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स्टेशन मास्टरों का काला सप्ताह शुरू, काली पट्टी लगाकर किया विरोध, 31 को भूख हड़ताल

  • तीन चरण में आंदोलन चलायेगा आइस्मां, अंतिम चरण अदालत तक जायेगा

नई दिल्ली. रात्रिकालीन भत्ते की सीमा तय किए जाने के विरोध में देशभर भर के 39 हजार स्टेशन मास्टरों ने मोमबत्ती जलाकर विरोध दर्ज कराने के बाद 20 अक्टूबर से रेल प्रशासन के निर्णय के खिलाफ काला सप्ताह की शुरुआत कर दी है. इसके तहत देश भर के स्टेशन मास्टरों ने विरोध जताते हुए काली पट्टी लगाकर काम किया.

ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन के आह्वान पर यह विरोध सप्ताह मनाया जा रहा है. जिसमें 31 अक्टूबर को स्टेशन मास्टर भूख हड़ताल करेंगे. मालूम हो कि नाइट ड्यूटी अलाउंस सीलिंग लिमिट बेसिक पे 43,600 के आधार पर करने का विरोध किया जा रहा है. इसके तहत गुरुवार 15 अक्टूबर को देश भर में स्टेशन मास्टरों ने लाइट बंद कर मोमबत्ती जलाकर विरोध दर्ज कराया था. स्टेशन मास्टर एसोसिएशन की पहल पर 20 अक्तूबर से स्टेशन मास्टर काला सप्ताह मनाया जा रहा है.

मेरे प्यारे भाइयों, मुझे संघटन के शक्ति पर विश्वास है. संगठन की ताकत हर गलत निर्णय को पीछे हटाने में यशस्वी रहेगी तथा हमेशा की तरह हम यशस्वी रहेंगे. इस विश्वास के साथ इस आंदोलन में सम्मिलित सभी स्टेशन मास्टर का आभार —धनंजय चंद्रात्रे CP/AISMA

रेल हंट को जारी बयान में साउथ सेंट्रल रेलवे गुंटकल डिवीजन के ब्रांच सचिव संतोष कुमार पासवान ने बताया कि रेल प्रशासन के समक्ष विरोध दर्ज कराते हुए देशभर के स्टेशन मास्टरों ने ट्रेन संचालन को सुचारू रूप से चालू रखते हुए आज काला रिबन लगाकर आदेश पर विरोध दर्ज कराया है. एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने आदेश को रद्द नहीं किया तो 31 अक्टूबर को ऑन ड्यूटी एवं ऑफ ड्यूटी स्टेशन मास्टर 12 घंटे की भूख हड़ताल करेंगे.

यह भी पढ़ें : NDA : स्टेशन मास्टरों ने बत्ती बुझाकर-मोमबत्ती जलाकर रेल प्रशासन को दी चेतावनी

वहीं ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष धनंजय चंद्रात्रे ने जारी बयान में कहा कि नाइट ड्यूटी के सीलिंग के विरोध में हमने काली पट्टी बांधकर ड्यूटी करने का आंदोलन शुरू किया है. इससे पहले मोमबत्तियां जलाकर विरोध दर्ज कराने का बेहतर असर पड़ा और हमारी एकजुटता सामने आयी है. रेलवे बोर्ड तक पत्र और दूसरे माध्यमों से अपनी बात पहुंचायी गयी है. इसके बाद हम तीन चरण में आंदोलन को आगे बढ़ायेंगे.

इसमें पहला चरण वार्ता का होगा. इसके तहत एसोसिएशन के प्रतिनिधि रेलवे बोर्ड के अधिकारियों के साथ बात कर अपनी स्थिति को समझाने का प्रयास करेंगे. इसके बाद दूसरा चरण प्रतिक्रिया का होगा, जो हम अभी कर रहे हैं. आने वाले दिनों में आंदोलन के रूप में इसे तेज किया जायेगा. तीसरे चरण में हम अदालत का सहारा लेकर इस रेलवे के निर्णय को स्टे करने की पहल करेंगे.

 

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