- सीनियर डीओएम (को-ऑर्डिशन)/सीकेपी अविनाश को Dy. CCM/FM/GRC बनाया गया है
- मनीष पाठक की जगह Dy. CEE/Project अजय कुमार को बनाये गये GM/SER के सचिव
KOLKATA. दक्षिण पूर्व रेलवे के जीएम अनिल कुमार मिश्रा की सेवानिवृत्ति से ठीक पहले मनीष कुमार पाठक की चक्रधरपुर रेलमंडल में वापसी का रास्ता प्रशस्त हो गया है. मनीष कुमार पाठक पहले चक्रधरपुर डिवीजन में सीनियर डीसीएम रह चुके है. फिलहाल वह जीएम अनिल कुमार मिश्रा की सचिव का पद संभाल रहे थे. मनीष कुमार पाठक को चक्रधरपुर डिवीजन का सीनियर डीओएम (को-ऑर्डिशन) Sr. DOM(Co-ord)/CKР बनाये जाने का आदेश बुधवार को जारी किया गया. वहीं मनीष पाठक की जगह Dy. CEE/Project अजय कुमार को जीएम का नया सचिव बनाया गया है.
मनीष कुमार पाठक को ऐसे समय में चक्रधरपुर डिवीजन में Sr. DOM(Co-ord) का दायित्व मिल रहा है जब डिवीजन में ट्रेन परिचालन व्यवस्था पर लगातार सवाल उठाये जा रहे. यात्री ट्रेनें घंटों विलंब से चल रही है. रेल प्रशासन पर मालगाड़ियों को चलाने के लिए यात्री ट्रेनों की उपेक्षा का आरोप लगा रहा है. सांसद-विधायक मामले को लगातार उठा रहे. मामला रेलवे बोर्ड तक पहुंच गया है. आलम यह है कि चक्रधरपुर डिवीजन #LATE_DIV_CKP” के रूप में ट्रेंड कर रहा. ऐसे में मनीष कुमार पाठक के सामने सबसे बड़ी चुनौती डिवीजन में माल परिवहन को सुचारू रखते हुए यात्री ट्रेनों को लेट-लतीफी से बाहर निकालने की होगी.
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मनीष कुमार पाठक चक्रधरपुर डिवीजन में सीनियर डीसीएम का दायित्व निभा चुके हैं. यही कारण है कि वह डिवीजन की पूरी व्यवस्था से वाफिक हैं. वह पहले डीओएम कंट्रोल की भूमिका भी निभा चुके हैं. इस दौरान उनकी पहचान कुशल नेतृत्वकर्ता के रूप में रही है. हालांकि बतौर सीनियर डीसीएम मनीष पाठक अपने कार्यकाल में लिये गये कुछ निर्णयों को लेकर विवादों में भी रहे. हालांकि मधुर व सौम्य व्यवहार और मिलनसार छवि के साथ पारदर्शी और दूरदर्शी निर्णय लेने में उनकी योग्यता ने ही उन्हें जीएम अनिल कुमार मिश्रा के सचिव पद तक पहुंचाया. अब जबकि जीएम अनिल कुमार मिश्रा इसी माह रिटायर हो रहे है, उन्होंने मनीष कुमार पाठक को बड़ा दायित्व सौंपते हुए Sr. DOM(Co-ord) बनाकर चक्रधरपुर डिवीजन भेजा है.
मनीष पाठक की यह पोस्टिंग जीएम रहते अनिल कुमार मिश्रा के अंतिम कार्यकाल की है. लगता नहीं कि 31 मार्च को रिटायर हो रहे मिश्रा ऐसे अहम पद पर कही किसी और पोस्टिंग करेंगे. मिश्रा की विदाई बेला में उनके पूरे कार्यकाल की लोग अपने नजरिये से व्याख्या कर रहे. किसी को लगता है मिश्रा जी ने इतनी बड़ी कुर्सी पर रहते हुए भी बड़े से बड़े मुश्किल हालात को अपनी मुस्कान वाली कार्यशैली से निपटा दिया. नियम-कानून के विरूद्ध कोई काम भी नहीं किया और पैरवी करने वालों को भी नहीं लगा कि उनका काम नहीं होगा. मधुर वाणी से हर किसी को संतुष्ट करने में सफल रहे अनिल कुमार मिश्रा शायद ही किसी पैरवी को अपनी कलम का वाहन बनाये होंगे. यही उनकी विशेषता भी कही जा रही है और इसी के ईद-गिर्द उनके कार्यकाल की विवेचना भी हो रही है. इसमें अपवाद स्वरूप दिख रही है मनीष कुमार पाठक की यह पोस्टिंग!



















































































