- आरपीएफ की चयन प्रणाली सवालों के घेरे में, बड़ा सवाल – क्या विभाग के पास कोई योग्य अफसर नहीं !
- अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार में जोनल शील्ड पाने की सूची एक सप्ताह में ही बदलने पर उठे सवाल
KOLKATA. रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेल, संगठन में अपनी बेहतरीन सेवा और उत्कृष्ट योगदान के लिए 100 कर्मठ कर्मचारियों और अधिकारियों को प्रतिष्ठित 70वें अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार 2025 से शुक्रवार 9 जनवरी 25 को सम्मानित किया. यह सम्मान इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर (यशोभूमि), द्वारका, नई दिल्ली में वितरित किये गये. पुरस्कार पाने वाले सभी रेलकर्मियों (अधिकारी-कर्मचारियों) को रेलहंट की और से बधाई और शुभकामनाएं. यह अवार्ड इस बार कई मामलों को लेकर चर्चा में रहा.
लेकिन बड़ी बात … पुरस्कार वितरण से पहले ही रेलवे बोर्ड स्तर पर बनायी गयी जोनल शील्ड वीनर्स की सूची को लेकर विवाद हो गया. बोर्ड स्तर पर एक सप्ताह में ही जोनल वीनर्स की सूची नये बदलाव के साथ दूसरी बार जारी की गयी. कुछ जोनल रेलवे को वीनर्स में शामिल कर लिया गया तो कुछ को बाहर निकाल दिया गया. इसके बाद खुलआम तौर पर जोनल शील्ड के चयन में भेदभाव के आरोप लगे. चयन में CCC (कास्ट-कैडर-कैश) फार्मूला अपनाये जाने के आरोपों के बीच यह मामला रेलमंत्री और प्रधानमंत्री तक भी पहुंचा.
यह तो रेलवे बोर्ड स्तर पर चल ही गुटबाजी की बात थी, जिसमें कुछ चुनिंदा शील्ड का वितरण रोककर जांच के आदेश दिये गये है. हम बात कर रहे है RPF महकमे की जिसमें इस बार सुरक्षा प्रबंधन, बेहतर सेवा, उत्कृष्ट योगदान के लिए अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार से TATANAGAR आरपीएफ के पूर्व पोस्ट प्रभारी इंस्पेक्टर संजय कुमार तिवारी को पुरस्कृत किया गया. संजय कुमार तिवारी को इस सम्मान के लिए बहुत बधाई. यह न सिर्फ दक्षिण पूर्व रेलवे जोन बल्कि सीकेपी-आद्रा डिवीजन के लिए भी बड़ी उपलब्धि रही है. संजय तिवारी फिलहाल आद्रा डिवीजन के पुरुलिया में पदस्थापित है. जमशेदपुर के एक अखबार ने तो बिना तथ्यों की पड़ताल किये RPF/IPF संजय कुमार तिवारी को ‘रेलवे का रियल हीराे’ तक बना दिया.
ऐसा नहीं है कि इस अवार्ड के लिए खुद को काबिल मानने वाले अन्य लोगों ने लॉबिंग नहीं की,… जरूर की, लेकिन देश भर के दिग्गज/होनहार/काबिल मुंह ताकते रहे गये और अवार्ड SER के संजय कुमार तिवारी ले आये. सहयोगियों में उपलब्धियों ओर कमियों पर चर्चा शुरू हो चुकी है. कहा जा रहा कि अगर आईजी ने निष्पक्षता दिखायी होती तो संजय कुमार तिवारी के कार्यकाल में आरपीएफ पोस्ट, टाटानगर में गंभीर घटनाएं उनकी दर्शायी गयी उपलब्धियों पर भारी पड़ जाती. आरपीएफ के लोग ही चयन के लिए SER/RPF आईजी संजय कुमार मिश्रा से लेकर डीजी कार्यालय की भी भूमिका भी सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे हैं.
TATANAGAR : स्टेशन पर फायरिंग, हत्या, अपहरण, आत्महत्या की घटनाएं, … ‘साहब’ को चाहिए ‘एक्सटेंशन’ !
IFP/RPF संजय कुमार तिवारी के कार्यकाल में टाटानगर स्टेशन पर फायरिंग, हत्या, बच्ची का अपहरण, रेलकर्मी की आत्महत्या, स्टेशन पर अवैध वेंडिंग में अपराधियों की इंट्री, यार्ड में चोरियां जैसी गंभीर घटनाएं तक शामिल है जो उनके टाटानगर में पूरे कार्यकाल और चयन प्रक्रिया को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर देती हैं. अगर पुरुलिया में उनके नाम कोई बड़ी उपलब्धि रही हो जिसने उन्हें अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार तक पहुंचाया तो इसका जबाव SER आईजी कार्यालय ही दे सकता है ? सवाल यह उठाये जा रहे है कि क्या देश भर में आरपीएफ के पास कोई भी ऐसा निष्पक्ष और योग्य अधिकारी नहीं जिसका नाम इस विशेष पुरस्कार के लिए नामित किया जाता अथवा RPF में भी चयन प्रक्रिया CCC से प्रभावित हो गयी !
प्रशासनिक दक्षता के धनी, मधुर व्यवहार !
संजय कुमारी तिवारी की प्रशासनिक दक्षता का लोहा विभाग के लोग भी मानते है. टाटानगर आरपीएफ पोस्ट का कार्यकाल उनके मधुर व्यवहार को लेकर चर्चा में रहा, जहां फायरिंग, हत्या, अपहरण, रेलकर्मी की आत्महत्या, स्टेशन पर अवैध वेंडिंग, यार्ड में चोरियां जैसी गंभीर और बड़ी घटनाएं तक उन्होंने चुटकियों में मैनेज कर ली. उन्हें सिर्फ एक बार चक्रधरपुर से कुछ दिनों के लिए अटैच किया गया. उनके कार्यकाल की बड़ी घटना में रेलकर्मी सुनील पिल्लई की आत्महत्या रही, जिसमें दुकानदार को फेवर करने के लिए इंजीनियरिंग के साथ मिलकर एक्शन लेने का आरोप इंस्पेक्टर संजय तिवारी और उनके खास सब इंस्पेक्टर जीके राय पर लगे. इसमें आरपीएफ को सफाई तक देनी पड़ी.
टाटानगर : सुनील पिल्लई आत्मदाह मामले से टाटानगर आरपीएफ ने झाड़ा पल्ला, प्रेस कांफ्रेंस कर दी सफाई
इस घटना के बाद RPF सब इंस्पेक्टर जीके राय को टाटा से हटा दिया गय था हालांकि जोड़-तोड़ के धनी राय वापसी कराने में कामयाब रहे. यहां जी के राय की चर्चा इसलिए भी जरूरी है कि वह संजय तिवारी के मैनेजमेंट के अहम हिस्सेदार रहे थे.
बड़ी घटनाओं तक पर चर्चा नहीं, अब तक 200 से अधिक X पर ट्वीट
टाटानगर आरपीएफ के बतौर प्रभारी संजय कुमार तिवारी की प्रबंधन क्षमता की चर्चा यहां इसलिए भी जरूरी है कि उनके कार्यकाल में टाटानगर में बड़ी से बड़ी घटनाएं भी सोशल मीडिया या X पर कभी चर्चा का विषय नहीं बनी. हालांकि उनके से जाने के बाद IPF राकेश मोहन की पोस्टिंग से अब तक 200 से अधिक ट्वीट X पर किये जा चुके है. ये सभी ऐसे मामले हैं जो संजय कुमार तिवारी के कार्यकाल में भी संचालित थे, लेकिन उनकी शिकायत कभी नहीं की गयी. फर्जी हेंडल बनाकर लगातार ट्वीट किये जाने का सिलसिला जारी है.
दिलचस्प है कि आरपीएफ महकमा भी समय-संसाधन और पैसे की बर्बादी कर उन शिकायतों पर संज्ञान ले रहा. चर्चा है कि पदस्थापना के बाद इंस्पेक्टर राकेश मोहन ने सबसे पहले संजय कुमार तिवारी के खास रहे सब इंस्पेक्टर जीके राय को टाटा से दूर अटैच कराया. इसके बाद से ही उनकी परेशानी के दिन शुरू हो गये. हालांकि बाद में ऐसी कई घटनाएं इसका कारण बनी लेकिन मूल रूप से इन घटनाओं के पीछे विभागीय लॉबी ही रही. इसमें कुछ अन्य का अटैचमेंट और जवानों की ड्यूटी में भेदभाव का गतिरोध शामिल है. … जारी ..
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा.















































































