चेन्नई. रेलवे के सिस्टम में सेंध लगाकर तत्काल आरक्षण निकालने का खेल नया नहीं है. लगातार साफ्टवेयर से जुड़े जानकार आईआरसीटीसी के सिस्टम में सेंध लगाकर रेलवे को को नुकसान पहुंचाते है साथ ही साथ उनके गैरकानूनी कृत्य से हजार जरूरतमंदों आरक्षण से वंचित रह जाते हैं. ऐसे की एक नटवरलाल को दक्षिण रेलवे की आरपीएफ टीम ने पकड़ा है. यह नटवरलाल अनधिकृत आरक्षण ऐप सुपर तत्काल और सुपर तत्काल प्रो बनाकर 20 लाख से अधिक की कमाई कर चुका है. हालांकि रेलवे की सूचना पर गूगल प्ले स्टोर से इस एप का हटा दिया गया है.
एक बेवसाइट पर दी गयी जानकारी के अनुसार इन दोनों ऐप को Google Play Store से एक लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं ने डाउनलोड किया था. बताया गया है कि यह डेवलपर, एस युवराजा, अन्ना विश्वविद्यालय से बीई (वैमानिकी) और आईआईटी खड़गपुर से एम टेक (एरोस्पेस) है. वह तिरुप्पुर जिले के पोठियापलायम का रहने वाला है. सुपर तत्काल और सुपर तत्काल प्रो का इस्तेमाल कर तत्काल टिकट निकाला जाता था.
ऐसा बताया गया है कि डेवलपर ने 2016 और 2020 के बीच इस ऐप से 20 लाख से अधिक कमाई की है. रेलवे सुरक्षा बल इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की है. चेन्नई के आरपीएफ साइबर सेल ने इसकी पहचान में अहम भूमिका निभायी.
इस सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल कर व्यस्त सीजन में दलाल आसानी से तत्काल टिकट हासिल कर लेते थे. ऐसे में तत्काल आरक्षण के लिए रेलवे खिड़की पर लाइन में लगे लोगों का नंबर आने से पूर्व ही तत्काल वेटिंग लिस्ट दिखाने लगता था. इसे लेकर हर दिन रेलवे के आरक्षण काउंटरों पर हंगामा होता था. आरपीएफ की टीम मामले को गंभीरता से जांच का पूरे नेटवर्क का पता लगा रही है.
इससे पहले कोलकाता आधारित एक गिरोह का भी खुलासा तीन माह पूर्व आरपीएफ की टीम ने किया था जो लंबे समय से फर्जी एप के जरीय रेलवे आरक्षण के सिस्टम में सेंध लगाकर रेलवे को चूना लगा रहे थे.
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