कुड़मी आंदोलन से रेलवे का कोई लेना-देना नहीं है लेकिन राजनीति की बिसात पर शनिवार की सुबह न सिर्फ रेलवे को बलि पर चढ़ाया जायेगा बल्कि हजारों की संख्या में ट्रेनों में यात्रा कर रहे यात्रियों को मानसिक और शारीरिक पीड़ा का दंश झेलना तय है. पूर्व के आंदोलन के अनुभव के आधार पर यह कहना सही होगा कि आंदाेलन में ट्रेनें हाईजैक की जायेंगी और लाखों यात्री जिसमें बच्चे-बुजुर्ग और महिलाएं भी होंगी, खाना-पानी को तरस जायेंगे.
- राजनीति की बिसात पर हाईजैक होंगे ट्रेनें, खाना-पानी को तरस जायेंगे हजारों यात्री
- पहले दो घंटे में ही 100 से अधिक ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होने की आशंका
- आंदोलन व्यापक हुआ और समय बढ़ा तो डायवर्ट और रद्द की जा सकती है कई ट्रेनें
KOLKATA/NDLS. कुड़मी आंदोलन से रेलवे का कोई लेना-देना नहीं है लेकिन राजनीति की बिसात पर शनिवार की सुबह न सिर्फ रेलवे को बलि पर चढ़ाया जायेगा बल्कि हजारों की संख्या में ट्रेनों में यात्रा कर रहे यात्रियों को मानसिक और शारीरिक पीड़ा का दंश झेलना तय है. पूर्व के आंदोलन के अनुभव के आधार पर यह कहना सही होगा कि आंदाेलन में ट्रेनें हाईजैक की जायेंगी और लाखों यात्री जिसमें बच्चे-बुजुर्ग और महिलाएं भी होंगी, खाना-पानी को तरस जायेंगी. अब सुबह यह देखने वाली बात होगी कि रेलवे की तैयारी कितनी कारगर होती है.
कुड़मी नेताओं ने तीन राज्यों (झारखंड–बंगाल–ओडशा) में 20 सितंबर की सुबह से “रेल टेका–डहर छेका” आंदोलन की घोषणा की है. रेलवे का दावा है कि उनकी तैयारी पूरी है लेकिन इन सबके बीच हजारों यात्रियों का फंसना, परेशान होना, सरकार को कोसना तय हैं. आंदोलन को लेकर खड़गपुर, चक्रधरपुर, आद्रा आदि रेल मंडल हाई अलर्ट पर हैं. दक्षिण पूर्व रेलवे के 52 स्टेशनों पर सुरक्षा-व्यवस्था बढ़ाने का दावा किया गया है. SER की आरपीएफ टीम पश्चिम बंगाल ओडिशा व झारखंड के मुख्य सचिव, डीजीपी, रेल पुलिस महानिदेशक के साथ समन्वय बनाकर चल रही है.
झारखंड, बंगाल और ओडिशा में आंदोलनकारी शनिवार की सुबह रेलवे ट्रैक पर उतरेंगे. पूर्व का उदाहरण ले तो इसमें व्यापक अवरोध की आशंका जताई जा रही है. रेलवे सूत्रों का ही मानना है कि पहले ही दो घंटे में 100 से अधिक ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होगा. सबसे अधिक प्रभावित हावड़ा-टाटा-मुंबई रेलमार्ग होगा. आपात स्थिति में लंबी दूरी की ट्रेनों को डायवर्ट करने की येाजना है. हालांकि अंतिम निर्णय वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार लिया जायेगा. इसके लिए खड़गपुर, रांची-चक्रधरपुर डिवीजन में नियंत्रण-कक्ष स्थापित किया गया है.
यहां हो सकता है अवरोध
चक्रधरपुर मंडल के गम्हरिया, सीनी, कांड्रा, बृजराजपुर, (मुख्य आंदोलन सोनुवा), मनोहरपुर, जराईकेला और बिसरा, खड़गपुर रेलमंडल में चाकुलिया, गलूडीह और कोकपाड़ा, रांची रेलमंडल में मूरी, टाटीसिलवे, मेसरा, राय, खलारी, बड़काकाना, गोला, जगेेश्वर बिहार, चंद्रपुरा, प्रधानखंटा और पारसनाथ जैसे 40 स्टेशनों पर प्रदर्शन का अनुमान है.
आरपीएफ-जीआरपी-पुलिस अलर्ट
रेलवे और जिला प्रशासन ने आंदोलन को देखते हुए अतिरिक्त बल की तैनाती की है. कई क्षेत्रों में धारा 144 जैसे निषेधाज्ञा प्रावधान लागू किए गए हैं. रांची मंडल ने रीयल-टाइम मॉनिटरिंग शुरू कर दी है और कंट्रोल-रूम से सीधा अलर्ट भेजा जा रहा है. चक्रधरपुर में आरपीएफ और जीआरपी पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं. संभावित स्टेशनों की सूची तैयार कर दी गई है और वहां ड्रोन व सीसीटीवी के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था की जा रही है.



















































































