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हर साल दो दर्जन से अधिक S&T कर्मचारी फेलियर-अनुरक्षण में गवां देते है जान

  • कोटा में संकेत एवं दूरसंचार विभाग के राष्ट्रीय संरक्षा सम्मेलन सह वार्षिक आम सभा में उठी नाईट फेलियर गैंग व रिस्क अलाउंस की मांग
  • कर्मचारी के मानसिक व शारीरिक शोषण पर मेंटेनर्स यूनियन के महामंत्री ने जतायी चिंता, कहा- गाजर-मूली की भांति कट रहे कर्मचारी
  • रात में आने वाले कॉल से परिवार दहशत में आ जाता है, जैसे ड्यूटी ने किसी युद्ध में जा रहा हो परिवार का मुखिया : आलोक चंद

नई दिल्ली. हर साल दो दर्जन से अधिक S&T कर्मचारी फेलियर या अनुरक्षण के दौरान अथवा किसी दुर्घटना में जान गवां देते है. कर्मचारियों का लगातार मानसिक व शारीरिक शोषण हो रहा. नींद पूरी नहीं होने से कई कर्मचारी मानसिक रूप से बीमार होने की स्थिति में पहुंच गये है. कार्य में लगातार जोखिम बना हुआ है पर रेल प्रशासन रिस्क अलाउंस को लेकर गंभीर नहीं दिखता है. कर्मचारी भारी मानसिक व शारीरिक दबाव में है. कर्मचारियों का परिवार दहशत में है. रात में आने वाला हर टेलीफोन कॉल ऐसा महसूस कराता है मानो परिवार का मुखिया ड्यूटी पर नहीं कोई युद्ध पर जा रहा हो.

गुरुवार 28 मार्च को कोटा में आयोजित भारतीय रेलवे संकेत एवं दूरसंचार अनुरक्षक संघ की वाषिक आम सभा सह राष्ट्रीय सुरक्षा सेमिनार में महामंत्री आलोक चंद्र प्रकाश ने तथ्यों के साथ सिग्नल व टेलीकम्यूनिकेशन कर्मचारियों की स्थिति बयां की तो सहयोगी हतप्रभ रह गये. सभा में भारतीय रेलवे में संकेत एवं दूरसंचार विभाग की अहम भूमिका पर गंभीरता से विचार मंथन किया गया. भारतीय रेलवे संकेत एवं दूरसंचार अनुरक्षक संघ “Indian Railways S&T Maintainers’ Union”(IRSTMU) द्वारा आयोजित समारोह में महामंत्री आलोक चन्द्र प्रकाश ने बताया कि रेलवे में संरक्षा एवं सुरक्षा की दृष्टि से संकेत एवं दूरसंचार विभाग की अहम भूमिका है. संकेत एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारी आए-दिन गाजर-मूली की भांति कट रहे हैं, सड़क दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं तथा लोकल पब्लिक द्वारा पीट-पीट कर हत्या कर दी जा रही है. अत्यधिक मानसिक तनाव में आत्महत्या तक कर ले रहे. कई तो नौकरी छोड़ कर भाग जा रहे हैं.

S&T कर्मचारियों को Risk Allowance दिया जाना चाहिए. यह उनका अधिकार है तथा नाईट फेलियर गैंग के लिए नए पदों का सृजन किया जाना चाहिए.

जेपी मीना, Dy CSTE, कोटा

उन्होंने बताया कि वास्तविकता यह है कि जब सिगनल रात में फेल होता है तब उसे ठीक करने के लिए भी वही संकेत एवं दूरसंचार विभाग का कर्मचारी बुलाया जाता है जो दिनभर कड़ी मेहनत कर उपकरणों का अनुरक्षण तथा रखरखाव करता है. दिन में कड़ी मेहनत और रात में सिगनल फेल होने पर अचानक फोन कर बुलाये जाने से कर्मचारी को आपेक्षित आराम नहीं मिल पाता. नींद पूरी नहीं होने से वह मानसिक दबाव में होता है. इसका असर कर्मचारियों के परिवार पर भी पड़ता है. रात में आने वाला एक कॉल पूरे परिवार की नींद उड़ा देता है. आलम यह है कि रात में आने वाले कॉल से परिवार के लोग ऐसे दहशत में आ जाते है जैसे परिवार का मुखिया किसी युद्ध में जा रहा हो. इन सबके बावजूद संकेत एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों को Risk Allowance से वंचित कर रखा गया है. ड्यूटी के अतिरिक्त कभी भी S&T उपकरणों के फेल होने पर संकेत एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारी तत्परता से S&T उपकरणों के फेलियर को सही करने के लिए 24 घंटे तैयार रहते है.

सम्मेलन में S&T कर्मचारियों ने उनकी तत्परता तथा कार्य के प्रति लगन एवं उनके कार्य में निहित रिस्क को देखते हुए बेसिक का 10% S&T कर्मचारियों को Risk Allowance के तौर पर दिया जाना सुनिश्चित किया करने की आवाज बुलंद की. हर यूनिट में नाईट फेलियर गैंग की स्थापना Railway Board Letter No.: 2015/Sig./E/Non Gaz./1; दिनांकः 23.08.2016 के अनुसार किया जाना सुनिश्चित करने की मांग भी सम्मेलन में प्रस्ताव पारित कर रेलवे बोर्ड से की गयी. सभा को Dy CSTE, कोटा जेपी. मीना ने संबोधित करते हुए कहा कि S&T कर्मचारियों को Risk Allowance दिया जाना चाहिए. यह उनका अधिकार है तथा नाईट फेलियर गैंग के लिए नए पदों का सृजन किया जाना चाहिए. सभा में ADSTE, कोटा एसके. पाठक भी उपस्थित हुए. सभा को मुख्य रुप से S.S.E. (सिगनल) राजीव सक्सेना, S.S.E. (सिगनल) असलम खान, अब्बास अली, इस्माईल भाई, संजय गोयल, महबूब संधी तथा कई अन्य गणमान्य अतिथियों ने संबोधित किया.संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन कुमार ने कहा बताया कि सम्मेलन में लगभग 325 सदस्यों ने भाग लेकर सम्मेलन को सफल बनाएं.

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