- 52 सप्ताह में 52 सुधार के संकल्प की दिशा में दो नए सुधारों की घोषणा रेलमंत्री ने की
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और दावा न्यायाधिकरण (ई-आरसीटी) की सुविधा शुरू
- यात्री दुर्घटना या अन्य क्लेम के लिए 24×7 ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे
- रियल-टाइम ट्रैकिंग के जरिए अपने केस की स्थिति जान सकेंगे
NEW DELHI. रेल यात्रियों को यात्रा के दौरान हादसे, अनहोनी घटनाओं अथवा सामान के नुकसान या चोरी आदि के मामलों में क्षतिपूर्ति के दावों के लिए इलेक्ट्रानिक सुविधा मिलेगी जिससे कोई यात्री ऐसे किसी भी मामले में रेलवे दावा न्यायाधिकरण (आसीटी) के समक्ष कहीं से भी दावा कर सकेगा. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को 52 सप्ताह में 52 सुधार के संकल्प की दिशा में दो नए सुधारों की घोषणा की जिसमें रेल यात्रियों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सूचना प्रौद्योगिकी आधारित दावे और निपटान की इलेक्ट्रानिक रेलवे दावा न्यायाधिकरण (ई-आरसीटी) की सुविधा शामिल है.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने e-RCT सिस्टम लॉन्च कर रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल को पूरी तरह डिजिटल बना दिया है. अब यात्री दुर्घटना या अन्य क्लेम के लिए 24×7 ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे और रियल-टाइम ट्रैकिंग के जरिए अपने केस की स्थिति जान सकेंगे.
रेलमंत्री ने आज घोषित दूसरे सुधार के अंतर्गत स्टार्टअप और नवप्रवर्तों को रेलवे के समक्ष यात्री सुरक्षा, संरक्षा, रेल-ट्रैक निगरानी आदि किसी भी महत्वपूर्ण विषय पर प्राद्योगिकी समाधान या विचार प्रस्तुत करने के लिए एक डिजिटल प्लेटफार्म- ‘रेलटेक डिजिटल’ का अनावरण किया. रेल यात्रियों को यात्रा के दौरान घटना-दुर्घटना या रेलवे के साथ किराये अथवा अन्य विवाद के संबंध में कहीं से दावा करने की ई-आरसीटी सुविधा के बारे में वैष्णव ने कहा कि आनलाइन दावे की सुविधा चरणबद्ध तरीके से 12 महीने में आरसीटी की सभी शाखाओं में लागू कर कर दिया जाएगा. इस प्रौद्योगिकी आधारित सुधार से आसीटी के देश भर में सभी 23 शाखाओं को दावों की प्रक्रिया और निस्तारण की डिजटलीकृत सुविधाएं कर दी जाएगी.
इस अवसर पर आरसीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति कंवलजीत सिंह अहलुवालिया भी उपस्थित थे. उन्होंने इस पहल के लिए रेल मंत्री श्री वैष्णव को बधाई दी और कहा कि उनके पास सूचना प्रौद्योगिकी विभाग भी है जिसके चलते यह सुधार तेजी से होने जा रहा है . उनके नेतृत्व की प्रसंसा करते हुए अहलुवालिया ने कहा कि एआई आधारित ईआरसीटी प्रणाली से रेलवे में लंबित दवों का तेजी से सामाधान करने में बड़ी मदद मिलेगी. रेलवे का कहना है कि ई-आरसीटी चौबीसों घंटे ई-फाइलिंग और स्वचालित चेतावी के साथ दावों में तेज़ी, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित डिजिटल प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी.
- ‘रेलटेक’ डिटिटल प्लेटफार्म ‘स्टार्ट द्वारा, स्टार्टअप के लिए खुला मंच” – अश्विनी वैष्ण्व
अश्विनी वैष्ण्व ने ‘रेलटेक’ डिटिटल प्लेटफार्म को को ‘स्टार्ट द्वारा, स्टार्टअप के लिए खुला मंच” बताते हुए कहा कि रेलटेक नीति का मसौदा स्टर्टअप इकाइयों ने ही बना कर दिया था. उन्होंने रेलटेक डिजिटल मंच को बटन दबा कर प्रारंभ करते हुए कहा, “ यह सतत खुला रहेगा. इस वेबसाइट पर आप अपने विचार, प्रौद्योगिकी समाधार कभी भी प्रस्तुत कर सकते हैं.” इससे पहले वैष्णव ने 14 परवरी को देश के विभिन्न हिस्सों में 500 कार्गो टर्मिनल बनाने तथा बिना आरक्षण वाले डिब्बों में आरक्षित डिब्बों की तरह सफाई की व्यवस्था करने की घोषणा की थी.
वैष्णव ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि रेल टेक नीति के तहत एक रेल टेक वेबसाइट बनाई जाएगी, जहां कोई भी नवप्रवर्तक अपना आइडिया सीधे रेल मंत्रालय और सरकार के दो सकेगा. उन्होंने बताया कि यह नीति रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और बायोटेक क्षेत्र की सफल नीतियों से सीख लेकर तैयार की गयी है. पूरी प्रक्रिया डिजिटल और उपभोक्ताओं के अनुकूल होगी. अच्छे सुझावाओं पर रेलवे आगे के काम के लिए 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता देगा. वाणिज्य उपयोग के लिए रेलवे द्वारा चयनित तकनीकी समाधानों के लिए रेलवे बड़े आर्डर प्रस्तुत कर सकती है. इसके अलवा प्रौद्योगिकी विकासकरने वाली इकाइयां प्रौद्योगिकी-उत्पाद का निर्यात भी कर सकेंगी.
रेल मंत्री ने कहा, “उदाहरण के लिए कोई इकाई हाथियों के ट्रैक पर आने के जोखिम की पूर्व सूचना देने वाला एआई आधारित तकनीकी उपाय प्रस्तुत कर सकती है तो कोई ट्रेन के डिब्बों में बिजली की तार गरम होने से आग के खतरे का एआई आधार अलर्ट विकसित कर सकती है. कोई हमें ड्रोन रेल लाइन में फ्रैक्चर की निगरानी करने वाला समाधान दे सकता है.…कुछ स्टार्टअप ऐसे समाधानों पर काम कर रहे हैं….”















































































