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NDA सीलिंग का देश भर में विरोध, स्टेशन मास्टरों ने भूखे रहकर किया काम

नई दिल्ली. आइस्मा के आह्वान पर 31 अक्टूबर शनिवार को देश भर के स्टेशन मास्टरों ने भूखे रहकर काम किया. स्टेशन मास्टर रात्रिकालीन भत्ते में बेसिक पे पर सीलिंग लगाये जाने का विरोध कर रहे हैं. सरकार के इस निर्णय के विरोध में शनिवार को देश के 39 हजार स्टेशन मास्टरों ने काली पट्टी लगाकर विरोध दर्ज कराया और भूखे रहकर काम किया.

इससे पहले स्टेशन मास्टरों ने 20 अक्बूतर से 26 अक्टूबर तक काला सप्ताह मनाया था. आंदोलन के अगले चरण में सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने के लिए 31 अक्टूबर को 12 घंटे की भूख हड़ताल करने की घोषणा आइसमां ने की थी. इसके बाद कानूनी सलाह लेकर अदालत का दरवाजा भी खटखटाने की योजना है.

आज गुंटकल मंडल के रायचूर शाखा के प्रमुख स्टेशन मास्टरों ने सुबह से शाम तक भूखे पेट रह कर काम किया. इसमें डिप्टी स्टेशन मास्टर और ब्रांच सचिव आइस्मा संतोष कुमार पासवान, ओम प्रकाश , विवेकानंद, एसके सरकार, उदय कुमार, अरविंद कुमार, प्रवीन कुंज, शशिकांत समेत अन्य स्टेशन मास्टर शामिल थे.

इसके अलावा देश भर में स्टेशन मास्टरों ने नाइट ड्यूटी अलाउंस में सीलिंग लगाये जाने का विरोध किया है. इस क्रम में स्टेशन मास्टरों ने भूखे रहकर काम किया. स्टेशन मास्टरों का कहना है कि विपरीत परिस्थितियों में भी वह लोग रात में डयूटी करते है और इसके लिए सरकार उन्हें भत्ता देती है लेकिन इसमें सीलिंग लगाये जाने का निर्णय गलत है और उन्हें इससे मुक्त किया जाना चाहिए.

आइस्मा/ईसीआर के पूर्व जोनल अध्यक्ष मुंद्रिका प्रसाद सिंह ने अपने बयान में यह बताया कि आज भारत के सभी स्टेशन मास्टर सुबह 6:00 बजे से शाम के 6:00 बजे तक और कुछ स्टेशन मास्टर 24 घंटे तक भी भूख हड़ताल पर क्यों हैं ? रेलवे बोर्ड ने 29.09.2020 को एक पत्र निकाला जिसमें रात्रि ड्यूटी भत्ता के लिए एक शब्द पात्रता में सीलिंग 43600 निर्धारित कर दिया अर्थात 43600 से नीचे काम करने वाले स्टेशन मास्टर को रात में जग कर नौकरी करने हेतु भत्ता दिया जाएगा जबकि 43600 वेतन से ऊपर काम करने वाले स्टेशन मास्टरों को वही काम करने के लिए भत्ता नहीं दिया जाएगा. अब चुकी स्टेशन मास्टर सीधे-सीधे ट्रेन के परिचालन से जुड़े हुए हैं और गाड़ियां रात्रि में बंद नहीं होती है तो उनसे रात्रि में ड्यूटी लिया भी जा रहा है और भत्ता बंद कर दिया गया ऐसा क्यों, रेल प्रशासन के पास कोई जवाब नहीं है ? आपको क्या लगता है, यह काला कानून नहीं है ? जब आप रात्रि ड्यूटी भत्ता के कंसेप्ट को स्वीकार करते हैं और एक स्टेशन मास्टर को आप यह भत्ता देंगे और वही काम करने वाले दूसरे स्टेशन मास्टर को नहीं देंगे, क्यों भाई ?

यह  भी पढें : NDA के लिए स्टेशन मास्टरों का काला सप्ताह खत्म, भूख हड़ताल 31 को

आइस्मा के चेयरपर्सन धनंजय चंद्रात्रे ने दिया संदेश 

मेरे प्यारे स्टेशन मास्टर भाईयों और बहनो,

आज AISMA का एक दिवसीय सामूहिक उपोषण कार्यक्रम पूरे देश में संपन्न हो रहा है…!!

महात्मा गांधी के पद पथ पद पर चलते हुए…!
देश का किसी भी प्रकार का नुकसान किए बगैर….
रेलवे का किसी भी प्रकार का नुकसान किए बगैर….
पूरे देश में एक भी गाड़ी का चक्का रूकाये बगैर…..

बिना मोर्चा निकाले,
बिना भीड़ किए…..
बिना घेराव डालें….
पहली बार इतिहास में किसी ताकतवर संगठन ने अपनी मांग को इतने प्रभावी तरिकेसे प्रशासन तक पहुंचाया है….

हमारे इस आंदोलन का प्रभाव पूरा देश देख रहा है,

यह निश्चित है कि प्रशासन को हमारा सुनना होगा,…
यह निश्चित है प्रशासन को उनके गलत निर्णय पीछे लेने होंगे….,

एकजुटता पर भरोसा रखो….!!
अच्छे रास्ते पर कठिनाइयां जरूर है, परंतु वह निश्चित दिशा में जरूर जाता है और लक्ष्य की प्राप्ति उसी से होती है…..!

पूरे देश में चल रहे हैं उपोषण आंदोलन में सम्मिलित AISMA पर विश्वास रखने वाले…,
संगठन पर विश्वास रखने वाले….,
परिवार पर विश्वास रखने वाले….,
35000 स्टेशन मास्टरों का मैं अभिवादन करता हूं…, अभिनंदन करता हूं…,
उन्हें साधुवाद देता हूं…,

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