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रेलवे बोर्ई ने निजीकरण पर कोई नया निर्णय लिया तो रेल चक्का जाम तय : शिवगोपाल

रेलवे बोर्ई ने निजीकरण पर कोई नया निर्णय लिया तो रेल चक्का जाम तय : शिवगोपाल
  • एआईआरएफ कार्यकारिणी में नहीं हुआ बदलाव, रखाल दासगुप्ता अध्यक्ष व शिवगोपाल मिश्रा फिर बनाये गये महामंत्री  

श्रीनिवास बाला, चेन्नई

ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन ने अपने तीन दिवसीय वार्षिक अधिवेशन के आखिरी दिन प्रस्ताव पारित करते हुए सरकार को अल्टीमेटम दे दिया कि अगर अब मंत्रालय निजीकरण, निगमीकरण पर कुछ भी नया कदम उठाता है तो रेल का चक्का जाम किया जायेगा. इसके साथ ही अध्यक्ष और महामंत्री को यह अधिकार दिया गया कि पूर्ण हड़ताल चक्का जाम के लिए वह अन्य फेडरेशन, ट्रेड यूनियन और एसोसिएशन को एक मंच पर लाने का प्रयास करें ताकि एक विशेष अधिवेशन बुलाकर हड़ताल की तारीख का ऐलान किया जायेगा. अधिवेशन में कुल 10 प्रस्तावों पर चर्चा हुई जिसमें रेल के निजीकरण और निगमीकरण का विरोध, श्रम कानूनों में बदलाव कर ट्रेड यूनियन ओर फेडरेशन को कमजोर करने का प्रयासों को लेकर खुले सत्र में चर्चा की गयी. इसमें यह निर्णय लिया गया कि रेलवे को बचाने और रेलकर्मियों के हित में आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया जाये. इस मौके पर महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने कहा कि सरकार की नीतियां न सिर्फ रेल और रेलकर्मियों के खिलाफ है, बल्कि ये देश के उन करोड़ों रेलयात्रियों के भी खिलाफ है जो आज भी सफर के लिए रेल का ही सहारा लेते है. महामंत्री ने सवाल किया कि रेलकर्मी 22 हजार ट्रेन रोजाना चला रहे है, तो ऐसा क्या है कि हम 150 कामर्शियल ट्रेनें नही चला सकते.

रेलवे बोर्ई ने निजीकरण पर कोई नया निर्णय लिया तो रेल चक्का जाम तय : शिवगोपालमहामंत्री ने कहाकि सरकार की कोशिश है कि रेल को किसी तरह सरकारी क्षेत्र से बाहर निकाले, लेकिन मजदूरों की ताकत वो नही समझ रहे हैं. नीति आयोग ने 100 दिन की जो कार्ययोजना बनाई है, उसमें रेलवे के निजीकरण और उत्पादन इकाइयों के साथ कारखानों का निगमीकरण का प्रस्ताव है. अगर ऐसा हुआ तो न भारतीय रेल सुरक्षित रहेगी, न रेल कर्मचारी सुरक्षित होंगे और न ही रेल यात्रियों को सस्ती रेल सेवा उपलब्ध होगी. कॉमरेड शिवगोपाल मिश्रा ने एक्ट अपरेंटिस पर कहाकि इस मामले में पुरानी व्यवस्था बहाल हो. पूर्व की तरह अपरेंटिसशिप पूरा करने वालो को सेवा में लिया जाये. उन्होंने लार्सजेस स्कीम के तहत रेलकर्मियों के बच्चों को नोकरी दिये जाने की वकालत की. फेडरेशन ने पुरानी पेंशन बहाली की मांग भी दोहरायी. कहा कि रि-इगेजमेंट से फेडरेशन सहमत नही है, हम चाहते है कि रिटायरमेंट के बाद लोग घर जाएं औऱ नए बच्चों को नोकरी का मौका मिले.

यह भी पढ़ें : रेलवे के निजीकरण की बात संसद में नहीं सिर्फ अखबारों में, दूरी पैदा कर रही झूठी खबरें : चेयरमैन

अधिवेशन में फेडरेशन के कार्यकारी अध्यक्ष एन कन्हैया ने कहाकि हमारे सामने चुनौती गंभीर है, हमारी लड़ाई एक ताकतवर सरकार से है, इसलिए हमें दोगुनी ताकत से संघर्ष के लिए मैदान में उतरना होगा. अधिवेशन में शामिल एनइ रेलवे मजदूर यूनियन के महामंत्री के एल गुप्ता ने कहा कि हालात है, उससे निपटने मुकम्मल हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नही है. अधिवेशन में आशीष विश्वास, , मुकेश गालव, मुकेश माथुर, आर डी यादव, आर सी शर्मा, महेंद्र शर्मा, अमित घोष, एस के त्यागी, एल एन पाठक, प्रीति सिंह, पी के शिंदे, एस एन पी श्रीवास्तव, ए एम डिक्रूज, गौतम मुखर्जी, पी के पटसनी, जया अग्रवाल, प्रवीना सिंह, बसंत चतुर्वेदी, अरुण मनोरे और आर के पांडेय ने भी विचार रखे. इस दौरान संविधान संशोधन को पास कर दिया गया.

अगले तीन साल के लिए फेडरेशन की कमेटी गठित

फेडरेशन के चुनाव में गठित नयी कमेटी में अध्यक्ष रखाल दास गुप्ता, कार्यकारी अध्यक्ष एन कन्हैया, महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा, कोषाध्यक्ष जे आर भोसले के अलावा उपाध्यक्ष एस एन पी श्रीवास्तव, सी ए राजा श्रीधर, के श्रीनिवास, अमित घोष, आर डी यादव, गौतम मुखर्जी, मनोज बेहरा, पी के पटसनी, सहायक महामंत्री के एल गुप्ता, एस के त्यागी, शंकरराव, आर सी शर्मा, मुकेश माथुर, मुकेश गालव, ए एम डिक्रूज और वेणु पी नायर को फिर से सर्वसम्मति से चुन लिया गया है.

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