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“Economy Meal” रेलवे का नया शगूफा, जनरल क्लास के यात्रियों को 20 रुपये में दिया जायेगा भोजन

  • रेलवे की ”जनता मील ”योजना को पलीता लगा चुके हैं अवैध वेंडर व स्टेशन के स्टॉल संचालक 

रेलवे ने जनरल क्लास के यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए नयी व्यवस्था शुरू की है. इसे “इकोनॉमी मील” का नाम दिया गया है. इसकी कीमत 20 रुपए और 50 रुपए होगी. यह उस ”जनता मील” की तर्ज पर होगी जिसकी व्यवस्था शुरू होने केे बाद से रेलवे में कभी प्रभावी नहीं बनने दिया गया. अब “इकोनॉमी मील” की नयी व्यवस्था कितनी कारगर होगी यह तो समय बतायेगा लेकिन फिलहाल इसके नाम पर बड़ी-बड़ी घोषणाएं की जाने लगी है.

बताया जा रहा है कि लंबी दूरी की ट्रेनों के एसी और स्लीपर क्लास में तो यात्रियों को खाना मिल जाता है लेकिन जनरल कोच के लोगों के लिए इसमें बड़ी परेशानी सामने आती है. इसलिए सस्ते दर पर इन यात्रियों को खाना उपलब्ध कराने के लिए यह व्यवस्था शुरू की जा रही है. रेलवे का दावा है कि इससे जनरल कोच में यात्रा करने वालों को फायदा होगा. इसमें किफायती दर पर 20 रूपए में इकोनॉमी मील (किफायती भोजन) और 50 रूपए में स्नैक्स मील (कॉम्बो भोजन) उपलब्ध कराया जा रहा है.

रेलवे का यह भी दावा है कि गर्मियों में भीड़भाड़ वाली ट्रेनों के जनरल कोचों के सामने काउंटर लगाकर यह खाना यात्रियों को उपलब्ध कराया जा रहा है.  फिलहाल देश भर के 100 रेलवे स्टेशनों पर लगभग 150 इकोनॉमी मील के काउंटर लगाये जाने की बात कही जा रही है. यह सेवा पिछले साल 51 स्टेशनों पर शुरू की गयी थी. उसे अब  विस्तार दिया जा रहा. आने वाले समय में इसे और बढ़ाया जायेगा.

मीडिया रिपाेर्ट के अनुसार पूर्व मध्य रेल के 20 प्रमुख स्टेशनों पर “इकोनॉमी मील” की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है. हालांकि रेलवे की इस पहल का कोई फायदा जेनरल कोच के यात्रियों को नहीं मिल पा रहा है. बताना लाजिमी होगा कि रेलवे में पहले से ”जनता मील” नाम से यात्रियों को फिकायती दर पर भोजन उपलब्ध कराने की योजना संचालित है. इसे रेलवे के हर स्टॉल पर रखा जाना अनिवार्य किया गया है.

लेकिन रेलवे स्टेशन पर अवैध वेंडरों की फौज और स्टॉल संचालन अपनी कमाई के लिए इसे कभी भी स्टॉल पर नहीं रखते. ”जनता मील” की योजना रेलवे में पूरी तरह फ्लाॅप रही है. इस पर रेलवे अधिकारियों का भी कोई ध्यान नहीं रहता. ऐसे में “इकोनॉमी मील” का यह फंडा कितना कारगर होगा यह तो समय बतायेगा  लेकिन यह जरूर है कि इसी के नाम पर रेलवे व आईआरसीटीसी के अधिकारी जरूर अपना हित साधने में कामयाब हो जायेंगे.

Railhunt News Desk
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