- रेलवे के दो होटलों को आईआरसीटीसी को देने और होटलों की देखभाल के लिए टेंडर जारी करने का मामला
- ईडी ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी समेत 16 लोगों को आरोपित बनाया है
NEW DELHI. रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले जमीन लेने के आरोपों से जुड़ा ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत में पूर्व रेल मंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी व पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव सहित कुल 41 पर आरोप तय हो चुके हैं. इसमें रेलवे की ग्रुप-डी नौकरियों के बदले बिहार में कीमती जमीनें कौड़ियों के भाव लालू परिवार के नाम कराने का आरोप है.
लैंब फॉर जाॅब मामले में हाथ-पैर मार रहे लालू परिवार के सामने नयी मुश्किल रेलवे टेंडर घोटाले के रूप में सामने आयी है. लालू यादव और तेजस्वी यादव ने दिल्ली उच्च न्यायालय से ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने से पहले जरुरी अनुमति नहीं लिये जाने की दलील दी है. लालू यादव और तेजस्वी यादव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष ये दलीलें रखीं. मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी.
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सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि सीबीआई ने इस मामले में दो लेनदेन की जांच करने में लापरवाही की जो भ्रष्टाचार निरोधक कानून के दायरे में नहीं आता. ये दोनों लेनदेन सरकारी नीति के तहत किए गए थे. ऐसे में उन लेनदेन को भ्रष्टाचार निरोधक कानून के दायरे में नहीं रखा जा सकता है. बता दें कि 6 जनवरी को कोर्ट ने तेजस्वी यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई को नोटिस जारी किया था. लालू यादव की याचिका पर 5 जनवरी को नोटिस किया गया था.
13 अक्टूबर को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय कर दिया था. कोर्ट ने तीनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 428, 120बी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(2) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था.
ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान लालू यादव की ओर से पेश वकील मनिंदर सिंह ने कहा था कि अभियोजन चलाने के लिए कोई साक्ष्य नहीं है, ऐसे में अनुमति की वैधता सवालों के घेरे में है. उन्होंने कहा था कि पहले सीबीआई ने कहा कि लालू यादव के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए अनुमति की कोई जरुरत नहीं है. उसके बाद सीबीआई ने कहा कि उन्हें अभियोजन चलाने के लिए अनुमति मिल गई है. ये कानून सम्मत नहीं है.
लालू यादव की दलीलों का विरोध करते हुए सीबीआई ने कहा था कि आरोपितों के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पुख्ता सबूत हैं. 28 जनवरी 2019 को ट्रायल कोर्ट ने ईडी की ओर से दर्ज केस में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को नियमित जमानत दी थी. कोर्ट ने एक-एक लाख रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी थी. 19 जनवरी 2019 को कोर्ट ने सीबीआई की ओर से दर्ज केस में लालू यादव को नियमित जमानत दी थी.
कोर्ट ने 17 सितंबर 2018 को ईडी की ओर से दायर चार्जशीट पर संज्ञान लिया था. इस मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी समेत 16 लोगों को आरोपित बनाया गया है. ईडी ने जिन्हें आरोपित बनाया है उनमें लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मेसर्स लारा प्रोजेक्ट एलएलपी, सरला गुप्ता, प्रेमचंद गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, मेसर्स सुजाता होटल, विनय कोचर, विजय कोचर, राजीव कुमार रेलान और मेसर्स अभिषेक फाइनेंस प्राईवेट लिमिटेड शामिल हैं.
लालू यादव पर आरोप है कि उन्होंने रेलमंत्री रहते हुए रेलवे के दो होटलों को आईआरसीटीसी को ट्रांसफर किया और होटलों की देखभाल के लिए टेंडर जारी किये थे. रांची और पुरी के दो होटलों का आवंटन कोचर बंधु की कंपनी सुजाता होटल को ट्रांसफर कर दिया था.
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