- लोको पायलटों के ट्रांसफर-पोस्टिंग में DRM के हस्तक्षेप के बाद भी चुनिंदा लोगों को रिलीविंग के नाम पर किया गया उपकृत
- ट्रांसफर आदेश जारी होने के बाद 07 साल से बंद म्यूचुअल ट्रांसफर से SrDEE ने 24 घंटे में छह LP को दी मनचाही पोस्टिंग
- SrDEE (OP) एसके मीणा के प्री-मेच्चोर ट्रांसफर के पीछे पदोन्नति-पोस्टिंग में मनमानी और भ्रष्टाचार के आरोप बने कारण !
CHAKRADHARPUR. चक्रधरपुर रेलमंडल में लोको पायलटों का ट्रांसफर-पोस्टिंग विवाद हर दिन नया रंग ले रहा है. यह विवाद अब अधिकारियों के बीच पावर विकेंद्रीकरण पर जाकर ठहर गया है. डीआरएम तरुण हुरिया ने 150 से अधिक लोको पायलटों के पदोन्नति-पोस्टिंग आदेश को अनियमितता के आरोपों के बाद अपने अधिकार का इस्तेमाल कर पूरी तरह पलट दिया था. डीआरएम के इस आदेश के बाद SrDEE (OP) एसके मीना ने “तू डाल डाल मैं पात पात” की कहावत को चरितार्थ करते हुए अपने अधिकार का प्रयोग कर पिछले दरवाज से चुनिंदा लोको पायलटों को उसी स्थान पर रिलीविंग के नाम पर बुला लिया जहां से DRM/CKP ने उन्हें हटाया. था.
हालांकि चक्रधरपुर डिवीजन में लोको पायलटों के ट्रांसफर-पोस्टिंग विवाद में तब नया मोड़ आया जब अचानक SrDEE (OP) एसके मीणा का प्री-मेच्चोर ट्रांसफर हो गया. इसके लिए प्रमुख कारणों में LP(G) के पदोन्नति-पोस्टिंग में मानमानी और भ्रष्टाचार के आरोप भी शामिल रहे! उन्हें डिवीजन में ही दोबारा SrDEE (TRD) बनाकर भेजे जाने पर भी सवाल उठे. अभी एसके मीना ने नये स्थान पर प्रभार नहीं लिया है.
रिलीज होने का इंतहार कर रहे SrDEE (OP) एसके मीना ने अचानक 20 जनवरी को आनन-फानन में छह लोगों के म्यूचुअल ट्रांसफर की सूची जारी करा दी. इसमें दिलचस्त और बड़ी बात यह रही कि विभाग में पिछले सात साल से म्यूचुअल ट्रांसफर पर रोक है. इसके बावजूद ऐसी क्या जल्दी थी कि 24 घंटे में आवेदन लेकर निष्पादित करते हुए छह लोगों के लिए पोस्टिंग आदेश जारी कर दिये गये? यही कारण है कि अब इस बात की चर्चा हाेने लगी है कि लोको पायलटों के तबादले में डीआरएम के हस्तक्षेप के बावजूद SrDEE (OP) के इस कृत्य ने ट्रांसफर-पोस्टिंग विवाद में भ्रष्टाचार और मनमानी की नयी पटकथा लिख दी है.
डिवीजन में कई लोको पायलटों ने रेलहंट को सीधे तौर पर कॉल कर बताया कि लोको पायलटों के पदोन्नति-पोस्टिंग में बड़े स्तर पर लेन-देन चला है. यह रकम लाखों में हैं. इस कार्य में यूनियन के कुछ नेताओं ने LP की लाइजनिंग सीनियर डीईई से कराने में अहम भूमिका निभायी है. इसका पता नेताओं के संपर्क में रहने वाले चुनिंदा लोको पायलटों की टाटा, बंडामुंडा, चक्रधरपुर, राउरकेला और झारसुगुड़ा मेन लाइन में मनचाही पोस्टिंग से चलता है. बताया गया कि डीआरएम ने जब मामले में हस्तक्षेप कर सबका तबादला ब्रांच लाइन में कर दिया तब सीनियर डीईई (ओपी) भरपाई के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हो गये! इसमें उन्होंने नियम-कानून और वरीयता के साथ JPO समेत दूसरे सेफ्टी मानकों को लांघने से भी गुरेज नहीं किया. यही कारण है कि महकमे में यहां तक चर्चा होने लगी है कि जाते-जाते SrDEE (OP) क्या डीआरएम की “मिट्टी पलीत” कर जायेंगे !
एलआर भी नहीं हुआ, एक दिन में ही रिलीविंग लेकर पुराने स्थान पर आये
विक्षुब्ध लोको पायलटों का कहना है कि डीआरएम के आदेश के बाद चुनिंदा लोगों ने नये स्थान पर एक दिन ही ड्यूटी की. ब्रांच लाइन में एक दिन की औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराने के बाद उन्हें रिलीविंग देकर उसी स्थान पर ले आया गया जहां से उन्हें डीआरएम ने हटाया था. चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पदोन्नति के बाद नए स्थान पर ट्रेन चालकों का एलआर लेना सेफ्टी प्रक्रिया का बड़ा हिस्सा है, लेकिन इन लोको पायलटों ने एलआर की प्रक्रिया तक पूरी नहीं की. इस बीच अचानक छह लोगों की म्यूचुअल ट्रांसफर को स्वीकृत देकर झारसुगुड़ा-बंडामुंडा में स्थानीय पोस्टिंग दे दी गयी. एपीओ की ओर से जारी आदेश में तबादला की स्वीकृति मान्य अधिकारी से होने की बात कही गयी है. इस आदेश ने डीआरएम तरुण हुरिया की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है?
अहम सवाल, जिनके जवाब डीआरएम को तलाशने हैं
- डिवीजन में लोको पायलटों को म्यूचुअल ट्रांसफर सात साल से बंद हैं, तब
- आनन-फानन में चुनिंदा छह LP को म्यूचुअल ट्रांसफर देने की जरूरत क्यों पड़ी ?
- 24 घंटे में ट्रांसफर के आवेदन लेकर निष्पादित करने के पीछे की मजबूरी क्या थी ?
- SrDEE (OP) का तबादला हो चुका है, तब उन्होंने विवादास्पद ट्रांसफर क्यों किया ?
- क्या सेफ्टी को लेकर गठित JPO के दिशानिर्देशों को तबादलों में दरकिनार किया गया?
- क्या रिलीविंग और म्यूचुअल के मामलों में रोटेशनल ट्रांसफर नीति का पालन नहीं हुआ ?
- ट्रांसफर-पोस्टिंग में भ्रष्टाचार की विजिलेंस जांच की अनुशंसा डीआरएम ने क्यों नहीं की?
रेलहंट ने डीआरएम तक पहुंचाया मामला, आनन-फानन में रिलीविंग आदेश रद्द किये गये
रेलहंट ने DRM के सामने SrDEE(OP) द्वारा ALP से LP(G) बने चुनिंदा LP को पहले रिलीविंग फिर Mutual transfer के नाम पर मनचाही पोस्टिंग देने का मामला उठाया था. इसमें यह बात रखी गयी कि संरक्षा मानकों का इस तरह उल्लंघन कर अगर ट्रांसफर-पोस्टिंग दी जायेगी तो SAFTY को लेकर बने JPO की गाइडलाइन के क्या मायनें होंगे.! बताया जाता है कि डीआरएम ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और आनन-फानन में रिलीविंग में भेजे गये लोको पायलटों को ब्रांच लाइन में भेजने का काम शुरू हो गया है. हालांकि अब तक झारसुगुड़ा-बंडामुंडा में म्यूचुअल ट्रांसफर के द्वारा दिये गये पोस्टिंग आदेश को रद्द नहीं किया गया है.
मान्यता प्राप्त रेलवे मेंस यूनियन में ही मचा घमसान, दो धड़े में बंट गये नेता
लोको पायलटों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का विवाद चक्रधरपुर डिवीजन में फिलहाल हॉट केक मैटर बना हुआ है. यह न सिर्फ रनिंग ब्रांच में चर्चा का विषय है वरन इसे लेकर मान्यता प्राप्त रेलवे मेंस यूनियन में भी आंदरुनी कलह तेज हो गयी है. मंडल संयोजक एमके सिंह का विरोध गुट इसे सीधे-सीधे भ्रष्टाचार से जोड़कर देख रहा. यूनियन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं. मालूम हो कि यूनियन के मंडल संयोजक एमके सिंह रनिंग ब्रांच के कर्मचारी और स्वयं लोको पायलट हैं. वहीं रनिंग ब्रांच का अध्यक्ष एआर राय हैं. ये लोग सैकड़ों लोको पायलटों का प्रतिनिधित्व करते हैं. ऐसे में इस बात की भी चर्चा है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग में भेदभाव के आरोपों पर दोनों नेताओं का मौन पूरे यूनियन को कटघरे में खड़ा कर रहा है… जारी
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा.













































































