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S&T कर्मियों के लिए काला सप्ताह, तीन दिन में दो सहयोगियों की मौत से गुस्सा चरम पर

  • रिस्क अलाउंस तथा नाईट ड्यूटी फेलियर गैंग की स्थापना के लिए 9 फरवरी को मनाया था काला दिवस
  • 28 मार्च को कोटा में आयोजित किया गया है संरक्षा पर राष्ट्रीय सेमिनार सह IRSTMU का वार्षिक अधिवेशन 
  • आश्वासन के नाम पर कमिटी गठित कर भूल गया बोर्ड, हर दिन रनओवर से सेफ्टी पर उठाये सवाल
  • निर्देश के बाद भी प्वाइंट लूब्रिकेंशन का काम इंजीनियरिंग की जगह एसएंडटी कर्मियों से कराया जा रहा है

नई दिल्ली. 13 मार्च को ईस्ट कोस्ट रेलवे के वाल्टेयर मंडल के गोपालपट्नम स्टेशन पर तैनात सिग्नल विभाग के कर्मचारी ए बाबू राव उस समय रनओवर हो गये जब वह सुबह प्वाइंट की लूब्रिकेंशन के लिए गये थे. उन्हें अकेले रनिंग लाइन पर भेज दिया गया था. एक अन्य घटनाक्रम में 15 मार्च नार्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के कटिहार मंडल के बरसोई स्टेशन पर टेलीकाम विभाग के कर्मचारी अक्षय कुमार सुबह 10:15 बजे रन ओवर हो गये. उन्हें भी अकेले ही रनिंग लाइन के करीब कार्य के लिए भेज दिया गया था. दोनों ही घटनाओं में एक बार कॉमन थी कि दोनों कर्मचारी रनिंग लाइन पर अकेले काम कर रहे थे. ऐसे में जब इंडियन रेलवे सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन मेंटेनर्स यूनियन IRSTMU कोटा में 28 मार्च को अपना वार्षिक अधिवेशन सह संरक्षा सेमिनार का आयोजन कर रहा है, इन दो घटनाओं ने संगठन से जुड़े लोग और कर्मचारियों को गहरे तक झकझोर दिया है.

रेलवे की दोनों मान्यता प्राप्त फेडरेशन के ढुलमूल रवैया और कार्यप्रणाली से निराश होकर रेलवे की विभिन्न विभागों में अगल-अलग संगठनों का गठन कर लिया गया है.  इंडियन रेलवे सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन मेंटेनर्स यूनियन एसएंडटी कर्मचारियों की मांगों को लेकर दो साल से लगातार प्रयासरत है. एसएंडटी कर्मचारियों के लिए रिस्क अलाउंस तथा नाईट ड्यूटी फेलियर गैंग की स्थापना की मांग संगठन लंबे समय से कर रहा. 9 फरवरी को इसी मांग पर IRSTMU ने देशव्यापी आंदोलन चलाया और काला दिवस मनाकर रेलवे बोर्ड का ध्यान अपनी ओर खींचने में बहुत हद तक सफल भी रहा. मेंटेनर्स यूनियन ने देश व्यापी अभियान चलाकर हजारों विभागीय कर्मचारियों को संगठन से जोड़ा और उनकी समस्याओं और जरूरी मांगों को लेकर सांसद से लेकर मंत्रियों तक पहुंच बनायी. इस तरह मेंटेनर्स यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन कुमार और महामंत्री आलेाक चंद बहुत हद तक योजना को फलीभूत करने में सफल भी रहे. सांसदों ने भी IRSTMU के रिस्क अलाउंस के फैक्टर को सही मानकर अपनी ओर से अनुशंसा रेलमंत्री व चेयरमैन से की लेकिन अब तक सिग्नल कर्मचारियों को यह सुविधा नहीं मिल सकी है.

यदि जल्द से जल्द संकेत एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों के लिए रिस्क अलाउंस तथा नाईट ड्यूटी फेलियर गैंग की स्थापना नहीं की जाती है तो IRSTMU किसी बड़े आन्दोलन को अंजाम देने को मजबूर होगा. आलोक चन्द्र प्रकाश, महासचिव, IRSTMU

IRSTMU के राष्ट्रीय महामंत्री आलोक चंद प्रकाश के अनुसार प्वाइंट लूब्रिकेंशन का काम इंजीनियरिंग विभाग का है लेकिन यह कार्य वर्षों से संकेत एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों को कराया जा रहा है. रेलवे बोर्ड स्तर पर लगातार जारी किये गये दिशानिर्देशों के बावजूद अब तक इंजीनियरिंग विभाग ने प्वाइंटस के लूब्रिकेंशन का काम अपने हाथ में नहीं लिया. दिलचस्प बात यह होती है कि प्वाइंटस फेल होने की स्थिति में संकेत एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों को ही चार्जशीट थमा दिया जाता है. स्टेशन मास्टर प्वाइंट फेल होने पर उसके लिए जिम्मेदार सिग्नल विभाग को ठहरा देते है और जाने-अनजाने में सिग्नल के कर्मचारियों पर कार्रवाई की गाज गिर जाती है. ऐसे में सिग्नल विभाग के कर्मचारियों को बिना रिस्क अलाउंस और बिना पूरी तरह संसाधनों से लैस किये हर दिन प्वाइंट लूब्रिकेंशन के नाम पर पटरी पर भेज दिया जाता है. अकेले कार्य के दौरान असावधानी और अन्य कारणों से कई कर्मचारी अब तक रनओवर हो चुके है. कर्मचारियों के रवओवर की रफ्तार को रोकने का कोई प्रभावी उपाय अब तक नहीं किया जा सका है.

IRSTMU ने गठन के दो साल में संकेत एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों के रन ओवर की घटनाओं को संजीदगी से रेल मंत्रालय तक उठाया. हालांकि इस लेकर गंभीरता रेल प्रबंधन की ओर से नहीं दिखायी गयी. IRSTMU के आह्वान पर बीते 9 फरवरी, 2019 को ही देशव्यापी अभियान में संकेत एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों ने रिस्क अलाउंस तथा नाईट ड्यूटी फेलियर गैंग की स्थापना की मांग के समर्थन में काला दिवस मनाया था. IRSTMU को यह उम्मीद थी कि रेल प्रशासन का ध्यान इस ओर जायेगा और कोई पहल की जायेगी. लेकिन ऐसा कुछ सकारात्मक ठोस कदम नहीं उठाया गया है. आश्वासन के नाम पर एक कमिटी गठित कर दी गई है परन्तु कर्मचारी इससे संतुष्ट नहीं है. अब IRSTMU इसे लेकर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तय करने में जुट गया है.

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