- सिग्नल व टेलीकम्यूनिकेशन के दो कर्मचारियों की जिंदगी खतरे में डालने के लिए कौन है जिम्मेदार !
Ahmedabad. रेलवे में सेफ्टी के लाख दावे किये जाये लेकिन अधिकारियों की मनमानी व शॉटकट अपनाने के कारण कई बार रेलकर्मियों की जान पर बन आती है. अहमदाबाद डिवीजन के शाहीबाग केबिन में बुधवार 15 मई 2024 की दोपहर बाद सिग्नल के दो कर्मचारी ओएचई (OHE) की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गये. दोनों को सिविल अस्पताल, अहमदाबाद ले जाया गया, जहां से उन्हें साल हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया. दोनों का गंभीर स्थिति में ICU में इलाज चल रहा है.
इस घटना को पूरी तरह प्रशासन की लापरवाही के रूप में देखा जा रहा है. बताया जाता है कि बिना OHE block लिये ही सिग्नल S-12 को शिफ्ट करने का काम कर्मचारियों से कराया जा रहा था. जबकि इसके लिए बकायदा रेलवे के मैनुअल में सेफ्टी नियम बनाये गये हैं. लेकिन हर बार रेलवे अधिकारी व इंचार्ज मनमानी करते हुए रेलकर्मियों की जान जोखिम में डालने से नहीं कतराते. यही स्थिति बुधवार को दो कर्मचारियों के लिए जानेलवा साबित हुई है जिसका असर पूरे परिवार पर पड़ रहा है.
बताया जा रहा है कि बिना OHE block लिए की काम कराने के कारण ही सिग्नल के दोनों कर्मचारी OHE की चपेट में आ गए. कर्मचारियों के बार – बार अनुरोध करने के बावजूद इंचार्ज सतिश प्रजापति ने OHE block लिए बिना ही काम करने का दबाव बनाया. इसका नतीजा रहा कि दो सिग्नल कर्मचारी OHE की चपेट में आ गए. बताया जाता है कि काम के दौरान रस्सा भी टूट गया था पर कर्मचारियों की बातों को लगातार नजर अंदाज किया गया और टूटे रस्से के भरोसे कर्मचारियों की जान को जोखिम में डाला गया.
मालूम हो कि इससे पहले भी टूटे रस्से की वजह से कुछ ही दिनों पहले दो कर्मचारी घायल हो चुके हैं, इसके बाद भी सतिश प्रजापति ने अपनी मनमानी को लेकर कर्मचारियों की जिंदगी दांव पर लगा दी. इस घटना से सिग्नल कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है और यह बात यूनियन तक भी पहुंचायी गयी है. रेलकमिर्यों का कहना है कि घायल कर्मचारियों को IOD तक नहीं मिलता है, उन्हें लगातार दबाव देकर परेशान किया जाता है. रेल प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गयी है.
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