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आगरा : वीआरएस देने वाले अधिकारी नौकरी वापस लेने के लिए पहुंच गये कैट, रेलवे भी अड़ा

NEW DELHI. रेलवे में 35 साल तक काम करने के बाद अपने वरिष्ठ अधिकारी से कहासुनी को लेकर 56 वर्षीय ट्रेन नियंत्रक ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली. अब वह अपनी नौकरी वापस पाना चाहते हैं और यही अनुरोध लेकर उन्होंने केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) का रुख किया है. दिनेश कपिल ने अपना स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) आवेदन वापस लेने के लिए विभाग को पत्र लिखा था, लेकिन उससे इनकार कर दिया गया. इसलिए उन्होंने कैट में अर्जी दी है और कहा है कि उनकी जगह लेने वाले अधिकारी को ऐसे महत्वपूर्ण पद पर पदोन्नत किए जाने से पहले और परिपक्व होने की जरूरत है.

मीडिया में आयी खबरों के अनुसार कपिल के वीआरएस आवेदन के बाद नियंत्रण विभाग के प्रमुख का पद संभालने वाले उनके उत्तराधिकारी ज्ञान सिंह के बारे में बताया जाता है कि मार्च, 2021 में दिल्ली आने वाली विशेष सैन्य मालगाड़ी को जयपुर भेज दिया था. यह बड़ी भूल थी और इसे लेकर रेलवे की बहुत किरकिरी हुई थी. वहीं, मौजूदा विवाद तीन नवंबर, 2022 का है जब कपिल की उनके वरिष्ठ अधिकारी वरिष्ठ संभागीय संचालन प्रबंधक कुलदीप मीणा से कहासुनी हो गई. कपिल का आरोप है कि मीणा ने उन्हें वीआरएस लेने के लिए उकसाया और उन्होंने तत्काल इसके लिए आवेदन दे दिया. इसके चार दिन बाद सात नवंबर को कपिल को पता चला कि मुख्य नियंत्रक ज्ञान सिंह ने उनकी जगह ले ली है. और नियंत्रण विभाग के प्रमुख बन गए हैं.

दिनेश कपिल

कपिल ने कहा है कि अगले ही दिन आठ नवंबर को मैंने लिखित में अपना वीआरएस वापस लेने की इच्छा जतायी क्योंकि ज्ञान सिंह की पदोन्नति मेरे लिए आश्चर्य की बात थी. मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि ऐसे महत्वपूर्ण पद पर पदोन्नति से पहले उन्हें नियंत्रक की नौकरी के लिए और परिपक्व होने का समय दिया जाना चाहिए. हालांकि ज्ञान सिंह ने इस मामले में यह कहकर मीडिया से बात करने से इंकार कर दिया कि उन्हें यह अधिकार नहीं है.

इससे पहले ज्ञान सिंह पर लगे आरोपों के बारे रेलवे ने पारित आदेश में कहा है कि सेना की विशेष मालगाड़ी को धौलपुर (राजस्थान) से तुगलकाबाद (दिल्ली) पहुंचना था, लेकिन भ्रम की स्थिति में उन्होंने उसे अलवर की ओर भेज दिया और वह मालगाड़ी जयपुर पहुंच गयी. यह अकेले की नहीं बल्कि पूरी टीम की गलती है. यह दुर्भाग्यवश था कि ज्ञान सिंह उस टीम का हिस्सा थे. आगरा के संभागीय रेल प्रबंधक आनंद स्वरूप ने भी कपिल के आरोपों को खारिज किया और कहा, दिनेश कपिल के खिलाफ गंभीर आरोप है और इसलिए हमने उनकी वीआरएस की अर्जी स्वीकार की है.

वहीं, वीआरएस की अर्जी वापस लेने संबंधी कपिल के अनुरोध के विपरीत संभाग ने उसे तत्काल स्वीकार कर लिया और 11 नवंबर को उन्हें लिखित में इसकी सूचना भी दे दी. कपिल ने इस फैसले के लिए 28 नवंबर को कैट का रुख किया. कपिल के वकील नीलांश गौड़ का कहना है, अधिकरण ने 29 नवंबर को मामले की सुनवाई करते हुए रेलवे को नोटिस जारी किया था और मामले में यथास्थिति बनाए रखने को कहा था. उन्होंने (रेलवे) अगली सुनवाई के दिन, 19 दिसंबर को कोई जवाब दाखिल नहीं किया. अधिकरण ने अब अगली सुनवाई के लिए 14 फरवरी (2023) की तारीख तय की है. रेलवे ने अभी तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया है.

वहीं, हीं कपिल ने अपने जिन वरिष्ठ अधिकारी के साथ कहासुनी की बात कही है, उन्होंने (कुलदीप मीणा) का कहना है कि इस मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है. मीणा ने कहा, ”हमने उनसे कुछ सूचनाएं मांगी थीं और उनका दायित्व बनता है कि वह हमारे आदेश का पालन करें. इसके विपरीत, उन्होंने (कपिल) कहा ‘मैं तो वीआरएस अपनी जेब में रख कर घूमता हूं. हमने उनसे (वीआरएस) लेनेकोकहा. अब उन्हें पछतावा हो रहा है.

इसस मामले की सुनवाई ट्रिव्यूनल में 14 फरवरी 2023 को होनी है. इस मामले में रेलवे की ओर से अब तक कोई जबाव नहीं दिया गया है. हालांकि डीआरएम आगरा ने भी मीडिया से बातचीत में कहा है कि दिनेश के खिलाफ गंभीर आरोप है और उनके वीआरएस अनुरोध को स्वीकार करने का निर्णय लिया जा चुका है. हालांकि ट्रिव्यूनल ने इस मामले में सुनवाई करते हुए रेलवे को यथास्थिति बनाये रखने को कहा है.

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