- पिछले 22-23 सालों से घूम-फिरकर पूर्व मध्य रेलवे में ही चक्कर लगा रहा एक अधिकारी
- 25-26 सालों में अधिकारी का तीन बार ट्रांसफर, दो बार प्रमोशन और एक बार पनिशमेंट
- साहब की कुछ माह बाद ही पूर्व मध्य रेलवे में वापसी, क्या इनके बिना नहीं चलेगा ECR!
PATNA : पूर्व मध्य रेलवे के लेखा विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग किसी गोलमाल से कम नहीं लेकिन पिछले 5-6 सालों में अगर कुछ कालखंड को छोड़ दिया जाये तो यह बड़े घोटाले के रूप में सामने आया है. पहले तो यह जिसकी लाठी उसकी भैंस की तर्ज पर रेलकर्मियों कार्यों का निष्पादन करता था. कुछ मामले पैसे से सुलझा लिये जाते थे तो बाद के दिनों में यह खेल जात-पात पर आकर ठहर गया.
2025 की शुरुआत में नए PFA के आने के बाद जो ट्रांसफर का नया चेहरा सामने आया. कर्मचारियों और कनिष्ठ अधिकारियों की माने तो अब खास स्थान पर जाने के लिए जात-पात बड़ा आधार बन गया है. हालांकि ट्रांसफर-पोस्टिंग के इस खेल में दूसरे कई फैक्टर भी काम कर रहे. अधिकारियों के स्तर पर तो खेल पैसों का है लेकिन मंडल में जाने का रेट अलग से तय होता है. कुछ मामलों में पुराने संबध भी काम आ रहे.
धनबाद मंडल में एक अधिकारी को तो 03 साल पूरा होते ही तुरंत हटा दिया गया लेकिन एक ऐसे अधिकारी की पोस्टिंग वहां की गयी जिसका एक साल में SAG आने वाला है. हालांकि ऊपर स्तर पर देखने में तो इसमें कोई तकनीकी खामी नजर आती है लेकिन सवाल यह उठने लगा है कि पांच साल से हाजीपुर मुख्यालय में पोस्टेड अधिकारी को इस नियम से बाहर क्यों कर दिया गया? जिस अधिकारी को इनके आका ने बेवजह बदनाम किया उसे कब तक इस तरह से सजा दी जाएगी? एक अधिकारी जिसको झूठे कंप्लेन के आधार पर सोनपुर से समय से पहले हटा दिया गया था, उसे क्यों नहीं पोस्टिंग दी गयी?
सवाल बहुत हैं लेकिन जवाब एक ही है पूरा खेल एक शातिराना अंदाज़ में खेला गया. बहुत चालाकी से बैकवर्ड फॉरवर्ड की बैलेंसिंग की गयी और मनी पावर ने भी खूब काम किया. दानापुर में जिस अधिकारी की पोस्टिंग की गयी वो पहले से मंडल में थे, उनको मंडल से मंडल भेजा गया लेकिन उनसे पहले मंडल या फील्ड में पोस्टेड अधिकारियों को डिवीजन के लायक नहीं समझा गया. कारण तो पीएफए ही बता सकेंगे! यहां चर्चा इस बात की हो रही है कि धनबाद के मामले में एक तीर से दो शिकार किया गया. एक खास जाति की नाराजगी मोल नहीं लेते हुए उसी जाति के एक अधिकारी जो पांच साल से हाजीपुर में है साइडलाइन कर उसी जाति के दूसरे अधिकारी को दानापुर में पोस्टिंग दे दी गयी.
धनबाद में भी वो दो बार पोस्टिंग कर पाएंगे, मतलब डबल इनकम. साहब पूर्व मध्य रेलवे निर्माण संगठन के पुराने खिलाड़ी रहे हैं और पिछले 22-23 साल से पूर्व मध्य रेलवे में ही जमे हुए हैं. दिलचस्प बात यह है कि वह लगभग 9 से 10 साल से लगातार निर्माण संगठन में ही पोस्टेड रहें हैं. यहां चर्चा इस बात की है कि एक जाति विशेष के लोगों से विशेष लगाव रखने वाले निर्माण संगठन में पोस्टेड एक वरीय अधिकारी का ट्रांसफर सिर्फ इसलिए कर दिया कि गया क्यूंकि वह डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर में बाधा बन रहे थे.
पूर्व मध्य रेलवे में आने के बाद 25-26 सालों में इनका कुल तीन बार ट्रांसफर हुआ है दो बार प्रमोशन और एक बार पनिशमेंट में, लेकिन हर बार कुछ माह बाद ही ये वापस आ जाते हैं. ऐसा लगा रहा है कि इनके बिना पूर्व मध्य रेलवे चल ही ना पाएगा . ये पिछले 22-23 सालों से पूर्व मध्य रेलवे में ही हैं. पूर्व मध्य रेलवे के निर्माण संगठन में भ्रष्टाचार के लगातार मामले सामने आ रहे है ऐसे में रेलवे बोर्ड को ऐसे अधिकारियों के बारे में सोचना चाहिए और रिटायरमेंट के नाम पर होम पोस्टिंग की थ्योरी पर भी पुनर्विचार करने की जरूरत है.
अभी कुछ दिनों पहले ही रेलमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था कि वर्ष 2026 के 52 सप्ताह में 52 सुधार करेंगे तो क्या पूर्व मध्य रेलवे के लेखा विभाग में एक कारोबार बन चुके स्थानांतरण घोटाला में भी व्यापक सुधार की दिशा में कोई ईमानदार पहल की विचार करेंगे?
रंजीत मिश्रा, लेखक railwellwishers के संपादक हैं













































































