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    Home » 1.51 करोड़ सलाना वसूलने वाला टीटीई अपने ही साथियों के निशाने पर, सीबीआई जांच की उठी मांग
    देश-दुनिया

    1.51 करोड़ सलाना वसूलने वाला टीटीई अपने ही साथियों के निशाने पर, सीबीआई जांच की उठी मांग

    Railhunt News DeskBy Railhunt News DeskJanuary 26, 2020
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    • मुंबई के एसबी गलांदे ने एक साल में 22 हजार बेटिकट यात्रियों से 1.51 करोड़ वसूली का बनाया है रिकार्ड
    • उनके साथ तीन अन्य टिकट निरीक्षकों ने भी एक करोड़ से अधिक की वसूली कर बनाया रिकार्ड
    • देश भर में ओपन लाइन और ट्रेन में चलने वाले टीटीई के लिए बड़ी मुसीबन बनकर आयी यह खबर
    • टिकट चेकिंग स्टॉफ ऑर्गनाइजेशन की मंच से उठे विरोध के स्वर, सदस्यों ने कहा-अनुशासित नियमों के तहत ऐसा कर पाना संभव नहीं

    रेलहंट ब्यूरो, नई दिल्ली

    सेंट्रल रेलवे मुंबई से आयी एक खबर इन दिनों देशव्यापी चर्चा का विषय बनी हुई है. चर्चा होना भी लाजिमी है क्योंकि मात्र चार टीटीई ने मिलकर रेलवे को एक साल में चार करोड़ से अधिक का मुनाफा करा दिया है. जबकि रेलवे का एक टिकट निरीक्षक औसतन एक साल में प्रतिदिन आठ केस बनाकर 6.3 लाख रुपये तक का राजस्व देता है. ऐसे में एक साल में 22680 बेटिकट यात्रियों से 1.51 करोड़ रुपये जुर्माना वसूलकर सेंट्रल रेलवे (सीआर) फ्लाइंग़ स्क्वाड के टीटीई एसबी गलांदे न सिर्फ अपने ही साथियों के निशाने पर आ गये है, वरन केस की संख्या और राजस्व वसूली के तरीकों पर भी गंभीर सवाल उठाये जाने लगे है. टीटीई का सबसे कड़ा विरोध इंडियन रेलवे टिकट चेकिंग स्टॉफ आर्गनाइजेशन के मंच से उठी है, जिसमें सदस्यों ने गलादे समेत अन्य टीटीई द्वारा वसूली गयी राशि और तौर-तरीकों की सीबीआई जांच कराने तक की मांग उठा दी है.

    रेलवे के करोड़ों का राजस्व वसूली की खबर भले ही सुखद अहसास कराती हो लेकिन ऐसे में जब रेलवे में अधिकांश यात्री टिकट लेकर सफर कर रहे हो तो एक टिकट निरीक्षक हर दिन 72 बेटिकट यात्रियों को कैसे जुर्माना कर रहा था यह सवाल स्वयं टिकट निरीक्षक ही उठाने लगे है? गलांदे के साथ तीन अन्य टिकट निरीक्षकों ने भी बेटिकट यात्रियों से बतौर जुर्माना 2019 में एक-एक करोड़ रुपए वसूली का रिकार्ड बनाया है. इनमें 20657 केस देकर सीटीआई रवि कुमार ने 1.45 करोड़, 16035 केस देकर 1.07 करोड़ और डी कुमार ने 15264 केस देकर 1.02 करोड़ राजस्व वसूलकर क्रमश : दूसरे, तीसरे नंबर और चौथे नंबर पर रहे हैं. इन टिकट निरीक्षकों का कहना है कि इन लोगों ने हर दिन 12 से 13 घंटे ट्रेन में बीताया है. सेंट्रल रेलवे के चीफ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर शिवाजी सुतार के अनुसार सेंट्रल रेलवे ने 2019 में 37.64 लाख बेटिकट और अनियमित ट्रेवल एजेंट से 192.51 करोड़ रुपए की वसूली की है. 2018 में यह आकड़ा 168.30 करोड़ वसूली का था. रिकॉर्ड वसूली के लिए टिकट निरीक्षकों को कई मंचों से बधाई भी मिल रही है.

    रेलवे के अनुशासित नियमों की परिधि में चलकर ऐसा कर पाना संभव ही नहीं है लिहाजा इन टिकट चेकरों ने राजस्व् का आकड़ा पाने के लिए नियमों को ताक पर रखा होगा, जो आज हजारों टिकट निरीक्षकों के लिए तनाव और परेशानी का कारण बन रहा है. सोशल मीडिया पर चल रही टिप्पणी

    इसके विपरीत, मुंबई के टिकट निरीक्षकों के राजस्व का आकड़ा देश भर में बहस का विषय बन गया है. जानकारों का मानना है कि रेलवे के अनुशासित नियमों की परिधि में चलकर ऐसा कर पाना संभव ही नहीं है लिहाजा इन टिकट चेकरों ने राजस्व् का आकड़ा पाने के लिए नियमों को ताक पर रखा होगा, जो आज हजारों टिकट निरीक्षकों के लिए तनाव और परेशानी का कारण बन रहा है. देश भर के टीटीई सोशल साइट पर इन टिकट निरीक्षकों के कृत्य को गलत ठहराते हुए उनपर अपनी भड़ास निकाल रहे है, हालांकि सीधे तौर पर अब तक किसी संगठन अथवा सिस्टम की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है.

    सोशल मीडिया पर दी गयी अपनी टिप्पणी में विजय सकरवार ने बताया कि ऐसे टीटीई स्लीपर के पास खड़े होकर जनरल टिकट को स्लीपर में कन्वर्ट करने का काम करते हैं. इन लोगों के कारण आज अच्छे स्टाफ भी इसी भेड़चाल में शामिल होना पड़ा रहा है क्योंकि उनके पास भी अब कोई चारा नहीं बचा. वहीं जयदेव परमार का कहना है कि ऐस टिकट जांच परिक्षक निरीक्षक केवल शयनयान श्रेणीके अनारक्षित यात्रियोसे H/T रसीद बनाते है और टार्गेट पूरा करते है, इनकी ईएफटी की जांच की जाये तो यह पता चल जायेगा कि बिना टिकट यात्रियों का पकड़कर अधिक फाइन नहीं किया होगा. वहीं सेवानिवृत्त सीटीआई प्रकाश चंद्र का कहना है कि टारगेट दिखाने व नाम चमकाने के लिए ऐसे टीटीई गलत तरीके से रसीद बनाते हैं, इनकी पोल खोलना जरूरी है. जबकि पंकज आर मिश्रा ने एक गंभीर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की है कि ऐसे टीटीई सीट खाली होने के बावजूद पेनाल्टी केस बनाकर निकल जाते है इससे रेलवे की छवि पर विपरीत असर पड़ता है.

    पहले से ही भारी दबाव में है टीटीई, कई कार्यालय कार्य में एंगेज  

    टिकट निरीक्षकों से जुड़े इंडियन रेलवे टिकट चेकिंग स्टॉफ ऑर्गनाइजेशन के एक पदाधिकारी ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि पहले से ही सभी डिवीजन में टिकट निरीक्षकों के ऊपर भारी दबाव है. रेलवे राजस्व की वसूली करने के साथ मान्य तरीकों को अपनाने की सीख दी जाती है जिससे टारगेट पूरा कर पाना मुमकीन नहीं होता. उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में टिकट चेकिंग स्टॉफ को कई डिवीजनों में निजी स्वार्थ वश दूसरे कार्याें में एंगेज करके रखा गया है इससे रेलवे का राजस्व प्रभावित होता है तो टिकट निरीक्षकों पर कार्य का दबाव बनता है. ऐसे में छोटी सी चूक में भी निशाने पर ले लिया जाता है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि दलाल टाइप के लोगों के कारण उनका अधिक से अधिक शोषण अधिकारी कर पाते है जबकि रेलवे के फेडरेशन भी इस मामले में कुछ नहीं बोलते. ……जारी 

    सोशल मीडिया पर चल रही टिप्पणी को देखें 

     

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