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रेलवे ने बारीपदा में 1.40 करोड़ की लागत से हेरिटेज म्यूजियम का किया कायाकल्प

खड़गपुर. दक्षिण पूर्व रेलवे के खड़गपुर रेलमंडल अंतर्गत बारीपदा में 1.40 करोड़ की लागत से छह हजार स्क्वायर मीटर में फैले हेरिटेज रेलवे म्यूजियम का कायाकल्प कार्य पूरा हो गया है. म्यूजियम का आकर्षक शेड के भीतर रेलवे ट्रैक पर इंजन और कोच होंगे, इसके अलावा यहां बागीचा, शौचालय, बुकिंग काउंटर, आगंतुकों के लिए शेड व कुर्सियां, विद्युत सज्जा की भी व्यवस्था की गयी है. केंद्रीय जन शक्ति व ट्राइबल अफेयर मंत्री विशेश्वर टुडू और एमएलएल बारीपदा प्रकाश सोरेन 17 नवंबर बुधवार की शाम चार बजे इसे जनता को समर्पित करेंगे. यहां रिनोवेशन के सभी कार्य खड़गपुर डीआरएम मनारंजन प्रधान के सुपरविजन में किये गये.

मयूरभंज साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास को संरक्षित करने के लिए रेल मंत्रालय ने बारीपदा रेलवे स्टेशन पर इस संग्रहालय को बनाने का निर्णय लिया. दक्षिण पूर्व रेलवे, खड़गपुर रेलमंडल ने लगभग 1.55 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से परियोजना का निर्माण शुरू किया. भारतीय रेलवे के गौरवशाली इतिहास को याद रखने और संरक्षित करने के लिए यह पहल अनोखी थी. संग्रहालय में दो इंजनों और उनके डिब्बों को रखा गया है. लोगों के लिए एक पार्क भी बनाया गया है.

मयूरभंज में रेलवे का इतिहास 1904 से पहले का है जब रूपसा-बांगिरीपोसी नैरो गेज लाइन का काम महाराजा श्रीराम चंद्र भांजा देव द्वारा शुरू कराया गया था. तत्कालीन राजा श्रीराम चंद्र भांजा देव इंग्लैंड से तीन भाप और डीजल इंजन लाए थे. प्रारंभ में रूपसा से बारीपदा तक एक ब्रॉड गेज लाइन बिछाई गई थी और फिर इसे बंगिरीपोसी से तलबंद तक बढ़ा दिया गया था. बारीपदा रेलवे स्टेशन के पास बनाये गये इस म्यूजियम में रेलवे का इतिहास देखा जा सकता है.

मंडल रेल उपयोगकर्ता सलाहकार समिति (डीआरयूसीसी) के सदस्य हेमंत साहा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह परियोजना क्षेत्र में रेलवे के विकास के लिए मयूरभंज साम्राज्य के समृद्ध इतिहास और योगदान को दर्शाएगी. नई पीढ़ी प्रेरित होगी और वे विरासत संग्रहालय से बहुत कुछ सीख सकेगी.

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