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दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का 362 किलोमीटर सेक्शन ऑटोमेटिक सिग्नल प्रणाली से लैस, 100-100 मीटर की दूसरी पर चलेंगी ट्रेनें

S&T कर्मियों के लिए भारी रहे 24 घंटे, तीन तकनीशियनों की रनओवर से मौत
  • रेलवे ने पटरियों के सिग्नल सिस्टम में भी बदलाव किया

RAIPUR.  दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन में 362 किलोमीटर रेलवे लाइन को ऑटोमेटिक सिग्नल प्रणाली से लैस कर दिया गया है. यह माना जा रहा है कि अब ट्रेनों को समय पर चलाने में आसानी होगी. नये सिस्टम के अनुसार अब ट्रेनें 100-100 मीटर के अंतराल में एक के पीछे एक कर चल सकेंगी. वर्तमान में यह सिस्टम चालू हो चुका है और कई बार ऐसी ट्रेनों को एक के पीछे एक देखकर लोगों में भ्रम की स्थिति​ बनने लगती है. इसे लेकर लगातार ट्वीट किया जा रहा है. नया सिस्टम बिलासपुर, रायपुर और नागपुर सेक्शन में लगाया गया है.

नये सिस्टम में यह व्यवस्था की गयी है कि अगर किसी कारण से आगे वाले सिग्नल में तकनीकी खामी आती है तो पीछे चल रही ट्रेनों को अपने आप सूचना मिल जाएगी. जो ट्रेन जहां रहेंगी और वो वहीं रुक जाएंगी. कई बार इन सेक्शनों के एक ही दिशा में एक से अधिक ट्रेनों के रुकने से यात्रियों को भ्रम की स्थिति हो जाती है. खासकर जब आगे वाली ट्रेन रुकती है तो पीछे वाली ट्रेन सिग्नल के इशारे का फॉलो कर एक निश्चित दूरी के अनुसार उसके पीछे रुक जाती है.

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का 362 किलोमीटर सेक्शन ऑटोमेटिक सिग्नल प्रणाली से लैस, 100-100 मीटर की दूसरी पर चलेंगी ट्रेनें

प्रतीकात्मक

नागपुर से भिलाई 279 किलोमीटर, बिलासपुर–जयरामनगर के मध्य 14 किलोमीटर, बिलासपुर – बिल्हा के मध्य 16 किलोमीटर एवं बिलासपुर–घुटकू के मध्य 16 किलोमीटर, चांपा से कोरबा 37 किलोमीटर जैसे अनेक रेल खंडो में आटोमेटिक सिग्नल प्रणाली लागू की गई है. साथ ही कई महत्वपूर्ण रेलखंडों में इस प्रणाली को स्थापित करने का कार्य तेजी से चल रहा है.

आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने पटरियों के सिग्नल सिस्टम में भी कई बदलाव किया है. अब स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली यानी ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऑटोमेटिक ब्लॉक सिगनलिंग सिस्टम में दो स्टेशनों के निश्चित दूरी पर सिग्नल लगाए जाते हैं. नई व्यवस्था में स्टेशन यार्ड के एडवांस स्टार्टर सिग्नल से आगे लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर पर सिग्नल लगाए गए हैं. जिसके फलस्वरूप सिग्नल के सहारे ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे चलती रहती हैं.

ऑटोमेटिक सिग्नल प्रणाली लागू हो जाने से बहुआयामी लाभ रहा है. इससे एक ओर गाड़ियों की रफ़्तार तो बढ़ रही है,वही दूसरी ओर लागत की दृष्टि से भी यह काफी कम खर्चीला है. अब ऑप्टिकल फाइबर केबल लगाए जा रहे हैं जिसकी लागत भी कम होती है एवं इसके चोरी होने का भी भय नही रहता है.

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