BANDAMUNDA. रेलनगरी बंडामुंडा की रेलवे कॉलोनी इन दिनों बदहाली की तस्वीर पेश कर रही है. कभी व्यवस्थित और साफ-सुथरी रही यह कॉलोनी अब जंगल झाड़ में तब्दील हो चुकी है. कॉलोनी के चारों ओर फैले झाड़-झंखाड़ न केवल क्वार्टर और सड़क को ढक चुके हैं बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी को भी मुश्किल बना रहे हैं.
रेल कॉलोनी की अधिकांश सड़कें जर्जर हालत में है. टूटी-फूटी सड़कों पर वाहनों का चलना दूभर हो गया है. वहीं जगह-जगह उगी झाड़ियां कॉलोनी की सड़कों को भी अपनी गिरफ्त में ले चुकी हैं. इन परिस्थितियों में रेलकर्मी और उनके परिवारजन रोजाना कई परेशानियों का सामना कर रहे हैं. कॉलोनी में रहने वाले रेलकर्मी बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं.
ज्यादातर स्ट्रीट लाइट लंबे समय से बंद पड़ी है, जिससे रात के समय अंधेरे में लोगों को आवाजाही करनी पड़ती है. इस कारण सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का खतरा हमेशा बना रहता है.
रेलवे क्वार्टरों की स्थिति भी बेहद खराब है. अधिकांश क्वार्टरों की छत और दीवारें जर्जर हो चुकी हैं. कई जगहों पर तो क्वार्टर रहने लायक भी नहीं बचे हैं. इसी कारण बड़ी संख्या में रेलकर्मी अपने आधिकारिक आवास छोड़कर राउरकेला और आसपास के शहरों में किराए के मकान में रहने लगे हैं.
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि बंडामुंडा रेलवे कॉलोनी की इस दुर्दशा से सभी रेल अधिकारी भलीभांति परिचित हैं. आए दिन बड़े अधिकारियों का आना-जाना यहां लगा रहता है, लेकिन अब तक किसी ने इन समस्याओं को दूर करने का ठोस कदम नहीं उठाया है.
स्थानीय रेलकर्मियों का कहना है कि कॉलोनी की हालत दिन-ब-दिन और खराब होती जा रही है. यदि जल्द ही कॉलोनी में सफाई, सड़क मरम्मत और मूलभूत सुविधाओं की बहाली के लिए कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो जाएगी.
















































































