- 59 महीने बाद महानिदेशक लेखापरीक्षा ने लिया संज्ञान, डिवीजन में चल रहे गोलमाल की खुली पोल
- SSE/P.WAY/DDU South और North की मिलीभगत से हुआ रिस्क एलाउंस का भुगतान
- गलत भुगतान की अनुशंसा करने वाले SSE/P.WAY/DDU की क्यों नहीं तय की गयी जिम्मेदारी !
DDU/PATNA : रेलवे में सेफ्टी कैटेगरी से जुड़े ट्रैकमैनों के दुरुपयोग की खबरें लगातार सुर्खियां बनती रही है. कभी साहब के बंगले पर काम करके तो कभी कार्यालय में बाबू बनाकर इनका उपयोग किया जाता रहा है. यहां तक तो ठीक है लेकिन डीडीयू डिवीजन में कार्यालय में काम करने वाले ट्रैकमैनों को कई माह से “रिस्क और हार्डशिप एलाउंस” का भी भुगतान किया जा रहा था, इस पर अब महानिदेशक लेखापरीक्षा ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कड़ी टिप्पणी की है. हालांकि यह मामला 59 महीने यानी लगभग 05 साल बाद सामने आया है.
अब कार्यालय में काम करके “रिस्क और हार्डशिप एलाउंस” का भी भुगतान लेने वाले 09 ट्रैकमैनों से लगभग 17.92 लाख रुपये वसूली की तैयारियों के बीच यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या इसके लिए सिर्फ ट्रैकमैन ही दोषी है ? भुगतान की अनुशंसा करने वाले SSE/P.WAY/DDU, कार्मिक और लेखा विभाग की इस मामले में कोई जिम्मेदारी नहीं बनती? पांच साल तक महानिदेशक लेखापरीक्षा ने इस मामले में क्यों नहीं संज्ञान लिया? चर्चा तो यहां तक है कि ले-दे के बीच उठे विवाद ने ही मामले को ऊपर तक पहुंचाया और यह स्थिति उत्पन्न हो गयी. जिन 09 ट्रैकमैनों से कार्यालय में काम लेकर हर माह “रिस्क और हार्डशिप एलाउंस” का भुगतान किया जा रहा था वह सभी SSE/P.WAY/DDU South और North के अधीन काम कर रहे थे.
महानिदेशक लेखापरीक्षा की आपत्ति के बाद यह सवाल उठाया जा रहा है कि कार्यालयों में ट्रैकमैनों की सेवा लेने वाले SSE/P.Way/South एवं North ने किस आधार पर “रिस्क और हार्डशिप एलाउंस” की अनुशंसा की? आखिर इन ट्रैकमैनों की ड्यूटी कहां दिखायी जा रही थी? क्योंकि बिना गैंग में ड्यूटी दिखाये “रिस्क और हार्डशिप एलाउंस” देना संभव नहीं है. अब यह जांच का विषय है. कहा तो यहां तक जा रहा कि पूरे भारतीय रेल के लगभग हर डिवीजन में “रिस्क और हार्डशिप एलाउंस” के मद में करोड़ों रुपये रेलकर्मियों के खाते में डालकर उसकी बंदरबांट का खेल चल रहा है.
“रिस्क और हार्डशिप एलाउंस” के लिए सरकार और रेलवे बोर्ड की तय शर्तें
DOPT के पत्र संख्या A-27018/02/2022-Estt.(AL)02.09.2022 के अनुसार केन्द्र सरकार के उन कर्मचारियों को रिस्क एलाउंस दिया जाता है जो खतरनाक कामों में लगे हैं या जिनका काम समय के साथ उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है. वहीं रेलवे बोर्ड के पत्र संख्या 87/2017,PC -Vll No.33 दिनांक 10 अगस्त 2017 के अनुसार भारतीय रेलवे के ट्रैक मेंटेनर्स- l ,ll,lll और lV के लिए भी “रिस्क और हार्डशिप एलाउंस ” का प्रावधान किया गया है.
यह प्रावधान हार्डशिप मैट्रिक्स के सेल R3H2 के अनुसार है. (लेवल 8 और उससे नीचे के लिए 2700/- रूपए और लेवल -9 और उससे ऊपर के लिए 3400/- रूपए) जो कि 01 जुलाई 2017 से लागू हुआ था. साथ ही, रेलवे बोर्ड के पत्र संख्या E (P&A)1- 2017 /SP-1 /AD-1 दिनांक 13.04.2021 (RBE No.30/2021) के अनुसार रिस्क एलाउंस केवल ड्यूटी के वास्तविक समय के लिए ही दिया जाता है और छुट्टी के दौरान इसका भुगतान नहीं किया जाता है.
Sr. DPO/DDU कार्यालय हरकत में आया, खंगाले जा रहे रिकार्ड
“रिस्क और हार्डशिप एलाउंस” मद में गलत भुगतान का मामला सामने आने के बाद Sr. DPO/DDU कार्यालय हरकत में आया है. अब रिकार्ड की जांच की जा रही है. इसमें यह बात सामने आयी है कि SSE/P.WAY/DDU South और North के अधीन गैंग में तैनात कर्मचारियों को अलग-अलग कार्यालयों में और अलग-अलग स्थिर (Stationary) के तहत काम लिया जा रहा था. इन्हें “रिस्क एलाउंस” का लाभ भी दिया जा रहा था. यह स्पष्ट है कि कार्यालय में काम लेकर ट्रैकमैनों को हार्ड शिप एलाउंस का भुगतान किया जाना गलत है लेकिन क्या इसके लिए सिर्फ ट्रैकमैन ही जिम्मेवार है? फिलहाल इसकी गाज उन ट्रैकमैनों पर ही गिरेगी. अब प्रतिमाह उनके वेतन से निर्धारित रकम की कटौती तब तक की जायेगी जब तक हार्ड शिप एलाउंस मद में भुगतान की गयी रकम की भरपाई न हो जाए.
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा.



















































































