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नई दिल्ली में पुरानी पेंशन बहाली के लिए सत्याग्रह पर बैठे हजारों कर्मचारी

नई दिल्ली में पुरानी पेंशन बहाली के लिए सत्याग्रह पर बैठे हजारों कर्मचारी
  • पुरानी पेंशन बहाली के साथ ही पेंशन सत्याग्रह के समापन का किया आह्वान 
  • 67 लाख कर्मचारी परिवारों की सामाजिक सुरक्षा के लिए आमरण अनशन की तैयारी 

रेलहंट ब्यूरो, नई दिल्ली

दिल्ली और झारखंड में चुनावों से ठीक पहले पुरानी पेंशन बहाली को लेकर जोरदार आंदोलन दिल्ली में जोर पकड़ चुका है. नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के बैनर तले आयोजित सत्याग्रह में मध्यप्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के हजारों कर्मचारी शामिल होकर आंदोलन को धार दे रहे. नौ नवंबर से शुरू हुए सत्याग्रह के तीसरे दिन दिल्ली के शहीदी पार्क में कर्मचारियों से सकरार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए भेदभाव पूर्ण व्यवस्था को खत्म करने का अनुरोध किया.
नई दिल्ली में पुरानी पेंशन बहाली के लिए सत्याग्रह पर बैठे हजारों कर्मचारीसत्याग्रह का नेतृत्व एनएमओपीएस के दिल्ली अध्यक्ष व राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी मंजीत सिंह पटेल कर रहे है. इस मुहिम में 2004 से बहाल कर्मचारी शामिल हो रहे हैं. इस मौके पर मंजीत सिंह ने कहा कि लंबे समय से हमारी मांग सरकार से पुरानी गारंटीड पेंशन व्यवस्था को बहाल करने की रही है. लेकिन सरकार का रूख इस मामले में भेदभाव पूर्ण है. एक विधायक, सांसद, मंत्री, हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट के जज, आयोगों के सदस्यों को सकरार पुरानी गारन्टीड पेंशन दे रही है जो अल्पकालिक सेवा के लिए आते हैं तो देश के लिए शहीद होने वाले अर्धसैनिक बलों और 30–35 साल तक सेवा करने वाले सरकारी कर्मचारियों को यह क्यों नहीं!!.

01 जनवरी, 2004 से केंद्र सरकार और उसके बाद अन्य राज्यों (पश्चिम बंगाल को छोड़कर) ने सरकारी कर्मचारियों के लिये पुरानी गारंटीड पेंशन व्यवस्था को खत्म कर शेयर बाजार पर आधारित न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) की शुरुआत की थी. नई पेंशन व्यवस्था का विरोध करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि आज 15 साल बीत जाने के बावजूद एनपीएस कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति होने पर न तो सामाजिक सुरक्षा की गारन्टी तय हो पायी है जबकि प्रत्येक कर्मचारी के वेतन का 24% (10%कर्मचारी+14%सरकार) हर महीने पेंशन के नाम पर कंपनियों मे निवेशित किया जा रहा है और न ही सेवाकाल के दौरान कर्मचारी की मृत्यु हो जाने पर पारिवारिक पेंशन की उपयुक्त व्यवस्था ही की गयी है.

एक विधायक, सांसद, मंत्री, हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट के जज, आयोगों के सदस्यों को सकरार पुरानी गारन्टीड पेंशन दे रही है जो अल्पकालिक सेवा के लिए आते हैं तो देश के लिए शहीद होने वाले अर्धसैनिक बलों और 30–35 साल तक सेवा करने वाले सरकारी कर्मचारियों को यह सुविधा क्यों नहीं?

आंदोलित कर्मचारियों का कहना हैकि पेंशन सत्याग्रह एनपीएस स्कीम के तहत देश के 24000 करोड़ रुपये के हर साल होने वाले दुरुपयोग को रोकना है. इससे 67 लाख कर्मचारी परिवारों को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देने का प्रयास वह कर रहे है. 11 नवंबर को सत्याग्रह में उतराखंड से गोपाल जी, राजेंद सिंह, शंकर सिंह, सुरेंद्र, नवीन जोशी, मनोज कुमार, केदार सिंह, मुकुल आदि ने शामिल होकर आंदोलन को धार दिया.

इस मौके पर दिल्ली एनएमओपीएस की शिखा वर्मा ने कहा कि अब आर-पार की लड़ाई की जरूरत है. सरकार की इस कुव्यवस्था को खत्म करना ही होगा. रेलवे से सत्याग्रह में शामिल हो रहे रेलवे सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन मेंटेनर्स यूनियन के महामंत्री आलोक चंद्र ने कहा कि रेलवे के कई मंडल इस अभियान को अंतिम मुकाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभायेंगे. इसमें कई रेलकर्मी अपने पत्नी के साथ शामिल हो रहे है. दिल्ली के लोकेंद्र और अरविंद सिंह ने आह्वान किया कि अब सत्याग्रह का समापन पुरानी पेशन बहाली के साथ ही होगा. नेताओं ने चेताया कि अगर सरकार नहीं चेती तो कर्मचारी परिवारों के साथ आमरण अनशन पर भी बैठने से नहीं चूकेंगे. इस मौके पर दिल्ली टीम के संरक्षक डीएन सिंह ने कहा कि जल्द ही सत्याग्रह में अर्धसैनिक बल भी शामिल हो सकते हे.

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