- ECR/DNR में RMPU टेंडर मिस-मैनेजमेंट को लेकर हो रही थी किरकिरी, पहला ट्रांसफर रद्द हो गया था
- RDSO-approved OEM(s) को तकनीकी बिड में डिस्क्वालिफाई करने की जांच लटकाने के लगे आरोप
- आरके चौधरी के जाते ही कार्यकाल में गड़बड़ी वाले दफन किये गये टेंडरों की फाइल खुलने की जगी उम्मीद
PATNA. पूर्व मध्य रेलवे (ECR) में प्रमुख मुख्य विद्युत अभियंता आरके चौधरी को आखिरकार जाना पड़ा. पहली बार तीन माह के बाद उनका तबादला रद्द हो गया था. दूसरी बार उनका तबादला दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) में उसी पद पर किया गया. पहली बार आदेश जारी होने के तीन माह तक आरके चौधरी ECR में जमे रहे. दिलचस्प यह रहा कि रेलवे बोर्ड के तबादला आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने में ECR/GM छत्रसाल सिंह तक ने रुचि नहीं दिखायी! विभाग के अपुष्ट सूत्रों का कहना है कि दूसरी बार भी आरके चौधरी ने दिल्ली की दौड़ लगायी लेकिन इस बार उनकी ‘गणेश परिक्रमा’ काम नहीं आयी और थक हारकर बीते 08 जनवरी को पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के प्रमुख मुख्य यांत्रिक अभियंता को अपना पदभार सौंपकर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे चले गये.
ECR : करोड़ों के टेंडर मिस-मैनेजमेंट के बीच PCEE का दूसरी बार तबादला, चौकड़ी की बेचैनी बढ़ी !
पूर्व मध्य रेलवे में बतौर प्रमुख मुख्य यांत्रिक अभियंता आरके चौधरी का कार्यकाल कई मामलों को लेकर विवादों में रहा. बार-बार तबादला आदेश बदलने से लेकर टेंडर गड़बड़ी पर सख्ती नहीं दिखाकर खास एजेंसियों को सहयोग करने के आरोप लगे. हाल के महीनों में दानापुर डिवीजन में 31 करोड़ के टेंडर में RDSO एप्रुव कंपनियों के टर्मिनेशन की शिकायत पर PCEE चौधरी और GM का मौन काफी चर्चा में रहा. आरोप लगे कि दानापुर डिवीजन के विद्युत विभाग ने रेलवे बोर्ड की गाइड-लाइन और यात्रियों की सुरक्षा को किया दरकिनार कर टेंडर का निष्पादन किया. टेंडर एलएचबी कोचों के आरएमपीयू रख-रखाव का था. यात्रियों की सुरक्षा से सीधे जुड़े इस टेंडर की गड़बड़ी को लेकर शिकायत पर पूर्व PCEE ने मौन साधकर एक चुनिंदा एजेंसी को एक तरह से फायदा पहुंचाने का ही प्रयास किया.
हालांकि दिलचस्प बात यह रही कि निविदा संख्या EL-50-DNR-OPEN-45/2024-25 में अनियमितता के आरोपों के बीच टेंडर कमेटी में शामिल Sr DEE (G) शिवेंद्र कुमार का प्रीमेच्योर ट्रांसफर कर दिया गया. उन्होंने डिवीजन में 07.02.2024 को ही प्रभार लिया था और 13.10.2025 को उन्हें चलता कर दिया गया. Sr DEE (G) शिवेंद्र कुमार के तबादले को इसी टेंडर से जोड़कर देखा जा रहा है. कहा तो यहां तक गया कि भ्रष्टाचार से सीधे जुड़े इस मामले में शिवेंद्र को विदाई नहीं बल्कि PCEE ने आसान रिहाई दे दी ! PCEE आरके चाैधरी के बाद अब यह माना जा रहा है कि टेंडर की गड़बड़ी के लिए कमेटी में शामिल Sr DSTE और Sr DFM ही अंतिम मोहरा बचे हैं. चर्चा तो यहां तक है कि अगर नये PCEE ने निष्पक्षता दिखायी तो आने वाले समय में आरके चौधरी के कार्यकाल में गड़बड़ी वाली फाइलें कई अधिकारियों के लिए परेशानी का सबब बन सकती हैं.
तबादला आदेश हुआ रद्द, दूसरी बार तबादले के बाद भी तीन माह जमे रहे
PCEE आरके चौधरी को पहली बार रेलवे बोर्ड ने 04.09.2025 को CAO/GLP के पद पर तबादला किया. यहां पदस्थापित मनीष कुमार को उनकी जगह PCEE बनाया गया था. हालांकि दोनों अपने मूल स्थान से रिलीज नहीं हुए और ठीक तीन माह बाद 04.12.2025 को तबादला आदेश रद्द हो गये. आरके चौधरी का दूसरी बार 11.12.2025 को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के PCEE के पद पर ट्रांसफर किया गया. वहीं राजीव कुमार वर्णवाल को PCEE/ECR बनाये जाने के आदेश जारी किये गये. तीन माह तक आरके चौधरी रिलीज नहीं हुए. सवाल यह उठाया जा रहा है कि तबादले के तीन माह बाद तक स्थानांतरण आदेश का क्रियान्वयन क्यों नहीं कराया गया? तीन माह बाद इसे रद्द क्यों कर दिया गया? आखिर रेलवे बोर्ड की इस कुव्यवस्था को क्या कहा जायेगा?
तीन बार की दिल्ली यात्रा … तो क्या इस बार नहीं बनी बात !
करोड़ों के टेंडर मिस-मैनेजमेंट के बीच PCEE का दूसरी बार रेलवे बोर्ड से तबादला आदेश जारी होने की खबर को रेलहंट ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था. यह बात रेलवे बोर्ड और रेलमंत्री तक पहुंचायी गयी. तब भी रेलकर्मियों के बीच चल रही चर्चाओं को केंद्रीत करते हुए आशंका जतायी गयी थी कि जोड़-तोड़ का खेल जारी है ! चर्चा तो यहां तक होने लगी कि क्या इस बार भी तबादला आदेश रद्द होगा ? अपुष्ट सूत्रों के अनुसार साहब ने तीन-तीन बार दिल्ली की यात्रा की. लेकिन शायद बात नहीं बनी. एक माह बाद आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराते हुए आरके चौधरी 08 जनवरी को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के लिए रिलीज हो गये.
आने वाले PCEE पर नजर.. नया संयोग बनाने में जुट गया SSE
पूर्व मध्य रेलवे के विद्युत विभाग में करोड़ों के टेंडर मिस-मैनेजमेंट के बीच पीसीईई आरके चौधरी की विदाई होते ही नीचे से ऊपर तक की चौकड़ी में शामिल लोगों की बेचैनी बढ़ गयी है. सबसे अधिक बेचैनी दानापुर डिवीजन में देखी जा रही है. जहां RDSO एप्रुव कंपनियों के टर्मिनेशन वाली 31 करोड़ के टेंडर की फाइल है. यहां Sr DEE (G) शिवेंद्र कुमार को तो हटाया जा चुका है लेकिन अब कुछ आरोपियों पर कार्रवाई और गलत टेंडर को रद्द करने की उम्मीद लिये अब भी RDSO-approved OEM(s) शिकायत कर इंतजार कर रहे. अब नजरें नये प्रमुख मुख्य विद्युत अभियंता पर है. डिवीजन का तथाकथित करोड़पति एसएसई नये PCEE से लामबंदी की जुगत में जुट गया है… जारी
ECR : दानापुर डिवीजन ने जिस एजेंसी को किया टर्मिनेट उसे सोनपुर में मिला टेंडर …कैसे ! नया खुलासा जल्द …
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा.














































































