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देश भर के 35 हजार स्टेशन मास्टर आज ऑन डयूटी हंगर स्ट्राइक पर रहेंगे

24 घंटे भूखे रहकर ट्रेनों का परिचालन सुनिश्चित करायेंगे

नई दिल्ली. देश के लगभग 35 हजार स्टेशन मास्टर और सहायक स्टेशन मास्टर अपनी विभिन्न मागों को लेकर शनिवार 11 अगस्त को 24 घंटे के लिए भूख हड़ताल पर चले गये है. इस दौरान स्टेशन मास्टर भूखे रहकर अपनी ड्यूटी निष्ठा व ईमानदारी के साथ निभायेंगे. सात जुलाई 2018 को गुंटूर में आयोजित सेट्रल इंजीक्यूटिव कमेटी मीटिंग में 24 घंटे का देश व्यापी ऑन डयूटी हंकर स्ट्राइक का निर्णय लिया गया था. रेलवे बोर्ड ने जारी दिशानिर्देश में आंदोलित स्टेशन मास्टरों से अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से चर्चा करने और इतना ध्यान रखने की अपील की है कि आंदोलन से रेल संचालन किसी भी हालत में प्रभावित न हो.

स्टेशन मास्टरों के इस आंदोलन को रेलवे के कई संगठनों ने भी समर्थन देने की घोषणा की है. आल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन के सेक्रेटरी जेनरल धनंजय चंदात्रे ने समस्त स्टेशन मास्टरों से आंदोलन में अपनी पूरी भागीदारी निभाने और भूखे रहकर ड्यूटी करने का आहवान किया है ताकि सरकार को शर्म आए और वह उनकी मांगों को हल करने की दिशा में गंभीरता दिखाये.

सभी सहयोगी स्टेशन मास्टर आंदोलन में अपनी पूरी भागीदारी निभाये और  हंगर स्ट्राइक की अवधि में ट्रेनों का परिचालन पूरी निष्ठा और समय बद्धता के साथ सुनिश्चित करायेंगे. सरकार को हमारी मांगों को हल करने की दिशा में गंभीरता दिखानी होगी.

धनंजय चंद्रात्रे,  सेक्रेटरी जेनरल, ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन

इससे पूव विभिन्न मांगों को लेकर पिछले काफी समय से आंदोलित देश भर के स्टेशन मास्टरों ने गुंटूर महाधिवेशन में आर-पार की लड़ाई की घोषणा की थी. आंदोलित स्टेशन मास्टर आज 11 अगस्त को भूख हड़ताल में रहकर ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन कराने की जिम्मेदारी संभालेंगे. स्टेशन मास्टरों को रेलवे का ब्रांड एम्बेसडर माना जाता है. रेल यातायात में व सभी कामों में वे विभिन्न विभागों के केंद्र बिंदु होते हैं. जंगल व पहाड़ी क्षेत्रों के स्टेशनों में वे भलीभांति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं. इसके बाद भी रेलवे उनकी मांगों को लेकर कभी विचार नहीं करती है. रेल प्रशासन के इसी रवैए से परेशान होकर उन्होंने आंदोलन का रास्ता अपनाया है.

स्टेशन मास्टरों की मांगें

  • एमएसीपी से मिलने वाला तीसरा प्रमोशन (ग्रेड पे 5400) दिया जाए.
  • देशभर में कई ऐसे स्टेशन हैं, जहां स्टेशन मास्टरों को हर रोज 12 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है. ऐसे ड्यूटी रोस्टर तत्काल रद्द किया जाए.
  • स्टेशन मास्टर ट्रेनों को चलाने का काम करते हैं. इस दौरान संरक्षा व तनाव का सामना भी करना पड़ता है. उन्होंने संरक्षा व तनाव भत्ता दिया जाए.
  • स्टेशन मास्टरों की पूरी संख्या में से 15 प्रतिशत पद राजपत्रित स्टेशन मास्टर के रूप में सृजित किए जाएं.
  • जिन स्टेशनों पर ट्रेनों की संख्या बहुत है, ऐसे स्टेशनों पर सहयोग के लिए एक सहकर्मी स्टेशन मास्टर की नियुक्ति की जाए.
  • स्टेशन मास्टर जिन-जिन विभाग के कर्मचारियों का प्रमुख कहलाता है, स्टेशन मास्टरों का वेतनमान उनसे ज्यादा होना चाहिए.
  • जिन स्टेशनों के आसपास मेडिकल या शैक्षणिक सुविधाएं नहीं है, वहां स्टेशन मास्टर के परिवारों के नजदीक शहर में आवास की व्यवस्था की जाए.
  • स्टेशन में रेस्ट रूम की व्यवस्था की जाए.
  • स्टेशन डायरेक्टर का पद अनुभवी तथा सीनियर स्टेशन मास्टरों को दिया जाए.
  • नई पेंशन योजना रद्द कर पुरानी पेंशन योजना को लागू किया जाए.
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