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रेलवे जोन / बोर्ड

रेलवे में अब नहीं होगा अंडर द टेबुल काम, 34 तरह के छोटे कार्य भी ई-नीलामी से होंगे आवंटित  

  • रेलमंत्री की योजनाओं को पलीता लगाने में जुटे है उनके ही मातहत, निकाल रहे नियम में छेंद  
  • (NINFRIS) New Innovative Non Fare Revenue Ideas Scheme का दुरुपयोग 

नई दिल्ली. अश्विनी वैष्णव के प्रभार संभालने के बाद रेलवे तेजी से कॉरपोरेट क्लचर की ओर बढ़ रहा है. हालांकि पूर्व रेलमंत्री पीयूष गोयल के कार्यकाल में भी रेलवे के राजस्व को धुरी मानकर कार्य संपादित करने की परंपरा शुरू की गयी थी लेकिन इसे परवान वर्तमान रेलमंत्री के समय चढ़ाया जा रहा है. नये उपायों में रेलवे ने छोटे -छोटे कार्य के लिए नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रेलवे अब रेलवे स्टेशनों पर टॉयलेट पार्किंग और विज्ञापन का ठेका भी ई-नीलामी से देगा. रेलवे का मानना है कि इससे राजस्व को बढ़ाने में मदद मिलेगी तो दूसरी ओर व्यवस्था को परदर्शी बनाया जा सकेगा. तय किया गया है कि रेलवे अब छोटे कामों के लिए भी स्पॉट परचेज और छोटे टेंडर की प्रक्रिया को पीछे छोड़ते ही सभी के लिए रास्ते खोल देगा. इसके तहत ई-नीलामी से छोटे कार्याें का भी आवंटन किया जायेगा.

रेलवे नियमों में छेंद खोजकर तेजतर्रार अधिकारी अपने अनुभव व कूशलता का पूरा इस्तेमाल कर अपने चहेतों को अंडर द टेबुल उपकृत करने का रास्ता निकाल रहे हैं. ऐसा कर रेलमंत्री की योजनाओं में पलीता लगाया जा रहा है. नयी योजना  (NINFRIS) New Innovative Non Fare Revenue Ideas Scheme के नाम पर कई जोन में अपने चेहतों को नये प्रोजेक्ट आने-पौने दाम में थमा कर रेलवे को करोड़ों की क्षति पहुंचाने की मामले भी सामने आये हैं.

मीडिया से बात करते हुए उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉक्टर शिवम शर्मा ने बताया कि अब छोटे कार्यों के लिए टेंडर जारी करने की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी. अब छोटे कार्य के लिए ई टेंडर से नीलामी होगी. वेबसाइट के जरिए आवेदक बोली लगा सकेंगे. अधिक बोली लगाने वाले को काम मिलेगा.

ऑनलाइन तरीके से ई-नीलामी की प्रक्रिया अपनाकर काम का आवंटन किया जाएगा. रेलवे स्टेशन पर टॉयलेट की व्यवस्था हो या पार्किंग के लिए दिए जाने वाला ठेका सभी अभी नीलामी के जरिए ही तय किए जाएंगे. इसके अलावा स्टेशन व परिसर में एटीएम आदि लगाने का कार्य भी ई-नीलामी से ही संपादित किये जायेंगे. इसकी विस्तृत सूचना जल्द जारी की जायेगी.

राजस्व की संभावनाएं तलाश रहे रेलवे का मानना है कि अधिक से अधिक प्रतिद्वंदिता होने से रेलवे का लाभ होगा तो इसके साथ ही कार्य की गुणवत्ता में भी सुधार होगा. अब रेलवे खान-पान सेवा, सफाई, टॉयलेट, पार्किंग, प्रचार के लिए विज्ञापन व्यावसायिक स्थल के अलावा कुल 34 छोटे कार्यों का चयन की नीलामी प्रक्रिया से करेगा. लोग रेलवे की वेबसाइट के जरिए बोली लगा सकेंगे. इससे काम की प्रक्रिया तेज होगी, कागजी प्रक्रिया में होने वाले समय की बचत होगी तो डिजिटल भारत के सपने को सार्थक करने में भी मदद मिलेगी.

अब देखना यह होगा कि इस नियम में छेंद निकालकर तेज-तर्रार अधिकारी कैसे रास्ता निकालते हैं. अब तक तो यही होता है कि रेलवे के नियमों की गलत व्याख्या कर अधिकारी अपने अनुभव व कूशलता का पूरा इस्तेमाल कर अपने  चहेतों को अंडर द टेबुल उपकृत करने का रास्ता निकाल ही लेते हैं. नयी योजना  (NINFRIS) New Innovative Non Fare Revenue Ideas Scheme के नाम पर कई जोन में अपने चेहतों को नये प्रोजेक्ट आने-पौने दाम में थमा कर रेलवे को करोड़ों की क्षति पहुंचाने की मामले भी सामने आये हैं.

 

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