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SER : आरपीएफ को लगा कोयले का कलंक, बंडामुंडा से हटाये गये प्रभारी एमके सोना, अब किसकी बारी ?

  • बंड़ामुंडा पोस्ट प्रभारी को कोलकाता तो एक सब इंस्पेक्टर, एक एएसआई समेत पांच को भेजा गया आद्रा
  • भ्रष्टाचार के खिलाफ डीजी की मुहिम को पलीता लगाने वालों पर आयी शामत, एएससी पर किसकी रहमत !

रेलहंट ब्यूरो, राउरकेला

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति लेकर चल रहे आरपीएफ डीजी अरुण कुमार के निशाने पर अनियमितता को लेकर आये अफसर व जवानों पर एक-एक गाज गिरने लगी है. चक्रधरपुर रेलमंडल के अहम आरपीएफ पोस्ट माने जाने वाले राउरकेला व झारसुगुड़ा के बाद अब बंडामुंडा के प्रभारी एमके सोना का तबादला कोलकाता के गार्डेनरीच हेडक्वार्टर क्लेम में कर दिया गया है. जोनल प्रिंसिपल आईजी के दिशा-निर्देश पर चक्रधरपुर मंडल मुख्यालय से 18 फरवरी को जारी दो अलग-अलग आदेश में पोस्ट प्रभारी प्रभारी एमके सोना को जहां कोलकाता मुख्यालय भेजा गया वहीं पोस्ट से सब इंस्पेक्टर एन जामुदा, एएसआई पीके पासवान, हेड कांस्टेबल एमके थापा, डी पात्रा और कांस्टेबल सुनील कुमार का तबादल आद्रा डिवीजन कर दिया गया है. चक्रधरपुर के सहायक आरपीएफ कमांडेंट संजय भगत द्वारा जारी आदेश में वैसे तो तबादलों को प्रशासनिक इंटरेस्ट बताया गया है लेकिन समय से पूर्व एमके सोना समेत अन्य लोगों को हटाये जाने के पीछे बीते माह यहां आयी इंटरनेट विजिलेंस ग्रुप (आईवीजी) की उस जांच रिपोर्ट को बताया जा रहा है जो कोयले की चेारी की जांच के लिए अचानक चक्रधरपुर पहुंची थी. अभी बंडामुंडा का प्रभारी इंस्पेक्टर आरवीपी सिंह को सौंपा गया है.

आरपीएफ इंस्पेक्टर एमके सोना

इंस्पेक्टर आरवीपी सिंह

इससे पहले चक्रधरपुर रेलमंडल में राउरकेला के आरपीएफ पोस्ट प्रभारी सुधीर कुमार, झारसुगुड़ा पोस्ट प्रभारी एलके दास को हटाने की कार्रवाई हो चुकी है. इसमें झारसुगुड़ा में मालगाड़ी बैगन से सैकड़ों बोरी चावल की चोरी और 288 बोरी चावल की रेलवे लाइन से बरामदगी का मामला काफी चर्चा में रहा. आरपीएफ और जीआरपी के बीच जिच में एक बड़े गोलमाल का उद्भभेदन यहां हुआ, मामले में बड़ी कार्रवाई आरपीएफ डीजी अरुण के स्तर पर की गयी जिसमें जोनल पीसीएससी एसके पाढ़ी और चक्रधरपुर मंडल के सीनियर कमांडेंट डीके मोर्या तक का समय से पहले तबादला कर दिया गया. इससे पहले झारसुगुड़ा आरपीएफ प्रभारी एलके दास को निलंबित किया जा चुका है. बंडामुंडा पोस्ट से एमके सोना समेत छह का तबादला प्री-मेच्योर है. जनवरी 2020 में टेंपो में पकड़े कोयले में लोहा रखकर आरपीयूपी केस बनाने का विरोध करने वाली महिला सब इंस्पेक्टर से अनुसंधान वापस लेने का मामला भी चर्चा में रहा था. रेलवे बोर्ड से आयी इंटरनल विजिलेंस ग्रुप की जांच के बाद से ही यह माना जाने लगा था कि बंड़ामुंडा में कोयले की आंच कई लोगों को झुलसा सकती है और आखिरकर वहीं हुआ. यह अलग बात है कि इन लोगों के तबादले को प्रशासनिक इंटरेस्ट बताकर सुविधाओं में कटौती से राहत दे दी गयी है.

यह भी पढ़ें …आरपीएफ : डीजी के निशाने पर आये SER आईजी और CKP सीनियर कमांडेंट हटाये गये

SER जोन में मनमाने तरीके से किये गये तबादलों से लेकर रेलवे संपत्ति की चोरी की घटनाओं में विभागीय अधिकारी व जवानों की संदिग्ध भूमिका के बाद से ही आरपीएफ डीजी अरुण कुमार की नजर चक्रधरपुर रेलमंडल और दक्षिण पूर्व रेलवे जोन पर टिकी हुई है. इन तबादलों के बाद अब आरपीएफ में यह चर्चा जोरों पर है कि अब डीजी के निशाने पर अगला कौन है? अब किसकी बारी है ?

SER जोन में मनमाने तरीके से किये गये तबादलों से लेकर रेलवे संपत्ति की चोरी की घटनाओं में विभागीय अधिकारी व जवानों की संदिग्ध भूमिका के बाद से ही आरपीएफ डीजी अरुण कुमार की नजर चक्रधरपुर रेलमंडल और दक्षिण पूर्व रेलवे जोन पर टिकी हुई है. इन तबादलों के बाद अब आरपीएफ में यह चर्चा जोरों पर है कि अब डीजी के निशाने पर अगला कौन है? अब किसकी बारी है ? इस कड़ी में आरपीएफ महकमे में यह चर्चा आम है कि झारसुगुड़ा, राउरकेला और बंडामुंडा प्रभारियों पर सीधी कार्रवाई के बाद भी यहां तैनात सहायक कमांडेंट के दायित्य को क्यों नजर अंदाज किया जा रहा है? उन पर किसकी रहमत बरस रही है. जबकि तीन पोस्ट के बतौर सुपरविजन सभी घटनाओं के लिए किसी न किसी रूप से सहायक सुरक्षा आयुक्त ही जबावदेह है.

सूत्रों का कहना है कि चावल चोरी के मामले में पकड़ जाने पर सीधे तौर पर जांच अधिकारी के सामने रहमान ने यह बयान दिया कि इस मामले में उसे आरपीएफ से ही सहयोग मिला और वह लंबे समय से यह चल रहा था. उसके बयान को जांच अधिकारी द्वारा रिकॉड किया गया. उससे स्वयं पीसीएससी और कमांडेंट ने पूछताछ की. इसमें यह बात सामने आयी कि वह ‘ तथाकथित नीरज’ के लगातार संपर्क में था और उसके इशारे पर सब कुछ होता रहा. फिलहाल चावल चोरी के मामले में आरपीएफ को उसकी तलाश है जो पूर्व झारसुगुड़ा आरपीएफ पोस्ट प्रभारी का काफी करीबी माना जाता था. जानकार यहां तक बताते हुए कि तथाकथित नीरज की पोस्ट में कभी ऐसी तूती चलती थी कि कौन कहां ड्यूटी करेगा वह भी उसके इशारे पर ही तय होता था. आज उसकी तलाश आरपीएफ टीम कर रही है. ऐसे में बतौर वरीय पदाधिकारी सहायक कमांडेंट की भूमिका को सीधे तौर पर खारिज नहीं किया जा सकता है.

दिलचस्प तथ्य है कि टाटानगर में तैनाती के दौरान पोस्ट प्रभारी एमके सिंह के खिलाफ लगातार कलम चलाने वाले सहायक कमांडेंट ने राउरकेला, झारसुगुड़ा और बंडामुंडा में लगातार हो रही घटनाओं पर भी कभी सख्ती नहीं दिखायी. हां डीजी अरुण कुमार की सख्ती और पीसीएससी व चक्रधरपुर के सीनियर कमांडेंट पर की गयी कार्रवाई का असर जरूर रहा कि बंड़ामुंडा केस में पोस्ट प्रभारी समेत छह पर कलम चलाने में इन महोदाय ने कोई कंजूसी नहीं दिखायी और नतीजा सामने हैं. ऐसा माना जा रहा है कि डीजी के ऑपरेशन क्लीन स्वीप में जोन के अलावा चक्रधरपुर रेलमंडल के कुछ और अधिकारी आ सकते है जो जिन्हें पूर्व आईजी के कार्यकाल में प्रांत व भाषायी आधार पर अहम पोस्ट व पद की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी. इसमें सहायक आयुक्त भी एक हैं. इन अधिकारियों की भूमिका की गोपनीय जांच आईवीजी टीम कर रही है जिसकी रिपोर्ट पर कार्रवाई की दिशा तय होनी है.

चावल चोरी के जिस मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने में लगे 15 दिन, उन्हें चार दिन में ही मिल गयी जमानत

झारसुगुड़ा में मालगाड़ी बैगन से चावल चोरी के चर्चित मामले में आरपीएफ प्रभारी के निलंबन और जोनल पीसीएससी व कमांडेंट के तबादले के बाद से ही नये पीसीएसई डीबी कसार और कमाडेंट ओंकार सिंह समेत पूरी आरपीएफ की टीम ने चोरी के मुख्य सरगना रहमान को पकड़ने में एड़ी-चोटी एक कर दी थी. लंबी कवायद के बाद उसे भद्रक से पकड़ा गया. दिलचस्प है कि जिस आरोपी को पकड़ने में आरपीएफ टीम के पसीने छूट गये उसे अदालत से चार दिन में जमानत मिली गयी और वह जेल से बाहर निकल आया, जांच का विषय बन गया है. चावल चोरी के मामले में अब तक जेल गये सभी छह आरोपी जमानत पर जेल से बाहर आ चुके है. इस मामले में तीन और को 18 फरवरी को ही जेल भेजा गया है. यह माना जा रहा हैकि पूर्व के आरोपियों की तरह उन्हें भी जमानत मिल जायेगी. इस मामले में अब तक मुख्य आरोपी नीरज की गिरफ्तारी नहीं हो सकती है.

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