October 20, 2026

    ट्रेन यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट: अब काउंटर टिकट पर भी मिलेगा बीमा कवर, 27 अक्टूबर से नया नियम लागू

    October 19, 2026

    रेलवे ट्रैक पर हाथियों का ‘डेरा’, हावड़ा-मुंबई मुख्य मार्ग किया जाम, चार ट्रेनें घंटों खड़ी रही

    October 18, 2026

    दक्षिण पूर्व रेलवे का नया गणित: 7 घंटे का ब्लॉक = 28 घंटे की कछुआ चाल, बंडामुंडा में इंजीनियरों ने रचा इतिहास!

    October 18, 2026

    पुणे जंक्शन पर RPF की साजिश बेनकाब!, यात्री को झूठे केस में फंसाया, कोर्ट ने किया खारिज

    October 17, 2026

    BILASPUR: RPF DG के जाते ही SECR जोन में ध्वस्त हुई व्यवस्था, रणक्षेत्र बना प्लेटफार्म, वेंडरों के दो गुट भिड़े

    October 16, 2026

    चक्रधरपुर रेल मंडल : 22 हजार रेलकर्मियों के खातों में पहुंची बोनस की राशि, यूनियनों की नाकामी पर दिखी नाराजगी

    October 16, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube Telegram
    • About Us
    • Advertisement
    • Write for Us
    • Editorial Policy
    • Privacy
    • Cookies Policy
    • Contact Us
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Join Railhunt Group