- सीबीआई ने SrDCM का मोबाइल जब्त किया, तमाम बिंदुओं पर जांच एजेंसी कर रही पड़ताल
- मार्च क्लोजिंग के नाम पर रोक दी गयी हैं कर्मचारियों की छुट्टियां, भारी तनाव में चल रहे हैं चेकिंग स्टॉफ
- एक एसीएम ने तो टकराव और मानसिक दबाव के बाद असमय करवा लिया था अपना तबादला
RANCHI. दक्षिण पूर्व रेलवे के रांची डिवीजन में सीबीआई धमक का साइड इफेक्ट 24 घंटे में ही नजर आया है. रेल प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से यहां की सीनियर डीसीएम शुचि सिंह को हटा दिया है. शुची सिंह को (RCT/RNC) रेलवे क्लेम ट्रेब्यूनल में भेजा गया है. उनकी जगह श्रीमती श्रेया सिंह को तत्काल प्रभाव से रांची सीनियर डीसीएम का प्रभार लेने के आदेश जारी कर दिये गये हैं. श्रेया सिंह और शुची सिंह एक ही बैच की IRTS अधिकारी है. श्रेया सिंह इससे पहले रांची में ही सीनियर डीओएम रह चुकी है. शुचि सिंह मार्च 2025 में ही रांची रेलमंडल की सीनियर डीसीएम बनी थी.
सीबीआई ने बुधवार को ही सीनियर डीसीएम कार्यालय में छापेमारी कर CCI हिमांशु शेखर के 50 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था. इस मामले में शुची सिंह का भी नाम आया है! सीबीआई ने उनका मोबाइल जब्त कर लिया और तमाम बिंदुओं पर जांच की जा रही है. इस मामले विवाद बढ़ता देखकर रेल प्रशासन ने सीनियर डीसीएम शुची सिंह को तत्काल पद से हटाने का आदेश जारी कर दिया. शुची सिंह की पदस्थापना के बाद से ही उनकी कार्य प्रणाली को लेकर सहयोगी रेलकर्मी काफी तनाव में रहने की बात कहते हैं. एक एसीएम ने तो सीनियर डीसीएम से टकराव और भारी मानसिक तनाव का हवाला देकर बकायदा रेल प्रशासन को अनुरोध देकर अपना असमय तबादला तक करा लिया था.

वहीं रेलवे वाणिज्य विभाग के कर्मचारियों ने रेलहंट को बताया कि सीनियर डीसीएम की कार्यप्रणाली से वह मानसिक रूप से काफी तनाव में हैं. चेकिंग कर्मचारियों के अवकाश को मार्च क्लोजिंग के नाम पर रोक दिया गया था. रेलकर्मियों को सप्ताहिक अवकाश तक नहीं दिया जा रहा था. उनसे साप्ताहिक अवकाश में भी काम लिया जा रहा है और भविष्य में मिलने वाले अवकाश की भी कोई गारंटी नहीं दी जा रही. राजस्व बढ़ाने के नाम पर स्टेशन में प्रवेश करने से पहले ही यात्रियों को बिना टिकट बताकर बतौर जुर्माना वसूलकर स्लीपर का टिकट बना दिया जा रहा. यह कृत्य रांची और हटिया स्टेशन से खुलने वाली लंबी दूरी की अहम ट्रेनों में लगातार किया जा रहा था. इस तरह स्क्वायड के कई लोगों का राजस्व आकड़ा करोड़ों में पहुंच गया. इस मामले को रेल यूजर्स संगठन ने सबूत के साथ उठाया था लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ती में चला गया.
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रेलकर्मियों की माने तो राजस्व बढ़ाने के नाम पर सीनियर डीसीएम ने कई ऐसे आदेश दिये जो नियम के अनुसार उचित नहीं थे लेकिन मजबूरी में यह काम करना पड़ रहा. इसमें आम यात्रियों को पकड़ने के बाद एमएसटी बनाना तक शामिल है. अब सीनियर डीसीएम शुची सिंह के कार्यकाल में कराये गये दूसरे कार्यों की भी जांच की मांग शुरू हो गयी है. कहा जा रहा है कि सीआरएस फंड से मिलने वाले एसी को रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधा की जगह कार्यालय में लगा दिया गया है! फिलहाल शुची सिंह के तबादले की सूचना ने प्रताड़ित महसूस कर रहे रेलकर्मियों में राहत महसूस करा रही है.



















































































