नई दिल्ली. राजस्थान के जोधपुर में पैदा हुए 51 वर्षीय अश्विनी वैष्णव को केंद्रीय मंत्रीमंडल में जगह मिलने के साथ ही देश के 40 रेलमंत्री के रूप में शपथ दिलायी गयी है. वैष्णव 1994 बैच के ओडिशा कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी रहे हैं. उन्होंने आईआईटी कानपुर से 1994 में एमटेक किया था.
दो साल पहले ओडिशा से भाजपा के टिकट पर राज्यसभा पहुंचने वाले वैष्णव को कई विद्याओं में महारत हासिल है. एक इंजीनियर, सीईओ, आईएएस अधिकारी, उद्यमी और फिर राजनेता के अपने सफर के दौरान उन्होंने कई अहम मोर्चों पर काम किया. उन्हें पीपीपी मॉडल का मास्टर बना जाता है.
वैष्णव ने 2008 में सरकारी नौकरी छोड़ दी और अमेरिका के व्हार्टन स्कूल, पेनीसिल्वेनिया विश्वविद्यालय से एमबीए किया. वापस देश लौटने के बाद कुछ बड़ी कंपनियों में सेवा दी. फिर गुजरात में ऑटो उपकरण की विनिर्माण इकाइयां स्थापित कीं. उन्हें भारतीय प्रेस परिषद का सदस्य भी नामित किया गया था.
मोदी सरकार में अश्विनी वैष्णव को ऐसे समय में बनाया गया जबकि कोरोना संक्रमण के बीच रेलवे की व्यवस्था अस्त-व्यस्त् है. स्पेशल बनाकर चलायी जा रही ट्रेनें यात्रियों को उम्मीदों पर गहरे घाव कर रही है तो लगातार रेलकर्मी संक्रमण के शिकार हो रहे. रेलकर्मियों की उचित मांगों के लिए भी फेडरेशन मंत्रालय की ओर देख रहे हैं. कई जोन में जीएम प्रभार पर चल रहे है. इन चुनौतियों से निबटना वैष्णव की तकनीकी व प्रबंधकीय क्षमता की परीक्षा होगी.
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