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दक्षिण रेलवे एसआरएमयू के महामंत्री एवं सहायक महामंत्री के खिलाफ सीबीआई जांच

  • मामूली पार्सल पोर्टर से करोड़ की संपत्ति का मालिक बना यूनियन नेता
  • रेलवे बोर्ड ने सीबीआई को फॉरवर्ड की वाया पीएमओ से प्राप्त हुई शिकायत
  • सीबीआई की जांच सभी जोनल क्रेडिट सोसाइटीज तक विस्तारित करने की मांग
  • शिकायतकर्ता लारपुथा राज, तिरुनगर ने 9 मई 2018 को पीएमओ को भेजी थी शिकायत

दिल्ली. दक्षिण रेलवे मजदूर यूनियन (एसआरएमयू) के महामंत्री एन. कन्हैया और सहायक महामंत्री एस. वीराशेखरन के खिलाफ रेलवे बोर्ड ने सीबीआई जांच की अनुशंसा कर दी है. पीएमओ से 23 मई 2018 को की गयी अनुशंसा को रेलवे बोर्ड ने सीबीआइ को भेजते हुए कहा है कि दोनों यूनियन पदाधिकारियों द्वारा बड़े पैमाने पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के साथ ही सदर्न रेलवे एम्प्लाइज को-आपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी, त्रिची में अनियमितता की गयी और एमएससीएस ऐक्ट, 2002 के बायलॉज, स्पेशल बाय लॉज एवं नियमों का उल्लंघन किया गया है. रेलवे बोर्ड ने इसे गंभीर मामला बताते हुए सीबीआई से गहराई से जांच व कार्रवाई का अनुरोध किया है. रेलवे बोर्ड ने दोनों यूनियन नेताओं के विरुद्ध कृषि एवं कोऑपरेशन विभाग के जॉइंट सेक्रेटरी एवं सीवीओ पी. के. बोरठाकुर को शिकायत के दूसरे भाग को फॉरवर्ड करते हुए उनसे सदर्न रेलवे एम्प्लाइज को-आपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी/बैंक में फंड की बड़े पैमाने पर अफरातफरी और नियमों के उल्लंघन से संबंधित जांच का अनुरोध किया है.

रेलवे बोर्ड की तरफ से यह दोनों पत्र डिप्टी डायरेक्टर/विजिलेंस (एएंडपी) आर. डी. राम द्वारा लिखे गए हैं. इन दोनों पत्रों की एक-एक प्रति पीएमओ में डिप्टी सेक्रेटरी अजीत कुमार और मुख्य शिकायतकर्ता लारपुथा राज, तिरुनगर, पोन्नामलाईपट्टी, त्रिची को भी भेजी गई है. प्राप्त जानकारी के अनुसार लारपुथा राज सदर्न रेलवे एम्प्लाइज कोआपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी में निदेशक पद पर रहे हैं. उन्होंने पीएमओ को अपनी शिकायत 9 मई 2018 को भेजी थी. बताया जाता है कि श्री राज की यह शिकायत करीब 100-125 पेज की है. यानि श्री राज ने अपनी शिकायत के साथ समस्त पुख्ता प्रमाण भी पीएमओ को भेजा था. इसके अलावा उन्होंने अपनी शिकायत की एक प्रति समस्त कागजात के साथ रेलमंत्री पीयूष गोयल को भी उसी दिन भेजी थी. प्रधानमंत्री ने उनकी शिकायत की गंभीरता को बखूबी समझा और तत्काल कार्रवाई के लिए रेलवे बोर्ड को लिखा, जिस पर रेलवे बोर्ड ने भी अत्यंत फुर्ती दिखाई और अब यह मामला सीबीआई और जॉइंट सेक्रेटरी/सीवीओ, कोआपरेटिव सोसाइटीज की जांच के दायरे में आ गया है.

शिकायत में ‘माफिया यूनियन’ के महामंत्री एन. कन्हैया, जो कि कभी रेलवे में एक पार्सल पोर्टर हुआ करता था, की कुल संपत्ति 1500 करोड़ रुपये तथा सहायक महामंत्री एस. वीराशेखरन, सीटीटीआई, त्रिची मंडल, की कुल संपत्ति 100 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है. शिकायत में कहा गया है कि वीराशेखरन एसआरएमयू गोल्डन रॉक शॉप्स का इंचार्ज रहा है और ईएफ बुक्स मामले में उसकी संलिप्तता पहले से ही रही है, जिसमें करीब 80 लाख रुपये के घोटाले का मामला प्रमाणित है. हालांकि शिकायत में इन दोनों महाभ्रष्ट यूनियन पदाधिकारियों की कुल संपत्ति भले ही क्रमशः 1500 करोड़ और 100 करोड़ बताई गई है, मगर कई जानकार इससे असहमत होते हुए कहते हैं कि यह क्रमशः 5000 करोड़ और 1000 करोड़ रुपये के आसपास हो सकती है. सच्चाई क्या है, यह तो अब सीबीआई और केंद्रीय रजिस्ट्रार ऑफ कोआपरेटिव सोसाइटीज की जांच के बाद ही सामने आ पाएगा.

जानकारों का कहना है कि कुछ रेल अधिकारियों और फेडरेशन के पदाधिकारियों के संरक्षण और वरदहस्त के चलते एक मामूली पार्सल पोर्टर आज हजारों करोड़ की संपत्ति का मालिक बन बैठा है. बताया जाता है कि सीबीआई जांच में कई रहस्य सामने आ सकते है. बताया जाता है कि करीब 20 साल पहले भी इस पार्सल पोर्टर के घर एवं दफ्तर में सीबीआई ने छापा डाला था, जिसमें बोरों में भरे हुए अरबों रुपये बरामद हुए थे. तब तीन दिन की मोहलत ‘मैनेज’ करके और रेलकर्मियों के नाम रातोंरात फर्जी रसीदें काटकर उन नोटों को रेलकर्मियों से प्राप्त चंदा बताकर पूरे मामले को रफादफा कर दिया गया था. हालांकि सीबीआई में मामला चले जाने के बाद सच सामने आना तय हो गया है.
रेलवे बोर्ड द्वारा सीबीआई को मामला रेफर कर दिए जाने की जानकारी सोशल मीडिया में भी सार्वजनिक हो चुकी है और लगभग पूरी भारतीय रेल के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी इस मामले से अवगत हो चुके हैं. इसके बावजूद गत सप्ताह दक्षिण रेलवे मुख्यालय में एसआरएमयू द्वारा आयोजित कार्यक्रम मंच पर रेलवे के महाप्रबंधक, अपर महाप्रबंधक और डीआरएम, चेन्नई पार्सल पोर्टर की बगल में नजर आए.

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