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दुरंतो में पुणे से टाटा तक युवती को किया परेशान, स्टेशन पर परिजनों ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

दुरंतो में पुणे से टाटा तक युवती को किया परेशान, स्टेशन पर परिजनों ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा
पिटाई से बचाकर एक युवक को ले जाते जीआरपी के जवान
  • टीटीई ने सीट बदलकर जिम्मेदारी से कर ली इतिश्री, रंगरुट बताने वालों ने सेना को किया दागदार 

JAMSHEDPUR : ट्रेनों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर रेलवे की मुहिम प्रभावी नहीं नजर आ रही है. दुरंतो जैसी ट्रेन में जब महिलाएं  सुरक्षित नहीं तो आम ट्रेनों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है. घटना है 12221/Pune – Howrah AC Duronto Express में 6 नवंबर 2022 की रात से सुबह दिन भर एक युवती को लगातार कुछ मनचले परेशान करते रहे. खुद को सेना के रंगरुट बताने वाले इन जवानों ने युवती को पुणे से लेकर टाटानगर तक परेशान किया. युवती ने अपनी परेशान ट्रेन में चलने वाले TTE को भी बतायी लेकिन उन्होंने सीट बदलकर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली. इस तरह युवकों द्वारा युवती को परेशान करने का क्रम जारी रहा.

दुरंतो में पुणे से टाटा तक युवती को किया परेशान, स्टेशन पर परिजनों ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

पिटाई से युवक को बचाने जीआरपी के अधिकारी व जवान

युवती ने इसकी सूचना जमशेदपुर में रहने वाले अपने परिजनों को दी. शाम छह बजे ट्रेन के टाटानगर पहुंचने पर पहले से तैयार परिवार के सदस्य और सहयोगियों में युवती को परेशान करने वाले सेना के तथाकथित जवानों को खोज-खोजकर पीटना शुरू कर दिया. स्टेशन पर भगदड़ का माहौल उत्पन्न हो गया था. हालांकि रेल पुलिस स्टेशन पर मौजूद थी लेकिन युवती के परिजन उनके नियंत्रण में नहीं आ रहे थे. बोगी-बोगी में खोजकर युवकों की पिटाई की गयी. उत्पाती युवक शौचालय में जाकर छुप गये. इनमें से तीन को पकड़कर युवती के परिजनों ने जमकर धुना. तीनों को गंभीर चोटें भी आयी है.

किसी तरह आरपीएफ और जीआरपी के जवान तीनों युवकों को बचाकर रेल थाने ले आये. इस घटना के कारण स्टेशन पर अफरातफरी मची रही. 10 मिनट रुकने वाली ट्रेन को 35 मिनट से अधिक समय तक स्टेशन पर रोककर रखना पड़ा. पूरे घटनाक्रम में यह बात परेशान करने वाली है कि लंबी यात्रा में परेशान युवती को सुरक्षा बलों का साथ नहीं मिला. यह स्प्ष्ट नहीं है कि युवती ने सीधे शिकायत आरपीएफ को क्यों नहीं की? हालांकि सवाल यह भी अहम है कि जब युवती ने अपनी परेशान बताकर सीट बदला तो फिर ट्रेन के टीटीई ने यह बात आरपीएफ तक क्येां नहीं पहुंचायी?

ट्रेनों में महिलाओं की सुरक्षा को लकर लंबे-चौड़े दावे करने वाले आरपीएफ के पदाधिकारियों के लिए यह घटना एक सबक है जो ट्रेन में स्काट करने के दौरान एक अकेली युवती की परेशानी और बेचैनी को नहीं भाप सके. अब जरूरत है कि पूरे मामले की जांच कराकर स्कॉट के जवानेां और ट्रेन टीटीई से पूछताछ करने की कि किन परिस्थितियों में उन्होंने युवती को उनके हाल पर छोड़ दिया जिसकी परिणति टाटानगर में हंगामे और ट्रेन के विलंब के रूप में सामने आयी. इस घटना के लिए कौन लोग जिम्मेदार है? भविष्य में ऐसी घटना न हो इसके लिए आरपीएफ व कामर्शियल विभाग के अधिकारियों को सख्त दिशानिर्देश देने की जरूरत है.

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